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माता-पिता की सेवा नहीं करने वाली संतानों को अब जेल की सजा भी हो सकती है

मुख्यमंत्री वृद्ध जन पेंशन को लोक सेवाओं के अधिकार कानून (आर टी पी एस) के दायरे में लाने से संबंधित प्रस्ताव को भी मंजूरी

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बिहार सरकार ने आज एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है जिसमें माता-पिता की सेवा नहीं करने वाली संतानों को अब जेल की सजा भी हो सकती है ।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की हुई बैठक में समाज कल्याण विभाग के इससे संबंधित प्रस्ताव को स्वीकृति दी गयी। बिहार में रहने वाली संतान यदि माता-पिता की सेवा नहीं करती है तो उनको जेल की सजा हो सकती है । माता-पिता की शिकायत मिलते ही ऐसी संतानों पर कार्रवाई होगी। मंत्रिमंडल विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बताया कि मंत्रिमंडल ने 2007 में केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम में संशोधन किया है। पूर्व में बच्चों द्वारा प्रताडि़त किए जाने वाले माता-पिता को न्याय के लिए जिलों के परिवार न्यायालय में अपील करनी होती थी। जहां सुनवाई प्रधान न्यायाधीश के स्तर पर होती थी। अब माता-पिता जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित अपील अधिकरण में अपील करेंगे । जिलाधिकारी ही मामले की सुनवाई करेंगे।

श्री कुमार ने बताया कि मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री वृद्ध जन पेंशन को लोक सेवाओं के अधिकार कानून (आर टी पी एस) के दायरे में लाने से संबंधित प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है । अब आवेदन देने के 21 दिनों के भीतर पेंशन भुगतान पर हर हाल में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को फैसला करना होगा। ऐसा नहीं होने पर आवेदक अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) के पास अपील कर सकता है । एसडीओ इस पर 15 दिनों के भीतर फैसला कर लेंगे। एसडीए के फैसले के खिलाफ जिलाधिकारी (डीएम) के पास अपील होगी। डीएम को भी 15 दिनों के भीतर फैसला कर लेना होगा।

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