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रंगीन मछलियां झारखंड की महिलाओं का जीवन बना रहीं कलरफुल

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मनोज कुमार
रांची : रंगीन मछलियों का ध्यान आते ही हमारे जेहन में घरों के एक्वेरियम और बड़े-बड़े शीशे के बॉल में तैरती रंग-बिरंगी मछलियों की तस्वीर उभरकर सामने आ जाती हैं। इससे चेहरे पर एक अजीब-सी खुशी मिश्रित चमक दौड़ जाती है। ये मछलियां लोगों के ड्राइंग रूम की शोभा तो बढ़ाती ही हैं, हजारों महिलाओं की जिंदगी भी रंगीन बना रही हैं। उन्हें संबल प्रदान कर रही हैं। रंगीन मछलियां पालकर और उनका व्यवसाय कर ये महिलाएं समृद्ध हो रही हैं। घर की आर्थिक व पारिवारिक समृद्धि व वास्तु शास्त्र के हिसाब से रंगीन मछलियां पालने का प्रचलन बहुत पहले से रहा है। यह प्रचलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। लिहाजा रंगीन मछलियों की बिक्री महिलाओं की आमदनी का एक सशक्त जरिया भी बनता जा रहा है। सरकार का मत्स्य विभाग भी इसमे महिलाओं को भरपूर मदद कर रहा है। रंगीन मछली पालकर उन्हें बेचने और पैसे कमाने के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण और सारी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। सखी मंडल की महिलाएं रंगीन मछलियों का व्यवसाय कर सालाना 60 से 75 हजार रुपये तक कमा रही हैं। इस रकम से वे अपने व्यवसाय का विस्तार करने के साथ-साथ परिवार चलाने में भी सहयोग कर रही हैं। इससे परिवार के लोग भी काफी खुश हैं और समय मिलने पर सभी मिलकर सहयोग भी करते हैं। हम ऐसे ही एक सखी मंडल की महिलाओं से रूबरू कराते हैं जिनकी जिंदगी इन रंगीन मछलियों ने कलरफुल कर दी है।
मछलियों की कहानी, महिलाओं की जुबानी : बरियातू रोड के यूनिवर्सिटी कालोनी की सखी मंडल की पांच महिलाओं ने लगभग ढाई साल पहले मत्स्य विभाग से प्रशिक्षण लेकर रंगीन मछली पालन और उसका व्यवसाय शुरू किया था। सभी महिलाएं पांच से सात हजार रुपये हर महीने कमा रही हैं। सखी मंडल में धर्मशीला कुमारी, अभिलाषा तिवारी, सुमित्रा कुमारी, भानु देवी और निभा सिंह हैं। इन महिलाओं के अनुसार, मत्स्य विभाग ने न सिर्फ रांची बल्कि कोलकाता के आईसीएफई से रंगीन मछली पालने का प्रशिक्षण दिलाया बल्कि पालने के लिए सारी सुविधाएं भी उपलब्ध करायी। इसमें वाटर टैंक से लेकर रंगीन मछलियां, उनका दाना, दवाएं और उपकरण और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। कम लागत पर एक्वेरियम और शीशे के बॉल भी दिये। महिलाओं ने बताया कि वे प्रशिक्षण के आधार पर मछलियों की ब्रिडिंग कराती हैं और उन्हें लोगोें को बेचती हैं। विभिन्न प्रजातियों की >> शेष पेज 11 पर
ये मछलियां 30 रुपये जोड़े से लेकर 200 रुपये जोड़े तक में बिकती हैं। फाइटर नामक मछली तो अकेले ही 600 रुपये में बिकती है। इन्होंने बताया कि वे मार्केट में दुकानदारोें से भी कम, लगभग आधी रेट में मछलियां उपलब्ध करा रही हैं। महिलाओं ने बताया कि वे न सिर्फ मछलियां बेच रही हैं बल्कि कई अन्य महिलाओं और बच्चों को मछली पालने का प्रशिक्षण भी दे रही हैं ताकि वे भी अपने पैरों पर खड़े हो सकें। इन्होंने फूलो देवी व सुषमा के अलावा कृति, रीना, प्रिया व सूची आदि बच्चों को भी प्रशिक्षित किया है। हालांकि इनका कहना है कि विभाग बाजार भी उपलब्ध कराये तो ज्यादा अच्छा होगा। इनकी मांग है कि विभाग उन्हें सड़क पर काउंटर उपलब्ध कराये ताकि लोग आसानी से वहां से मछलियां खरीद सकें। घर से काम करने में थोड़ी परेशानी होती है क्योंकि लोगों की पहुंच थोड़ी कम है।
आम से खास तक हैं रंगीन मछली रखने के शौकीन : आम से खास लोग रंगीन मछली रखने के शौकीन हैं। सभी अपनी हैसियत के अनुसार एक्वेरियम मेंं मछली रखते हैं। राज्य के कई आइएएस अधिकारी और न्यायाधीश रंगीन मछली रखने के शौकीन हैं। जानकारी के अनुसार अविनाश कुमार, डॉ नितिन मदन कुलकर्णी, आदित्य स्वरूप के अलावा कई अन्य अधिकारी हैं जिन्होंने या तो एक्वेरियम रखा है या फिर टैंक बनवाकर उसमें रंगीन मछलियां रखी हैं ताकि उनका कलर ज्यादा निखरे। झारखंड उच्च न्यायालय के कई जज के यहां भी एक्वेरियम हैं जिनमें रंगीन मछलियां पाली गई हैं।
मत्स्य निदेशक डॉ एचएन द्विवेदी का कहना है कि रंगीन मछलियां पालकर और उन्हें बेचकर महिलाओं में संबल आ रहा है। महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में सरकार का यह एक बड़ा कदम है। रंगीन मछली पालने के लिए विभाग सखी मंडल की महिलाओं को फिश ब्रिडिंग व रखरखाव के प्रशिक्षण के साथ-साथ फैब्रिकेटेड टब सहित अन्य सभी संसाधन मुफ्त में उपलब्ध करा रहा है। इससे ज्यादा से ज्यादा सखी मंडलों को जोड़ा जा रहा है। अभी लगभग सौ से ज्यादा सखी मंडल इससे जुड़ चुके हैं। भविष्य में इन्हें बाजार के साथ-साथ अपना काउंटर खोलने में भी मदद की जायेगी।

-डॉ एचएन द्विवेदी, मत्स्य निदेशक मत्स्य विभाग के कलर फिश इंचार्ज अभय सांगा ने कहा कि रंगीन मछलियों की डिमांड काफी हो रही है। इस व्यवसाय में सखी मंडल की महिलाओं को जोड़ा गया है। उन्हें प्रशिक्षित कर रंगीन मछली की ब्रिडिंग कराने की जानकारी दी गई। यह काम वे अपने घर से कर रही हैं और सालाना 60-75 हजार रूपये कमा रही हैं। रांची जिले में लगभग 100 से ज्यादा सखी मंडलों को जोड़ा गया है। उन्हेें एक्वेरियम बनाना भी सिखाया जा रहा है और फिश बॉल कम दाम पर उपलब्ध कराया जा रहा है। जल्द ही महिलाओं को अपना आउट लेट खोलने में मदद प्रदान किया जायेगा। अभी छह महिलाओं को आउटलेट खोलने में मदद करने का प्रस्ताव है। इसके बाद आगे भी मदद दी जायेगी।
-अभय सांगा, मत्स्य विभाग के कलर फिश इंचार्ज

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