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राजस्थान मे पानी की विषम परिस्तिथियों से प्रशासन परेशान, बुलाई गई बैठक

राजस्थान के ऊर्जा मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने 43 हजार करोड़ रूपए की सहायता मांगी

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नई दिल्ली, 11 जून, 2019:  राजस्थान के ऊर्जा,जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी एवं भूजल मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने प्रदेश में पानी की विषम परिस्तिथियों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से राजस्थान  को पेयजल के लिए केंद्रीय सहायता प्रदान करने में प्राथमिकता देने और केंद्रीय हिस्सेदारी बढ़ाने की  मांग रखी है। डॉ.कल्ला सोमवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में आयोजित राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों की बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने राज्य के जल संसाधनों की उपलब्धता और आवश्यकता पर पर विस्तार से जानकारी देते हुए प्रदेश में पेयजल समस्या के स्थाई समाधान, राज्य में जल स्त्रोतों के संवर्धन व  सतही जल स्त्रोतों को जोड़ने के लिए पूर्वी राजस्थान कैनाल परियोजना एवं चम्बल, ब्राहम्णी बीसलपुर लिंक परियोजना के क्रियान्वयन के लिए अतिरिक्त बाह्य सहायता के रूप में 43 हजार करोड़ रूपए की विशेष सहायता उपलब्ध करवाने की मांग भी रखी।

डॉ. कल्ला ने कहा कि राज्य में प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष पानी की उपलब्धता 640 घन मीटर ही है, जबकि देश में यह 1700 घनमीटर तथा विश्व में यह 2000 घनमीटर है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में देश की कुल जनसंख्या का 5.5 तथा देश के कुल पशुधन का भी 18.70 प्रतिशत है। जल की अत्यधिक आवश्यकता और सतही जल की कम उपलब्धता के कारण प्रदेश में भूजल का औसतन दोहन 135 प्रतिशत है। इस कारण राज्य के कुल 248 ब्लॉक में से 25 ब्लॉक ही सुरक्षित हैं। मंत्री ने बताया कि राज्य में प्रतिव्यक्ति पेयजल पहुंचाने का खर्चा भी देश में सर्वाधिक है।

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उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 37126.90 करोड़ रूपए की लागत से 127 वृहद पेयजल परियोजनाएं स्वीकृत की गई है। डॉ. कल्ला ने बताया कि राज्य में जल उपलब्धता की विषम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने राजस्थान नदी बेसिन प्राधिकरण के साथ मिलकर वर्ष 2051 तक सभी क्षेत्रों में जल की मांग व उपलब्धता के उपयुक्त उपयोग के लिए राजस्थान राज्य जल ग्रिड की परिकल्पना के तहत 9 हजार 997 ग्राम पंचायतों को चरणबद्ध रूप से सतही भूजल उपलब्धता के लिए प्लानिंग की गई है। डॉ कल्ला ने जोधपुर बाडमेर जिले के लिए आरजेएलसी तृतीय चरण परियोजना, अलवर के लिए चम्बल अलवर डीएमआईसी ट्रांसमिशन परियोजना व  झालावाड़-बारां-कोटा जिले के लिए परवन पेयजल परियोजना की क्रियान्वति के लिए 8 हजार 172 करोड़ रूपए की विशेष सहायता उपलब्ध करवाने की बात कही। साथ ही कहा कि पश्चिम राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर, नर्मदा नहर आधारित योजनाओं के संवर्धन एवं विस्तार द्वारा पेयजल उपलब्ध करवाने, बीसलपुर जयपुर परियोजना के दूसरे चरण तथा गुणवता प्रभावित ढाणियों में सतही पेयजल योजना या तकनीक आधारित उपायों के लिए भी केन्द्र सरकार से सहयोग अपेक्षित है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य को सतही स्रोत आधारित परियोजनाओं में सम्पूर्ण परियोजना लागत का 4 प्रतिशत राशि ही प्राप्त हो सकेगी। उन्होंने राज्य सरकार वितीय संसाधनों की सीमित उपलब्धता के मद्देनजर केन्द्र सरकार द्वारा मरूस्थलीय जिलों में पेयजल योजना लागत राशि में शत प्रतिशत व गैर मरूस्थलीय जिलों में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग की जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री ने बताया कि खारेपन से प्रभावित देश की कुल ढाणियों व गांवों में से अकेले राजस्थान में 92 प्रतिशत स्थित है। इसके मद्देनजर राष्ट्रीय पेयजल ग्रामीण कार्यक्रम के तहत आर. ओ. प्लांट लगाने की वितीय स्वीकृति दी जानी चाहिए । डॉ. कल्ला ने प्रदेश में सौर उर्जा से संचालित नलकूप लगाने की वितीय स्वीकृति तथा पुराने डीफ्लोरिडेशन संयंत्र बदलने के लिए वितीय स्वीकृति की अनुमति देने की बात भी कही। बैठक में राजस्थान के पंचायतराज आयुक्त श्री पी सी किशन भी मौजूद थे।

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