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सरला-बिरला विवि में आयुर्वेद पर सेमिनार

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रांची : सरला बिरला विश्वविद्यालय प्रांगण में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभाग द्वारा योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा एवं वैकल्पिक चिकित्सा विधि के विभिन्न विधाओं का जैसे-पंचकर्म, षटकर्म, मर्म चिकित्सा, चूम्बकीय चिकित्सा, रेकी, प्राचीन भारती चिकित्सा पद्धतियों के साथ-साथ योग आयुर्वेद से जुड़े विभिन्न प्रकाशनों के पुस्तकों का प्रदर्शनी लगाया गया तथा विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न रोगों की नि:शुल्क चिकित्सकीय एवं परामर्श प्रदान की गई। जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित होकर विभिन्न प्रकार के विमारियों व उसके इलाज के बारे में उचित परामर्श प्राप्त कर लाभान्वित हुए।

मुख्य अतिथि के रूप में सतन आश्रम, धधकिया, दुमका के स्वामी आत्मानंदाजी, विशिष्ट अतिथि के रूप में फिनलैंड, यूरोप की स्वामिनी अनुराधा पुरी एवं बिरवेलिनेन, स्कॉन सिल्ली के केशवानंदजी महाराज, विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी प्रदीप कुमार वर्मा, देश के जाने माने आयुवेर्दाचार्य एवं जड़ी-बुटी विशेषज्ञ डॉ लुशु हेम्ब्रम, आयुवेर्दाचार्य अनिल कुमार झा, अर्जून भारती, कुल सचिव डॉ विजय कुमार सिंह के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया।

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इस अवसर पर मुख्य अतिथि स्वामी आत्मानंदाजी महाराज ने कहा कि आयुर्विज्ञान मूलत: जीवन जीने की विज्ञान है जो जीवन को आनंद व सुख पूर्वक जीने की विधाओं को बताता है। भारत अनादिकाल से योग व आयुर्वेद से सम्पन्न व समृद्धशाली रहा है। हमें वर्ष के 365 दिन आयुर्वेद के साथ मनाना चाहिए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी प्रदीप कुमार वर्मा ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभाग के अन्तर्गत प्राकृतिक चिकित्सालय निर्माण की मनसा जाहिर की।

कार्यक्रम के दौरान यूरोप, फिनलैंड से पधारी स्वामिनी अनुराधा पुरी ने बताया कि भारत की इस अतिप्राचीनतम एवं महानतम विधा व संस्कृति से प्रभावित होकर अपना संपूर्ण जीवन इस पुनीत राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है।
यूरोप से पधारी बिरवे लिनेन ने काफी हर्ष प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आयुर्वेद एवं योग से प्रभावित होकर काफी लम्बे समय से इस दिशा में काम कर रही हूँ। इस विधा के प्रचार-प्रसार तथा लोक स्वास्थ्य के कल्याण के लिए भारत सहित विश्व के कई देशों में जाकर अपना सर्वस्व समर्पित करने का व्रत लिया है।

विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ विजय कुमार सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए यह बताया कि सरला बिरला विश्वविद्यालय और सतन आश्रम के बीच परस्पर शैक्षिक आदान प्रदान के लिए हुए एमओयू पर हर्ष व्यक्त किया एवं कहा कि योग एवं आयुर्वेद जिस देश की विशाल विरासत है उनके नौजवानों को गौरव महसूश करने की आवश्यकता है। योग व आयुर्वेद के द्वारा ही व्यवस्थित व स्वस्थ्य जीवन शैली अपनायी जा सकती है। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के विभागाध्यक्ष प्रो कुमार राकेश रौशन पराशर ने कार्यक्रम का विषय प्रवेश कराया तथा पूरे प्रदर्शनी अवधि मेंलोगों की हरेक जिज्ञाशाओ का समाधान किया तथा विभिन्न रोगों के लक्षण एवं उनके बचाव के बारे में विस्तार पूर्वक बताया।

कार्यक्रम का संचालन अमृत सिंह के द्वारा किया गया जबकि धन्यवाद ज्ञापन ह्यूमनिटीज के डीन डॉ राधा माधव झा ने किय। इस अवसर पर डीन डॉ श्याम किशोर सिंह, डीन अकादमी कप्रो. श्याम किशोर सिंह, सरला बिरला पब्लिक स्कूल की प्राचार्या परमजीत कौर, रूपमणि पांडे, नर्सिंग की प्राचार्या श्रीमती सुबारीबारा, समन्वयक श्री आशुतोष द्विवेदी, डॉ. पूजा मिश्रा, प्रो. राहुल वत्स, प्रो. अशोक स्थाना, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. प्रिया चैरसिया, प्रो. अंजना कटारिया, प्रो. करन प्रताप सिंह, डॉ रिया मुखर्जी, प्रो मेघा सिन्हा, डॉ अमृता सरकार, प्रो अदिति सिंह, राहूल रंजन, सुभाषनाथ साहदेव, भारद्वाज शुक्ला सहित विश्वविद्यालय के सभी छात्र-छात्रा एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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