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हिंदी के प्रमुख साहित्यकार, निबंधकार आचार्य डा. रामचंद्र शुक्ल की मनाई गई जयंती

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अररिया – द्विजदेनी स्मारक उच्च विद्यालय, फारबिसगंज के प्रांगण में इंद्रधनुष साहित्य परिषद् के द्वारा  हिंदी के प्रमुख साहित्यकार, निबंधकार डा. आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता संवादिया के संपादक श्री मांगन मिश्र’मार्तण्ड’ ने की तथा संचालन विनोद कुमार तिवारी ने किया। सर्वप्रथम उपस्थित  साहित्यकारों तथा साहित्यप्रेमियों के द्वारा आचार्य शुक्ल की तस्वीर पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद शुक्ल जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा शुरू हुई।

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साहित्यकार हेमंत यादव ने  बताया कि आचार्य डा. रामचंद्र शुक्ल का जन्म  उत्तर प्रदेश के अगौना, बस्ती में 1888  में हुआ था। वे हिंदी के ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने  हिंदी साहित्य का इतिहास लिखा। इसमें उस समय के अनेक कवियों, साहित्यकारों  की काव्य कृति एवं उनका संपूर्ण परिचय भी है। हरि शंकर झा ने कहा कि  हिंदी पाठ्यक्रम को निर्धारित करने मे हिंदी साहित्य का इतिहास” का प्रमुख स्थान है। हिंदी साहित्य के इतिहास की दृष्टि से इसे पहला प्रयास माना जाता है।  हर्ष नारायण दास ने कहा कि आचार्य शुक्ल की कृतियों में ‘ रस मीमांसा , तुलसीदास, जायसी ग्रंथावली की भूमिका, चिंतामणि आदि प्रमुख है।  उन्होंने  ‘लाइट ऑफ एशिया’ पुस्तक का ब्रजभाषा में ‘ बुद्धचरित ‘ के नाम से तथा राख़ाल दास बंदोपाध्याय के बांग्ला उपन्यास का हिंदी में अनुवाद किया।

इस अवसर पर हसमत सिद्यक़ी, सुरेश कंठ, दिलीप समदर्शी, ने स्वरचित गजल और कविताएं सुनाई। समारोह के अंत में सभाअध्यक्ष श्री माँगन मिश्र मार्तंड ने सभी का आभार व्यक्त किया। मौके पर अरविंद कुमार, श्यामा नंद यादव, शिव नारायण चौधरी, सीताराम पाण्डे, अमरेंद्र कुमार सिंह, राम प्रसाद सिंह, हरि नारायण रजक, बलराम बनर्जी, प्रमोद दास, बबिता देवी, अरविंद कुमार आदि उपस्थित थे।

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