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आंवला के पेड़ के नीचे मनाई गई अक्षय नवमी

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संझौल प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र में कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को अक्षय नवमी के रूप में मनाया गया। इस साल अक्षय नवमी का व्रत 5 नंवबर को है। इस पर्व को मनाने वाले लोग भगवान विष्णु के प्रतीक आंवला पेड़ की पूजा करते हैं और परिवार की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। अक्षय नवमी की पूजा आवंले के पेड़ से जुड़ी होने के कारण इस आंवला नवमी भी कहा जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने का विशेष महत्व है। उत्तर भारत के कई इलाकों में आज के दिन लोग सबसे अच्छा और अपना पसंदीदा पकवान बनाकर आवंले के पेड़ के नीचे खाते हैं और पूजा के बाद सपरिवार आंवले के नीचे प्रसाद ग्रहण करते हैं। आवंले में बहुत सी बीमारियों से लड़ने की ताकत होती है, यहां तक कहा जाता है कि आंवले को अमृत्व प्राप्त है। कहा जाता है आंवले के नीचे भोजन करने से बीमारियों से छुटकारा मिलता है और शरीर स्वस्थ रहता है।
आंवला पेड़ पूजा का महत्व-
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग अक्षय नवमी के दिन आंवला वृक्ष का पूजन करते हैं उन पर लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं और मनोकामना पूर्ण करती हैं। कहा जाता है कि आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है लेकिन अक्षय नवमी के दिन इसमें सभी देवी देवता विराजते हैं। यानी अक्षय नवमी के दिन आंवले के पेड़ के पूजन से सभी देवी देवताओं की पूजा के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। वही शिक्षक मीरा देवी ने पूजा की महत्व बताते हुए लोगों से एक अपील भी की हर कोई इस दिन एक आँवला का वृक्ष जरूर लगाए। वही उपस्थित भाजपा के प्रखण्ड अध्यक्ष लव मिश्रा ने भी वृक्ष लगाने की अपील की।

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