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बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष उठाये छत्तीसगढ़ के सवा करोड़ आदिवासियों, गरीबों के मुद्दे

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शनिवार को मुलाक़ात की और छत्तीसगढ़ के सवा करोड़ आदिवासियों और अन्य गरीब परिवारों के जीवन से जुड़े लंबित विषयों के शीघ्र निराकरण का आग्रह किया ।
श्री बघेल ने प्रधानमंत्री को एक पत्र भी सौंपा और कहा कि छत्तीसगढ़ में किसानों के हितों को ध्यान रखते हुए राज्य सरकार ने किसानों से 2500 रुपये प्रति क्विटंल समर्थन मूल्य पर धान की खरीद की है। इससे राज्य में अतिरिक्त धान का उपार्जन हुआ हैं। उन्होंने आग्रह किया कि किसानों के हित को देखते हुए सार्वजनिक प्रणाली की आवश्यकता के अतिरिक्त चावल को केन्द्रीय पूल में लेने की स्वीकृति प्रदान करें।
राज्य के हर घर में नल कनेक्शन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की योजना के संबंध में मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि इसके लिए केन्द्र सरकार को शत प्रतिशत अनुदान प्रदान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शत-प्रतिशत विद्युतीकरण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास हुए हैं, उसी प्रकार हर घर में पेयजल की व्यवस्था के लिए भी प्रयासों की जरूरत है।वन अधिकारों की मान्यता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से कहा कि भारतीय वन अधिनियम, 1927 में प्रस्तावित संशोधनों में अनेक खामियां हैं जिससे वन क्षेत्रों में निवासरत आदिवासियों के हितों का संरक्षण नहीं किया गया है। उन्होंने इसमें संशोधन पर जोर दिया हैं ।
श्री बघेल ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा देश के लघु एवं सीमांत कृषकों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना आरंभ की गई है। इस योजना के हितग्राहियों में अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत वन अधिकार प्राप्त किसानों को शामिल नहीं किया गया है, उन्होंने इस योजना के अंतर्गत उक्त वन अधिकार प्राप्त किसानों को सम्मिलित करते हुए 12 हजार रुपये प्रतिवर्ष सम्मान निधि देने की मांग की।बैठक में उज्जवला योजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के तहत रीफिल कराये गये सिलिंडर की संख्या कम हैं। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के लिए एकमुश्त इतनी राशि देना संभव नहीं होने तथा दूरस्थ अंचलों में एल.पी.जी वितरकों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि न होना कम रीफिल का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि गरीबी की रेखा से नीचे आने वाले परिवारों को खाना पकाने हेतु ईंधन के रूप में केरोसीन की आवश्यकता होती है। अतः राज्य हित में केरोसीन का कोटा 1.15 लाख किलोलीटर से बढ़ाकर 1.58 लाख किलो लीटर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में उज्जवला योजना के अंतर्गत जारी गैस कनेक्शन का वार्षिक रीफिल प्रतिशत औसतन 1.7 है, जो कि अत्यंत कम है इसलिए पांच किलो वाले रसाेई गैस सिलिण्डर की आपूर्ति आॅयल कंपनियों द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में आपूर्ति की जानी चाहिए ताकि बीपीएल परिवार की क्रय क्षमता के अंतर्गत एलपीजी का उपयोग सुनिश्चित हो सके।
मुलाकात के दौरान उन्होंने आग्रह किया कि शासकीय उपक्रमों हेतु आवंटित खदानों में 100 रुपये प्रति टन के स्थान पर 500 रुपये प्रति टन प्रीमियम दिया जाये तथा छत्तीसगढ राज्य को उत्पादित विद्युत का हिस्सा भी दिया जाये। श्री बघेल ने राज्य की अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ-साथ समाज के वंचित एवं असहाय वर्ग की एक प्रमुख समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार के वर्तमान में निर्देश के अनुसार राज्य सरकार द्वारा संचालित एवं केन्द्र अथवा राज्य सरकार के स्वामित्व वाले छात्रावास/कल्याणकारी संस्थाओं को छोड़कर सभी छात्रावास/कल्याणकारी संस्थाओं को इस योजना के अंतर्गत खाद्यान्न आवंटन हेतु मान्य नहीं किया गया है। जिसके कारण राज्य सरकार से अनुदान एवं मान्यता प्राप्त 471 संस्थाओं के 43,640 अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ-साथ समाज के वंचित एवं असहाय वर्ग के लोगों के लिए अप्रैल 2019 से रियायती दर पर 655 टन चावल की आपूर्ति बंद हो गयी है। उन्होंने वंचित संस्थाओं को भी खाद्यान्न के आवंटन की मान्यता देने का आग्रह किया। श्री बघेल ने प्रधानमंत्री से फसल बीमा योजना में सुधार लाने, खाद्य सब्सिडी, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में आवटंन की समस्या, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण), गोबर-धन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) और स्टैंड-अप इंडिया योजना पर भी अपनी बात कही ।बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी भी उपस्थित थे ।

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