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Conspiracy : बिना जन सुनवाई, बिना निगम बोर्ड को बताए बदल दिया रांची का मास्टर प्लान

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गौतम चौधरी
रांची : चुनाव आयोग उधर झारखंड विधानसभा चुनाव की घोषणा कर रहा था, इधर एक दिन पहले नगर विकास विभाग के कुछ अधिकारी अफरातफरी में रांची के मास्टरप्लान में संशोधन का अवैध खेल खेल रहे थे। रांची नगर निगम के टाउन प्लानर गजानन राम ने शहर के मास्टर प्लान में महत्वपूर्ण बदलाव को अपने एग्जीक्यूटिव आर्डर द्वारा 30 अक्टूबर को जारी कर दिया। इस आदेश पर विभागीय मंत्री सीपी सिंह और नगर विकास विभाग के सचिव अजय कुमार सिंह का भी अनुमोदन है।

इस बदलाव की मंशा और समय पर सवाल उठ रहे हैं। रांची की मेयर आशा लकड़ा ने ऐसे किसी आदेश पर हैरानी जताते हुए इसे निरस्त कराने की बात कही है। आखिर इतने बड़े विषय पर बिना निगम को भरोसे में लिए गुप चुप ऐसा किसके दवाब में किया गया। शहर के मास्टरप्लान निर्माण में शामिल कई लोगों ने सवाल उठाया कि इतने बड़े फैसले से पहले जन सुनवाई होनी चाहिए थी, शहरवासियों से उनकी राय मांगी जानी थी. विशेषज्ञों ने कहा कि विभाग के कुछ लोगों ने जो आदेश जारी करवाया है, वह उसके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं है।

विभागीय मंत्री की संस्तुति के बाद अब कोकर का साधू मैदान ग्रीनलैंड नहीं निजी संपत्ति माना जाएगा साथ ही इसके भूमि उपयोग को परिवर्तित कर दिया गया है। यही नहीं नगर विकास विभाग ने हरमू बाईपास के अरगोड़ा चौक से लेकर बिरसा चौक तक सड़क से सटे भूभाग को व्यापारिक जोन के रूप में बदल दिया है। यह क्षेत्र पहले आवासीय उपयोग के लिए था लेकिन मास्टर प्लान में संशोधन कर इसे व्यापारिक जोन में बदल दिया गया है। यानि अब अशोक नगर के रोड से सटे इलाकों में और सामने भी मॉल और अपार्टमेंट बन सकेंगे।

क्या है मामला
नगर विकास विभाग की ओर से जारी एक अधिसूचना में बताया गया है कि माननीय मंत्री महोदय के आदेश के अनुसार फैडरेशन आॅफ चेंबर आॅफ कमर्स एंड इंडस्ट्री के रियल स्टेट उप समिति के चेयरमैन के पत्र, जो अन्य विभागीय पदाधिकारियों के अलावे विभागीय मंत्री को मिले थे, उसमें बताया गया था कि रांची मास्टर प्लान के जोन-सी में त्रुटि है। इसमें बताया गया है कि साधू मैदान हरित क्षेत्र है लेकिन यह हरित क्षेत्र न होकर किसी की निजी संपत्ति है। मंत्री की संस्तुति में बताया गया है कि इस त्रुटि को ठीक कर लिया गया है और अब साधू मैदान निजी संपत्ति ही माना जाएगा। इसके साथ ही साथ इस संस्तुति में यह भी कहा गया है कि हरमू बाईपास में अरगोड़ा से लेकर बिरसा चौक तक के दोनों किनारे की जमीन, जो आवासीय उपयोग के लिए है, उसका भूमि उपयोग परिवर्तित कर दिया गया है। अब यह क्षेत्र व्यापारिक काम के लिए उपयोग में लाया जाएगा। इसका भूमि उपयोग भी परिवर्तित कर दिया गया है।

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क्या है कानून
कानूनी पहलू को देखें तो नगर विकास विभाग खुद ऐसा नहीं कर सकता है। चूकि नगर निगम के सहयोग से किसी भी नगर का मास्टर प्लान बनाया जाता है इसलिए नगर निगम भी उस प्लान का हिस्सा होता है। इस प्रकार के परिवर्तन के लिए नगर निगम से अनुमति जरूरी हो जाता है लेकिन मंत्री की ओर से जारी आदेश में इस प्रकार की संस्तुति का कोई जिक्र नहीं मिलता है। दूसरी बात यह है कि मास्टर प्लान में परिवर्तन के लिए सरकार को बाकायदा नीति बनानी होती है। उसे मंत्रिमंडल में पास कराना होता है लेकिन नगर विकास विभाग ने इस प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की है।

जानकारों की राय
विभाग या विभागीय मंत्री सरकार के अंग हैं, सरकार नहीं हैं। इसलिए वे अपनी ओर से नगर के मास्टर प्लान को परिवर्तित नहीं कर सकते हैं। मास्टर प्लान बदलने के लिए सरकार को बाकायदा मंत्रिमंडल में नीति लानी होगी और उसे पास कराना होगा। यही नहीं नगर निगम भी एक लोकतांत्रिक इकाई है और उसका मुखिया महापौर होता है, इसमें उसकी अनुमति लेना जरूरी है। नगर निगम में यदि कोई मामला जाता है तो नगर निगम अपने योग्य अधिकारियों के माध्यम से बाकायदा उसकी जांच कराएगा फिर वह इस मामले में निर्णय देगा लेकिन नगर विकास विभाग ने यहां स्थापित नियमों का घोर उल्लंघन किया है।
– विशाल सिंहा, अधिवक्ता, झारखंड उच्च न्यायालय, रांची।

मुझे इस संदर्भ में कोई जानकारी नहीं है। नगर विकास विभाग के बारे में मैं कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हूं। नगर निगम, रांची का मामला है इसलिए मैं इसकी जांच कराउंगी। यदि यह गैरकानूनी पाया गया तो इसे निरस्त कर दिया जाएगा। बिना हमारे बोर्ड से पूछे कोई मास्टर प्लान में परिवर्तन नहीं कर सकता है। मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है इसलिए मैं इसपर अपनी कोई राय फिलहाल नहीं दे सकती हूं।
– आशा लकड़ा, महापौर, रांची नगर निगम, रांची।

ऐसा कुछ भी नहीं है। हमारे पास चेंबर आॅफ कमर्स का एक प्रस्ताव आया था और हमने उसे आगे बढ़ाया है। सही है, यह जबतक मंत्रिमंडल में पास नहीं होगा तबतक भूमि उपयोग में परिवर्तन नहीं हो सकता है। मामला क्या है, यह फोन पर नहीं बता सकता। आप आइए हम तसल्ली से बात करेंगे तब आपको पूरा मामला समझ में आएगा।
– गजानन राम, नगर निवेशक, रांची।

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