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निजीकरण, महंगाई, बेरोजगारी, असमानता एवं निराशा बढ़ाने का बजट – दीपांकर

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भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने चालू वित्त वर्ष के लिए आज संसद में पेश आम बजट को निजीकरण, महंगाई, बेरोजगारी, असमानता एवं निराशा बढ़ाने वाला बताया है।

श्री भट्टाचार्य ने आम बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बजट से देश के लोगों को घोर निराशा हुई है। इस बजट से जहां एक ओर महंगाई बढ़ेगी वहीं दूसरी तरफ बेरोजगारी की स्थिति अधिक विकराल होगी। उन्होंने कहा कि बजट से निजीकरण की राह खुल गयी है। इससे असमानता और बढ़ेगी जिससे लोगों में निराशा का भाव उत्पन्न होगा।

माले महासचिव ने कहा कि बजट में देश के मध्य वर्ग को कोई रियायत नहीं दी गई है। नौकरी पेशा तबका इस बात की उम्मीद कर रहा था कि पांच लाख तक की आय पर उसे पूर्ण टैक्स माफी मिले। अभी यदि पांच लाख से आमदनी कुछ भी बढ़ी तो फिर 2.5 लाख से ऊपर पर पूरा टैक्स देना होता है। सरकार ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया। रियल इस्टेट के कारोबार को कुछ गति देने के उद्देश्य से 45 लाख तक के आवास ऋण में जरूर टैक्स छूट को 2 लाख से 3.5 लाख रुपये किया गया है। हालांकि, इसका फायदा सीमित लोगों को पहुंचेगा।

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श्री भट्टाचार्य ने कहा कि बजट में एअर इंडिया सहित अन्य कंपनियों में विनिवेश की दीर्घकालिक योजना की घोषणा की गयी है। रेलवे में 50 हजार करोड़ के विनिवेश की घोषणा की है। बीमा क्षेत्र की कंपनियों में भी शत प्रतिशत विदेशी निवेश की घोषणा की गयी है। यह बजट सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण को और भी तेज गति देने वाला है। उन्होंने कहा कि एक देश एक ग्रिड और पानी एवं गैस के लिए भी एक अलग ग्रिड बनाने की मोदी सरकार की घोषणा बिजली, पानी और गैस पर भविष्य में पूरी तरह से कारपोरेट कंपनियों के नियंत्रण के लिए रास्ता खोलने के अलावा और कुछ नहीं है।

माले नेता ने कहा कि पेट्रोल-डीजल पर एक रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी और एक रुपये प्रति लीटर सेस बढाया गया है। इससे माल ढुलाई एवं यात्री किराए पर असर पड़ेगा और आम आदमी की रोजमर्रा के उपभोग की वस्तुओं सहित हर ओर महंगाई बढ़ेगी। इसके साथ ही सोना के आयात सहित कुछ अन्य धातुओं पर भी एक्साइज ड्यूटी ढ़ाई प्रतिशत तक बढ़ाई गई है। आयातित किताबों और मुद्रण सामग्री पर भी पांच प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी लगाई गई है। इससे लगभग हर क्षेत्र में महंगाई बढ़ेगी।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि बजट में श्रम कानूनों में बदलाव लाने की बात की गयी है जिससे मजदूरों की संगठित होने और पूंजीपतियों से मोलभाव की उनकी ताकत को कम किया जा सके। बजट में नए रोजगार सृजन के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोत्तरी, ग्रामीण रोजगार के लिए मनरेगा के बजट में बढ़ोत्तरी और सामाजिक सुरक्षा के सवाल पर बजट में कुछ नहीं है। यह बजट बेरोजगारी, असमानता को बढ़ाने वाला है और मजदूरों, असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए पूर्णतः निराशाजनक है।
माले महासचिव ने कहा कि बजट में आत्महत्या को मजबूर और सूखे से परेशान किसानों के लिए कुछ भी नहीं किया गया है। खेती के कारपोरेटीकरण और 85 प्रतिशत बीज बाजार पर बहुराष्ट्रीय निगमों का कब्जा हो जाने बाद बजट में मोदी सरकार का शून्य प्रतिशत लागत खेती का नारा एक हास्यास्पद जुमले के सिवाय कुछ नहीं है। किसानों के 10 हजार उत्पादक समूहों का गठन करने की मोदी सरकार की घोषणा भी किसानों के साथ मात्र छलावा है।

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