Sanmarg Live
Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, : Sanmarg Live, Morning India, Aawami News

सरकारी उपेक्षा से मैथिली भाषा और कला का विकास ठप

मैथिली फिल्म को मिले उद्योग का दर्जा

19

- Sponsored -

- sponsored -

मिथिलांचल ब्यूरो
दरभंगा : मैथिली लघु सिनेमा के 25 वर्ष के उपलक्ष्य में मैथिली फिल्म अकादमी द्वारा स्थानीय एमएलएसएम कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय मैथिली लघु फिल्म फेस्टिवल में देशभर से आये कलाकारों, निमार्ता-निर्देशकों ने भाग लिया।

इस मौके पर मैथिली लघु फिल्म के विकास को लेकर सभी की चिंता उभरकर सामने आयी। वर्तमान समय मे जहाँ दिन व दिन समय कीमती होता जा रहा है वैसे में लघु फिल्मो के उज्वल भविष्य के प्रति आशान्वित और प्रयत्नशील नजर आये। सबों ने एक स्वर से संवेद प्रयास को महत्वपूर्ण माना और नयी प्रतिभाओं को आगे आने का आह्वान किया।

इस अवसर पर जूट प्रतिनिधियों ने मैथिली लघु फिल्मो के विकास को लेकर अपने अपने विचार व्यक्त किये-मैथिली फिल्म के निर्देशक व लेखक कोलकता से आये शम्भुनाथ मिश्रा ने कहा कि इस क्षेत्र के विकास में नयी पीढ़ी को नये तकनीक के साथ आगे आना होगा दक्ष लोगो की आवश्यकता है। कोलकता से आयी अभिनेत्री गीता मिश्रा ने कहा कि इस क्षेत्र में टैलेंट की कोई कमी नहीं है जरूरत है फाइनांस की। समर्थ और समर्पित लोगो को अपनी मातृभाषा और कला क्षेत्र में योगदान करना चाहिए।

- Sponsored -

- sponsored -

दिल्ली से आये मैथिली फिल्मों के सुपरस्टार अनिल मिश्रा का कहना है कि दमदार स्क्रिप्ट, योग्य टीम और कुशल निर्देशन के बल पर कम बजट में भी लघु फिल्मों का बेहतर निर्माण सम्भव है। लघु फिल्मो के विकास से ही फुल लेंथ मूवी का भविष्य स्वर्णिम होगा। सीतामढ़ी से आयी अभिनेत्री व कवियित्री प्रीति सुमन ने मैथिली लघु फिल्म के उज्वल भविष्य के प्रति आशा व्यक्त करते हुए कहा कि मैथिली भाषा के साथ-साथ स्थानीय बोलियों के मिठास को फिल्म में समावेशित कर इस विधा को अधिक मनोरंजक और संवेदनशील बनाया जा सकता है। इस से एक बड़े दर्शक वर्ग को जोड़ा जा सकता है।

मुम्बई से आये लघु फिल्म पुनर्जन्म के लेखक, निर्देशक और अभिनेता अमर ज्योति ने कहा कि मोबाइल के इस युग में लघु फिल्मो के लिए वैश्विक बाजार और दर्शकवर्ग तैयार है आवश्यकता है सार्थक प्रयास करने की। कलात्मक फिल्मों की सम्भावनाये अधिक है, जरूरत है अच्छी पटकथाओं की। सस्ता जिंदगी मंहग सेनुर के निर्माता-निर्देशक बालकृष्ण झा ने सरकारी संरक्षण की आवश्यकता जतायी। उन्होंने कहा कि अष्टम अनुसूची में शामिल होने के बाद भी सरकारों द्वारा कोई गम्भीर प्रयास नहीं किया जा रहा है। दूरदर्शन तक पर मैथिली फिल्म और धारावाहिक के प्रदर्शन की कोई गुंजाइश नहीं है। सरकारी उपेक्षा से मैथिली भाषा और कला का विकास ठप है।  मैथिली फिल्म को उद्योग का दर्जा देकर सरकार इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर सकती है।

मैथिली फिल्मों की गायिका आशा इस क्षेत्र के लोगों से अपने विचार और सोंच को विस्तार देने का आह्वान करते हुए कहती है कि नकल से बचते हुए हमें फूहड़ और स्तरहीन गीत संगीत से दूर रहने की जरूरत है।लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। प्रसिद्ध साहत्यकार और फिल्मकार, साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता मधुबनी के ऋषि वशिष्ठ कहते है कि धीरे-धीरे बन्द हो रहे सिनेमा हॉल के इस दौर में लघु फिल्मों की संभावना उज्वल है। मिथिला की सभ्यता और संस्कृति से जुड़े साहित्य पर आधारित पटकथाओं के लेखन को लेकर साहित्यकारों को आगे आना चाहिए।

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored

- Sponsored -