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आखिर क्यों होता है “चमकी बुखार” जानिये…

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सन्मार्ग डेस्क पटना:-  पता चला है कि गर्मियों के दौरान इस इलाक़े में बच्चे लीची खाते हैं। यह माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति खाली पेट हो और वह लीची खा ले, तो लीची में मौजूद ‘हाइपोग्लायसिन ए’ और ‘मेथिलीन सायक्लोप्रोपाइल ग्लायसीन’ नामक तत्व उसका ब्लड शुगर बहुत ज़्यादा घटा देते हैं।

मेडिकल की भाषा में इसे ‘हाइपोग्लाइसीमिया’ कहा जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक़, जब लीचियाँ आधी कच्ची हों तो ब्लड शुगर घटने का ख़तरा और बढ़ जाता है। ब्लड शुगर के अचानक गिरने से व्यक्ति की तबीयत तेज़ी से बिगड़ने लगती है और सही इलाज न मिलने पर उसकी मौत हो जाती है। क्योंकि बच्चों का इम्यून सिस्टम ज़्यादा मजबूत नहीं होता है, इसलिए उनका शरीर इसका मुक़ाबला नहीं कर पाता।

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वहीं बिहार के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने सभी लोगों को सलाह दी है कि वे अपने बच्चों को खाली पेट लीची न खिलाएँ। ऐसा माना जा रहा है कि मुज़फ़्फ़रपुर में इन बच्चों की मौत का कारण यह हो सकता है कि उन्होंने सुबह खाली पेट लीची खायी होगी।

चूँकि मानसून के मौसम के दौरान मच्छर सबसे ज़्यादा प्रजनन करते हैं, इसलिए भी इस तरह के मामले बढ़ जाते हैं। एईएस से गंभीर डेंगू, खसरा या जीका वायरस का भी ख़तरा हो सकता है। चूँकि इसके लक्षणों की पहचान करना और इस पर नियंत्रण करना कठिन होता है, इसलिए अगर समय पर इलाज नहीं किया गया तो यह रोग घातक हो जाता है।

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