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सैकड़ों मौत के बाद भी सरकार नही ले रही है सबक, 2 साल बाद भी नही शुरू हुआ टीकाकरण

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मुजफ्फरपुर:- हाल के सालों में इस बार इस बीमारी से सबसे ज़्यादा बच्चों की मौत हुई है। बताया जाता है कि डॉ. हर्षवर्धन जब पिछली मोदी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे तो वे मुज़फ़्फ़रपुर में एक रात रुके थे और उन्होंने इस बीमारी के बारे में जानकारी ली थी। उस समय 2017 तक इस बीमारी का टीका लाने की बात कही गयी थी। अब जब डॉ. हर्षवर्धन फिर से मोदी सरकार में मंत्री बने हैं तो इस बीमारी के ख़ात्मे के लिए उनका विभाग जल्द से जल्द टीका लाएगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है।

सवाल यह भी उठ रहा है कि आख़िर इतनी बड़ी घटना के बाद भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब तक मुज़फ़्फ़रपुर का दौरा क्यों नहीं किया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से हालात पर नज़र रखने को कहा है लेकिन उन्हें ख़ुद भी वहाँ जाना चाहिए था। बिहार में तो बीजेपी-जेडीयू मिलकर सरकार चला रहे हैं और केंद्र में भी साथ-साथ हैं। ऐसे में इनके पास संसाधनों की भी कोई कमी नहीं है तो क्या सिर्फ़ यह कहने से कि लीची खाने से बच्चों की मौत हो रही है, इससे क्या सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से बच सकती है। अगर लीची से ऐसा हो रहा है तो बच्चों को इलाज तो सरकार मुहैया करा ही सकती है, या यह भी उसके बस की बात नहीं है, ऐसा तब है जबकि यह कोई नई घटना नहीं है।

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दूसरी तरफ रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन एसकेएमसीएच में तीन घंटा तक रूके। पीसी कि और कहा कि तीन घंटे में कई बच्चों की मौत हुई है। उनके परिजन, दादा, दादी से विस्तार से बात की है। सिर्फ स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते नहीं बल्कि एक डॉक्टर के होने के नाते और समस्या को समझने को लेकर बात किया हूं। हर्षवर्धन ने कहा कि मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच जो आईसीयू बनी हुई है व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। यहां पर कम से कम 100 बेड का नया आईसीयू बनना चाहिए। बनाने के लिए सरकार से आग्रह किया है।

अगले साल मई जून से पहले हो जाए, क्योंकि अप्रैल मई से इस तरह का केस आने लगते है। यहां पर एक रिसर्च सेंटर की भी जरूरत है। जिससे इस बीमारी पर रिसर्च किया जा सके. हर्षवर्धन ने कहा कि भारत सरकार इस बीमारी को गहराई से खत्म करेगी। फाइनेंशियल के साथ ही टेक्निकल सहयोग भी करेंगे। सबको व्यतिगत तौर पर इसकी मॉनिटरिंग भी करनी चाहिए। जो बच्चे भर्ती है उनको ठीक होने की कामना करता हूं।

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