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मौत का सिलसिला जारी “चमकी” बुखार से 84 बच्चों की मौत

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मुज़फ़्फ़रपुर:- चमकी बुखार से अब तक 84 बच्चों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों बच्चे बीमार हैं। बिहार का स्‍वास्‍थ्‍य विभाग व सरकार बच्चों के इलाज की बेहतर व्‍यवस्‍था करने के दावे कर रहे हैं, लेकिन मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।

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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन रविवार को मुज़फ़्फ़रपुर के एसकेएमसीएच में पहुँचे और उन्होंने हालात की जानकारी ली। डॉ. हर्षवर्धन के पटना पहुँचने पर उन्‍हें पप्‍पू यादव की जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए।

वहीं बीमार और मृतक बच्चों के परिजनों में इलाज की व्‍यवस्‍था को लेकर ख़ासा असंतोष है। अस्पताल में भर्ती एक बच्चे के पिता ने कहा कि यहाँ कोई भी व्यवस्था नहीं है, डॉक्टर ध्यान नहीं दे रहे हैं, यहाँ हर घंटे बच्चे मर रहे हैं। रात 12 बजे से यहाँ कोई डॉक्टर नहीं है और सिर्फ़ कुछ नर्स के भरोसे ही पूरा अस्पताल है।
बताया जाता है कि बरसात से पहले यह बीमारी हर साल बिहार में कहर बरपाती है। चमकी बुखार को डॉक्टरी भाषा में एक्यूट इंसेफ़ेलाइटिस सिंड्रोम यानी एईस कहा जाता है। 15 साल तक की उम्र के बच्चे ही इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। मरने वालों में अधिकांश बच्चों की उम्र एक से सात साल के बीच है। इसके अलावा बिहार के गया में अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज में गर्मी और लू से 12 लोगों की मौत हो गई है। गया के जिलाधिकारी ने बताया है कि 25 मरीज अभी और भर्ती हैं और उनका उपचार किया जा रहा है।

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