Sanmarg Live
Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, : Sanmarg Live, Morning India, Aawami News
BREAKING NEWS


{"effect":"slide-h","fontstyle":"bold","autoplay":"true","timer":"4000"}

27 घंटा बीतने के बाद भी गंतव्य तक नहीं पहुंच सकी है विसर्जन जुलुस

4

- sponsored -

- Sponsored -

संवाददाता
जाले : प्रखंड क्षेत्र के जालेश्वरी मंदिर परिसर में पूजित माँ दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन कार्यक्रम अपने पिछले वर्ष का ही रेकॉर्ड तोड़ता नजर आ रहा है। संभवत: 27 घंटा बीतने के बाद भी विसर्जन जुलुस अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचा है। यह अपने आप में एक अनोखा जुलुस है। मंगलवार को शाम के 5 बजे विसर्जन जुलुस गंतव्य की ओर निकला। जो बुधवार को एक बजे दिन तक आधा रास्ता ही तय कर पाया है। मालूम हो कि पिछले वर्ष पूजा स्थल से विसर्जन स्थल सुखाई पोखर डेढ़ किलोमीटर प्रतिमा विसर्जन में रेकॉर्ड 27 घंटा का समय लगा था। विसर्जन जुलुस की परम्परा भी निराली है। मंदिर से प्रतिमा जुलुस पुरूषों की अगुवायी में निकाली जाती है। इस दौरान सभी भक्त जय शिव-जय शिव का उद्घोष करते हुए परम्परागत हथियारों और योग व करतव दिखाते हुए महावीर मंदिर तक पहुंचते हैं।

यहां पहुंचते ही सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और युवतियों की अलग-अलग टोलियां विसर्जन जुलुस को अपने नियंत्रण में ले लेती है। मिथिला क्षेत्र से प्राय: विलुप्त होती परम्परा को आज भी यहां की युवतियां जीवित रखे हुए है। माँ दुर्गा की प्रतिमाओं के साथ युवतियां टोलियों में झिझिया नृत्य प्रस्तुत करते हुए आगे बढ़ती है। इसमें 21 या 31 युवतियों की टोलियां घड़ा पर दीप प्रज्वलित कर सिर पर रखकर अद्भुत नृत्य करती है।

- sponsored -

- Sponsored -

पहले दशहरा के दिन शहर या ग्रामीण दोनों ही इलाकों में झिझिया नृत्य करती हुई युवतियां नजर आती थी। लेकिन अब वह परम्परा प्राय: लुप्त सी हो गयी है। लेकिन जाले के इस क्षेत्र में आज भी झिझिया नृत्य को जीवंत रखा गया है। इस प्रकार महावीर मंदिर के बाद जुलुस महिलाओं के नियंत्रण में हो जाता है। इस अवसर पर सुखाई पोखर पर मेला का आयोजन भी किया जाता है।

इधर जुलुस में चल रहे लोगों के लिए भोजन-पानी आदि की भी व्यवस्था की जाती है। वहीं क्षेत्र के रेवढा, मनामदेव, घोघराहा, ब्रह्मस्थान मुरैठा गांव, भमरपुरा, राढ़ी ब्राह्मनटोली, राढ़ी मिडिल स्कूल चौक, जोगियारा, नरौछधाम, ब्रह्मपुर, कदमचौक आदि जगहों से मां दुर्गा की प्रतिमा का जलप्रवाह विसर्जन विभिन्न तालाबों, नदियों में कर दिया गया है।

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored