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हीन भावना से नहीं देखे कैदियों को : एसडीजेएम

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संवाददाता
बेनीपुर : सभी काराधीन बंदियों को जेल के अंदर मिलजुल कर रहें। किसी भी बंदी को हीन भावना की दृष्टि से देखना गलत है। जेल परिसर में सभी एक परिवार के सदस्य की तरह रहें। उक्त बातें उपकारा बेनीपुर में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसडीजेएम मो. फिरोज अकरम ने कैदियों को संबोधित करते हुए कहा।

उन्होंने कहा कि जेल में निरुद्ध लोगों पर अलग अलग तरह के अपराध करने का आरोप लगा होता है। किसी पर छोटे तो किसी पर गंभीर। परंतु जबतक न्यायालय द्वारा अपराध साबित न हो तबतक उनके उपर केवल अपराधी होने का सिर्फ आरोप हीं होता है। किसी भी कैदी के लिए कोई ऐसा शब्द का इस्तेमाल नहीं करें जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता हो। आपस में एक दूसरे का सहारा बनकर एक दूसरे को नेक सलाह दे।

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न्यायिक तंत्र पर भरोसा रखें और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करें। यदि किसी कैदी का मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं हो तो जेल प्रशासन को सूचना दें। ऐसे कैदी का उचित ईलाज कराने का प्रावधान है। जरूरत पड़ने पर मानसिक रोग से ग्रसित कैदी को जेल से बाहर भी उपचार कराया जाता है। जेल में कुल 125 बंदी है जिसमें आठ महिलाएं और उनके साथ दो छोटे बच्चे भी हैं।

एसडीजेएम के निर्देश पर कुछ बंदियों रामबहादुर यादव, ललित झा, बीरेंद्र कुमार, संतोष यादव, दुलार देवी का स्वास्थ्य जांच भी उपकारा चिकित्सक डा. मुकेश कुमार मिश्र ने कार्यक्रम के दौरान किया। जेल में कोई मानसिक रोगी नहीं है। मौके पर जेल उपाधीक्षक मिथलेश शर्मा, डा. राजेश झा, मिश्रक सुबोध कुमार, प्राधिकार सहायक कुमार गौरव मौजूद थे।

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