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बिहार के तीन बार मुख्यमंत्री रहे जगन्नाथ मिश्रा ने राजनीति का ककहरा किससे सीखा था

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन से राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर दौड़ गयी है। आइये जानते हैं डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा के जीवन का सफर।

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पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन से राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर दौड़ गयी है। आइये जानते हैं डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा के जीवन का सफर।
डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा का जन्म वर्ष 1937 में बिहार के सुपौल जिला स्थित एक छोटे से गांव बलुआ में हुआ। बड़े भाई ललित नारायण मिश्र राजनीति में थे और भारत के रेल मंत्री भी रह चुके थे। ऐसे में बचपन से ही जगन्नाथ मिश्रा का मन राजनीति में रम गया। उन्हीं से जगन्नाथ ने राजनीति का ककहरा भी सीखा।
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हालांकि अपना करियर उन्होंने बतौर प्रोफेसर शुरू किया। वे बिहार विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बने। लेकिन राजनीति में रुचि ने उन्हें कांग्रेस पार्टी का सदस्य बना दिया। राजनीति में उन्होंने अपनी अहमियत कुछ इस कदर साबित की, कि 1975 में उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया। दूसरी बार वे 1980 में मुख्यमंत्री बने और तीसरी बार 1989 में उन्हें मुख्यमंत्री पद को संभालने की जिम्मेदारी मिली। 90 के दशक में वे केन्द्र में कैबिनेट मंत्री भी रहे। लंबे समय तक कांग्रेस का झंडा उठाने के बाद वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए, और कुछ दिनों बाद जनता दल यूनाइटेड में।
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1990 में जगन्नाथ मिश्रा की सरकार जाने के बाद से अभी तक बीते 29 सालों में कांग्रेस राज्य में मुख्यमंत्री नहीं बना पायी। डॉ. जगन्नाथ मिश्र ही कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री रहे। उनके बाद पार्टी राज्य की सत्ता की कमान अपने पास रखने में असफल रही है। मिश्रा के बाद 1990 में लालू प्रसाद यादव राज्य के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद पिछले 30 सालों से कांग्रेस अपने बलबूते राज्य में सरकार बनाने में असफल रही है। वहीं करीब 15 सालों से नीतीश कुमार राज्य की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाला में जगन्नाथ मिश्रा का नाम आया और 30 सितंबर 2013 को रांची में CBI की विशेष अदालत ने 44 अन्य लोगों के साथ उन्हें दोषी ठहराया। और चार साल की कारावास के साथ ही 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके अलावा जनवरी 2018 में चारा घोटाला मामले में चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए पांच साल सश्रम कारावास की सजा सुनायी थी।

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जगन्नाथ मिश्रा लंबे समय से कैंसर और अन्य बीमारियों से ग्रसित थे, और उनका इलाज चल रहा था। आखिरकार 19 अगस्त 2019 को दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। इस तरह राजनीति के एक युग का अवसान भी हो गया।

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