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तीस साल बाद होगा किडनी ट्रांसप्लांट का सपना पूरा

अंगदान-जीवनदान-महादान : डॉ अशोक

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पटना/कार्यालय प्रतिनिधि
विश्व अंगदान दिवस के मौके पर पीएमसीएच के किडनी ट्रांसप्लांट विभाग में एक संगोष्ठि का आयोजन किया गया। संगोष्ठि में अंगदान के महत्व पर चर्चा की गयी। लोगों को अंगदान करने के प्रति लोगों को जागरूक किया गया और उनसे अंगदान करने की अपील की गयी।

मीडिया को संबोधित करते हुए किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि एक व्यक्ति अगर अपना अंगदान करता है तो वह कई व्यक्तियों की जिंदगी बचा सकते हैं। एक अंगदान से लीवर, किडनी, हार्ट, पैनक्रियाज सहित आठ तरह के अंग लेकर दूसरों की जान बजायी जा सकती है। देने वाले को इससे किसी प्रकार की हानी नहीं है। उस मिथ्या को भूल जाना चाहिए जिसमें यह कहा जाता है कि अंतिम संस्कार के समय शरीर का सभी अंग होना जरूरी है। वैसे भी मृत शरीर से एक निश्चित समय के अंतराल में अंग लिया जाता है और दूसरे के शरीर में प्रत्यारोपण किया जाता है।

उन्होंने बताया कि प्रत्यके वर्ष भारत में 2 लाख किडनी फेल्योर के मरीज जुड़ रहे हैं जबकि मात्र 8 हजार ही पूरे देश में किडनी का प्रत्यारोपण हो पा रहा है।

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1987 में बना किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट
पीएमसीएच में किडनी ट्रांसप्लाट यूनिट की आधारशिला तीन दशक पूर्व रखी गयी थी। लेकिन आजतक ट्रांसप्लांट का सपना पूरा नहीं हो सका। परंतु पीएमसीएच प्रशासन एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अशोक कुमार सिंह के लगातार प्रयास के बाद तीस साल बाद किडनी ट्रांसप्लांट का सपना दिसंबर माह तक पूरा होने की पूरी संभावना है। बिल्डिंग निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो चूका है। वैसे तो जून माह में ही भवन निर्माण कार्य की अवधी समाप्त हो चुकी है लेकिन निर्माण कार्य कर रही कन्सट्रक्शन कंपनी को चेतावनी देते हुए जल्द से जल्द निमार्ण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया है। उपकरण खरीदने की भी प्रक्रिया चल रही है। चिकित्सकों एवं अन्य कर्मियों के लिए 88 पद सृजित किये गये हैं। नियुक्ति की प्रकिया जारी है।

मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप के बाद आई तेजी

वर्ष 1995 से ही डॉ अशोक कुमार किडनी प्रत्यारोपण को लेकर प्रयास कर रहे थे। कई बार प्रत्यारोपण के लिए मरीज को भी तैयार कर लिया लेकिन कुछ मेडिकल लीगल प्रक्रिया के कारण प्रत्यारोपण नहीं हो सका। अंत में वर्ष 2013 में प्रत्यारोपण की बात को सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने एक कार्यक्रम के दौरान रखी गयी और मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लिया और विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया। 2017 में पीएमसीएच से विभाग को पत्र भेजा गया। पत्र के आलोक में विभाग से बिना देर किये हुए राशि मुहैया करा दी गयी। वर्ष 2018 में किडनी ट्रांसप्लांट विभाग बनाया गया। वर्ष 2018 में निविदा निकाली गयी और फिर भवन निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ।

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