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चुनाव और जीत कसौटी नहीं है बल्कि यह राष्ट्र की सेवा है – प्रधानमंत्री

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केरल – श्री मोदी ने अपने 30 मिनट के भाषण में कहा, “ चुनाव और जीत कसौटी नहीं है बल्कि यह राष्ट्र की सेवा है। मेरा लक्ष्य पूरे देश की प्रगति है तथा इसमें केरल को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।”प्रधानमंत्री ने राज्य की वामपंथी सरकार की कोई आलोचना नहीं कि लेकिन इस बात पर खेद जताया कि राज्य सरकार आयुष्मान भारत योजना में शामिल नहीं हो रही है जिसके तहत गंभीर बीमारियों के लिए हर वर्ष पांच लाख रुपये दिये जाते हैं।
मलयालम में अपना भाषण शुरू करते हुए उन्होंने सभी लोगों के लिए गुरुवायूरप्पन के आशीर्वाद की कामना की। उन्होंने कहा कि गुजरात का निवासी होने के नाते उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करने का सौभाग्य प्राप्त है जो द्वारिका में पले बढ़े।
हाल के चुनावों में अपनी पार्टी को मिले प्रचंड बहुमत के बाद पहला दौरा करने और सार्वजनिक रैली को संबोधित करने के लिए गुरुवायूर का चयन खासा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कोई महत्वपूर्ण घोषणा नहीं की, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि केंद्र सरकार मंदिर के विकास के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करेगी।प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरुवायुर को हाथी की आबादी के लिए जाना जाता है, लेकिन साथ ही गायों सहित सभी जानवरों को सुरक्षा दी जानी चाहिए। इसके लिए, उनकी सरकार ने पशु कल्याण और मत्स्य पालन के लिए अलग-अलग विभाग स्थापित किए हैं। पशुओं के उपचार के लिए विशेष योजना शुरू की गयी है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
राज्य में निपाह वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सभी प्रकार की केंद्रीय मदद का आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र राज्य सरकार के साथ मिलकर अपने सभी प्रयासों के तहत इस खतरे से उबारने के लिए काम करेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र केरल में एक विरासत पर्यटन योजना शुरू करेगा क्योंकि राज्य को आध्यात्मिकता के लिए जाना जाता है जिसमें पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि भारत अब विश्व यात्रा और पर्यटन संगठन द्वारा तीसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि प्रसाद योजना के तहत सरकार सात विशेष परियोजनाओं के माध्यम से तीर्थ केंद्रों को जोड़ने की योजना है।शुरुआत में, प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग सोच रहे होंगे कि चुनाव में उनकी पार्टी को एक सीट भी नहीं मिलने के बावजूद धन्यवाद व्यक्त करने वह केरल क्यों आए। उन्होंने कहा,“ हमारी परंपरा सभी लोगों को धन्यवाद देने की है, चाहे वे किसी को भी वोट दें। उन्होंने चुनाव की सबसे बड़ी प्रक्रिया में भाग लिया है।”श्री मोदी इसके बाद मालदीव और श्रीलंका की अपनी यात्रा के लिए कोच्चि रवाना हो गये।

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