Sanmarg Live
Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, : Sanmarg Live, Morning India, Aawami News
BREAKING NEWS


{"effect":"slide-h","fontstyle":"bold","autoplay":"true","timer":"4000"}

नवमी के दिन होती है मां सिद्धिदात्री की पूजा

11

- Sponsored -

- sponsored -

शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि को महानवमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है. मां सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से व्यक्ति को सभी देवियों की पूजा का फल मिल सकता है.

- Sponsored -

- sponsored -

इस दिन माता सिद्धिदात्री को नवाह्न प्रसाद, नवरस युक्त भोजन, नौ प्रकार के पुष्प और नौ प्रकार के ही फल अर्पित करने चाहिए. सर्वप्रथम कलश की पूजा व उसमें स्थपित सभी देवी-देवताओ का ध्यान करना चाहिए. इसके पश्चात माता के मंत्रो का जाप कर उनकी पूजा करनी चाहिए. इस दिन नौ कन्याओं को घर में भोग लगाना चाहिए. नव-दुर्गाओं में सिद्धिदात्री अंतिम है तथा इनकी पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर और 10 वर्ष तक होनी चाहिए और इनकी संख्या कम से कम 9 तो होनी ही चाहिए. यदि 9 से ज्यादा कन्या भोज पर आ रही है तो कोई आपत्ति नहीं है. इस तरह से की गई पूजा से माता अपने भक्तों पर तुरंत प्रसन्न होती है. भक्तों को संसार में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस दिन भक्तों को अपना सारा ध्यान निर्वाण चक्र की ओर लगाना चाहिए. यह चक्र हमारे कपाल के मध्य में स्थित होता है. ऐसा करने से भक्तों को माता सिद्धिदात्री की कृपा से उनके निर्वाण चक्र में उपस्थित शक्ति स्वतः ही प्राप्त हो जाती है.

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored