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संस्थागत प्रसव में पिछड़ रहा वारिसलीगंज पीएचसी

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नवादा। वारिसलीगंज पीएचसी अपने संस्थागत लक्ष्य से काफी पिछड़ रहा है। अस्पताल सूत्रों की माने तो चार माह पूर्व तक पीएचसी अपना निर्धारित लक्ष्य 280 प्रसव प्रति माह पूरा कर ले रहा था जो अब घटकर 160 हो गई है। ऐसा अस्पताल में कोई महिला चिकित्सक के नहीं रहने और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले प्रसव को कमीशन के लोभ में निजी चिकित्सालयों तक कुछ आशा कार्यकर्ताओं व नर्सों द्वारा पहुंचा देने के कारण हो रहा है। बताया जाता है कि वारिसलीगंज पीएचसी में मूल रूप से ग्रामीण क्षेत्र के गरीब परिवार के लोग अपना प्रसव करवाने पहुंचते हैं। जिन्हें बहला फुसलाकर निजी नर्सिंग होम में पहुंचा दिया जाता है। जबकि नगर के किसी नर्सिंग होम में कोई दक्ष महिला स्टाप नहीं होता है। जिस कारण कभी कभार जँचा और नवजात की मौत भी हो जाती है। पीएचसी के स्वास्थ्य प्रबंधक राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि सरकार संस्थागत प्रसव पूर्ण रूप से निःशुल्क व सुरक्षित करवाया जाता है।और अगर कोई आपात स्थिति उत्पन्न होती है तो सदर अस्पताल रेफर किया जाता है। उन्होंने बताया कि सुरक्षित प्रसव बाद मातृत्व लाभ के तहत माताओं के बैंक खाते में सरकार द्वारा निर्धारित राशि भी भेजने का प्रावधान है। प्रबंधक ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की अनुसूचित टोले के लोगो मे जागरूकता की कमी है जिसका लाभ निजी क्लीनिकों वाले उठाकर आर्थिक दोहण कर रहे हैं। प्रबंधक ने कहा कि वारिसलीगंज पीएचसी में रेफरल की महिला चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति की गई है। इसलिए क्षेत्र के लोग अपना सुरक्षित प्रसव के लिए पीएचसी में पहुंचे जहाँ 24 घंटे सेवा उपलब्ध रहती हैं।

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