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असंतुष्ट नेताओं से बात करने दिल्ली से रांची पहुंचे सौदान

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रांची : टिकट बंटवारे के बाद झारखंड प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में उत्पन्न गतिरोध स्पष्ट सुनाई दे रहे हैं। इस गतिरोध के कारण भाजपा के कुछ कद्दवर नेता पार्टी छोड़ कर जा चुके हैं और कुछ जाने की तैयारी में हैं। यही नहीं कुछ नेता पार्टी तो नहीं छोड़े हैं लेकिन आशंका यह है कि वे पार्टी में रहते हुए भीतरघात करेंगे और आधिकारिक उम्मीदवारों के सामने संकट पैदा करेंगे।

भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व इस परिस्थिति से निवटने के लिए डैमेज कंट्रोल की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। इसके लिए खास तौर पर भाजपा के राष्टÑीय सह संगठन मंत्री सौदान सिंह को रांची भेजा गया है। सौदान सिंह रांची पहुंते ही अपने काम में लग गए हैं। खबर है कि सौदान सिंह रांची पहुंचे मुख्यमंत्री रघुवार दास से स्थिति पर चर्चा की है।

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इसके बाद दास के घुर विरोधी सरयू राय और झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष दिनेश उरांव से उन्होंने बात की है। इस संदर्भ में भाजपा के नेता कुछ भी बताने से कतरा रहे हैं लेकिन सौदान सिंह ने विश्रामपुर के सुनील पांडेय, भवनाथपुर के अनंत प्रताप देव, डालटेनगंज के संजय सिंह, गुमला के कमलेश उरांव, हुसैनाबाद के विनोद सिंह, बोरियो के ताला मरांडी, पाकुर के देवीधन टुडू, हटिया के सीमा शर्मा, जामतारा के तरुण गुप्ता, सिंदरी के फूलचंड मंडल, खिजरी के आरती कुजूर, मांडू के पवन शाहू, जामा के एडवर्ड सोरेन, जामतारा विष्णु भईया, रांची के रमेश पुष्कर से बात करने की योजना बनाई है।

ये तमाम कार्यकर्त्ता टिकट की दौर में थे लेकिन पार्टी ने इन्हें टिकट न देकर दूसरे नेता को टिकट दे दिया है। इस मामले में पार्टी के एक नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि सौदान सिंह डैमेज कंट्रोल की पूरी कोशिश कर रहे हैं। जो नेता दूसरी पार्टी में चले गए हैं उनसे बात नहीं की जा रही है लेकिन जो नेता निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं या फिर पार्टी के अधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ भीतरघात में लगे हैं उनसे एक-एक कर सौदान सिंह बात कर रहे हैं। सौदान सिंह पर केन्द्रीय नेतृत्व ने फिलहाल यही जिम्मेबारी सौंपी है।

क्या कहते हैं असंतुष्ट भाजपा नेता
पार्टी ने टिकट नहीं दिया इस बात का दु:ख है। मैं जामा से विधानसभा का टिकट चाहता था लेकिन मुझे पार्टी ने अयोज्ञ घोषित कर दिया। मैं कई वर्षों तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् का पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता रहा हूं। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी में कई वर्षों से सक्रिय हूं। हालांकि पार्टी ने मुझे मान-सम्मान तो दिया लेकिन टिकट नहीं दिया। लगता है मुझ में ही कोई कमी रही होगी, इसलिए पार्टी मुझे योग्य नहीं समझी। अब पार्टी ने जिसे टिकट दिया है मैं तो उसी का समर्थन करूंगा। मुझे अपना काम करना है। मैं अपना दायित्व निभाउंगा। पार्टी का निर्णय सिरोधार्य लेकिन मन तो तकलीफ तो है ही। अभी तक पार्टी की ओर से किसी बड़े नेता ने संपर्क नहीं किया है। संपर्क करेंगे तो फिर बात होगी। फिलहाल अपने व्यक्तिगत काम में व्यस्त हूं। पार्टी जहां लगाएगी वहां लगूंगा।
– एडवर्ड सोरेन, भाजपा जनजाति मोर्चा, राष्टÑीय प्रशिक्षण प्रमुख, रांची।

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