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एयर इंडिया का परिचालन खर्च 1,500 करोड़ कम हुआ : पुरी

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नयी दिल्ली : सरकारी विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने पिछले एक साल में खर्च में कटौती के कई उपाय किये हैं जिससे उसकी परिचालन लागत 1,500 करोड़ रुपये कम हुई है। नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप ंिसह पुरी ने सरकारी समाचार चैनल डीडी न्यूज पर शुक्रवार रात एक साक्षात्कार में यह जानकारी दी। सरकारी एयरलाइन के निजीकरण पर पूछे गये एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा एयर इंडिया के परिचालन की लगात एक साल में करीब 1,500 करोड़ रुपये कम हो गई है। मार्गों और वेतन ढांचों को तर्कसंगत बनाकर लागत कम किया गया है।उन्होंने कहा कि एयर इंडिया के पायलटों का वेतन निजी विमान सेवा कंपनियों के पायलटों से अधिक था इसलिए इसमें कटौती की गई है। उड़ानों और यात्रियों की संख्या में कमी से विमान सेवा कंपनियों पर दबाव है। विमान सेवा कंपनियों पर दबाव पहले भी था। कोविड के कारण दबाव बढ़ गया है। उड़ानें दो महीने पूरी तरह बंद रहीं। उड़ानें नहीं होने से खर्चा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता बल्कि रखरखाव और नियमित जांच करनी होती है।उन्होंने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में एयर इंडिया में 60 हजार लोग यात्रा करते थे, आज 10 हजार लोग यात्रा करते हैं। उन्होंने कहा कि निजी एयरलाइन जेट एयरवेज ने 2,700 कर्मचारियों को निकाला जबकि एयर इंडिया ने तो एक भी कर्मचारी को नहीं निकाला है। श्री पुरी ने कहा कि एयर इंडिया का निजीकरण सफल रहने के प्रति वह पूरी तरह आश्वस्त हैं। उन्होंने कहा इसके पहले भी एयर इंडिया के निजीकरण के प्रयास हुये हैं। इस बार हम अधूरे मन से कोशिश नहीं कर रहे हैं। इस बार गंभीर प्रयास कर रहे हैं क्योंकि हमारे पास और कोई विकल्प नहीं है। करदाताओं का पैसा एक एयरलाइन को चालू रखने के लिए लगाना संभव नहीं है, खासकर कोविड-19 जैसी महामारी के समय में जब वित्त मंत्रालय के समक्ष दूसरी प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें खरीददारों के सामने आने की पूरी उम्मीद है। एयर इंडिया एक मूल्यवान परिसंपत्ति है। इसके अलावा भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार है और अभी तेजी से बढ़ रहा है। जो भी एयर इंडिया को खरीदेगा वह भारतीय विमानन बाजार में भी प्रवेश करेगा।

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