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कर्रा व तोरपा के ग्रामीणों ने लगाए शौचालय निर्माण में अनियमितता के आरोप, जांच के आदेश

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गौतम चौधरी

रांची : झारखंड की तत्कालीन सरकार ने 2 अक्टूबर 2017 को ही खुले में शौच मुक्त बन जाने का ऐलान कर दिया था लेकिन इस मामले में प्रदेश की वास्तविकता एकदम भिन्न है। उस समय के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की थी कि प्रदेश खुले में शौच से मुक्त हो चुका है। इसके साथ ही तत्कालीन मुख्यमंत्री दास ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहर में 20,051 आवास बनाने और 45152 मकान निमार्णाधीन होने की भी विधिवत घोषणा की थी।

यही नहीं आवास योजना के लाभुकों को गृह प्रवेश भी कराया गया था लेकिन हाल में झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा जारी एक पत्र में तत्कालीन सरकार के मुखिया के सारे दावे को ध्वस्त कर दिया है।

रांची में दो अक्टूबर 2017 के मौके पर खुले में शौच मुक्त झारखंड बनाने के दावे के साथ खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) सफलता दिवस धूमधाम से मनाया गया था। उन दिनों के उस कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा था कि झारखंड देश का तीसरा खुले में शौच मुक्त राज्य बन गया है लेकिन तत्काल मुख्यमंत्री की पोल उस समय में भी मीडिया में आयी थी। अब जो बातें सामने आ रही है वह सरकार के दावे के एकदम अलग है।

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खूंटी जिले के ग्रामीणों ने मनरेगा उपायुक्त को दिया था आवेदन
दरअसल, 27 दिसंबर 2019 को खूंटी जिले के तोरपा एवं कर्रा प्रखंड के ग्रामीणों ने मनरेगा आयुक्त कार्यालय में एक आवेदन दिया था। उस आवेदन में 65 परिवारों के सदस्यों ने कहा है कि उनके साथ सरकारी कारिंदों ने धोखा किया है। मसलन उनलोंगों के लिए आवंटित 37 शौचालयों में से एक भी शौचालय पूर्ण नहीं किया गया है।

खुले में शौच मुक्त की सफलता उस समय भी संदिग्ध थी
खुले में शौच मुक्त की वास्तविकता उस समय भी उजागर हुई थी। मीडिया में आयी खबर के अनुसार रांची शहर से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर नामकुम प्रखंड में करीब 500 घरों वाले डोंगरी गांव में 400 घरों में शौचालय की सुविधा उस समय भी नहीं थी लेकिन सरकार ने दावा किया था कि प्रदेश खुले में शौच से मुक्त हो चुका है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि झारखंड के सुदूर गांवों की स्थिति और भी बुरी है। झारखंड में कागजों पर तो तेजी से शौचालय बनाने की बात की गयी है लेकिन हकीकत ये है कि सरकार के सहयोग से बनने वाले अधिकतर शौचालय आज भी पूरे नहीं किए जा सके हैं।

क्या है पूरा मामला
27 दिसंबर 2019 को कर्रा और तोरपा प्रखंड के ग्रामीणों ने मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी को एक आवेदन के द्वारा अवगत कराया कि उनके गांव में शिलापट लगाकर यह बताया गया है कि गांव के 65 परिवारों के लिए कुल 37 शौचालयों का निर्माण कराया गया है और वह काम पूरा हो चुका है लेकिन वास्तविकता कुछ और है। ग्रामीणों का आरोप यह भी है कि गांव में बोर्ड लगाकर खुले में शौच मुक्ति की घोषणा कर दी गयी है लेकिन अभी भी अधिकतर ग्रामीण खुले में शौच करने के लिए बाध्य हैं क्योंकि जो शौचालय सरकार के द्वारा बनवाए गए हैं वह शौच के लायक नहीं हैं। उन शौचालयों का उपयोग नहीं किया जा सकता है।

ग्रामीणों के आवेदन पर विभागीय कार्रवाई
ग्रामीणों के द्वारा दिए गए आवेदन के बाद विभाग में खलबली मच गयी है। आनन-फानन में ग्रामीण विकास विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी बैजनाथ राम ने खूंटी उपायुक्त को एक पत्र जारी कर दिया है। पत्र में साफ तौर पर लिखा गया है कि ग्रामीणों के आरोप की मुकम्मल जांच हो और ग्रामीणों के शौचालय को पूर्ण करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए।

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