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किसानों तक पहुंचे बिजली गिरने की चेतावनी

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र्मियों में जब पुरवैया हवा चलनी शुरू होती है तो सूखे खेत और झुलसे किसानों के लिए राहत भरा माहौल बनाती है। इसी के साथ आती है बंगाल की खाड़ी से उठने वाली ठंडी हवा जो उत्तर भारत में मॉनसून लाती है। अभी मॉनसून का पहला चरण चल रहा है। खेतों में धान के बिचड़े (पौध) तैयार हो गए हैं और निचले इलाकों में जहां पकनी जमा है, वहां रो΄ााई भी चल रही है। इसी बीच खेतों में काम करने वाले किसानों ΄ार आसमान से काल बनकर बिजली भी गिर रही है। बीते हफ्ते आकाशीय बिजली गिरने से बिहार और उत्तर प्रदेश में 100 से ज्यादा लोगों की जान गई। बिहार के आपदा प्रबंधन केंद्र ने शुक्रवार शाम तक वज्रपात (ठनका) से 96 की मौत की पुष्टि की है। यह संख्या और बड़ी हो सकती है, क्योंकि काफी संख्या में लोग झुलसे भी हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में इससे अब तक 24 लोगों की मौत हुई है। बिहार के गोपालगंज जिले में सबसे अधिक 13 लोगों की मौत हुई है। जिले के अकेले बरौली प्रखंड में चार लोगों की जानें गई हैं। ये चारों अपने खेतों में धान के बिचड़े (पौध) उखाड़ने गए थे, तभी इन पर बिजली गिरी। हालांकि घटना के तीसरे दिन से ही कुछ इलाकों में मृतकों के परिजनों को मुआवजे के रू΄ा में चार-चार लाख रुपये का चेक दिया जाने लगा है। विजयी΄ाुरी के गुमरिया गांव में जब मुखिया और वॉर्ड सदस्य मुआवजे का चेक देने आए, तो वहां का माहौल बड़ा गमगीन बन गया। 12 वर्ष की अफसाना खातून के पिता ने मुआवजे की राशि लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जब बेटी ही नहीं रही तो मुआवजा किसके लिए लेंगे। भारी वर्षा और बिजली गिरने की आशंका को लेकर पूरे राज्य में 72 घंटे का अलर्ट जारी किया गया है। अमेरिका में ΄ा्रति वर्ष बिजली गिरने से औसतन 27 लोगों की मौत होती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की एक रि΄ोर्ट के अनुसार वर्ष 2005 के बाद से हर साल अ΄ाने देश में आकाशीय बिजली की च΄ोट में आने से लगभग 2000 लोगों की जानें जाती हैं। ΄िाछले साल सिर्फ उत्तरी भारत में 1300 लोगों की मौत वज्र΄ाात से हुई थी। तब भी यू΄ाी और बिहार में डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों की मौतें हुई थीं। वैसे बिजली बारिश नहीं होने ΄ार भी गिरती है, ΄ार अ΄ा्रैल से जुलाई तक इसकी संभावना अधिक रहती है। आकाशीय बिजली दो तरह की होती है। एक, जिसे हम आसमान में बादलों के बीच कौंधते हुए देखते हैं। यह बहुत ही आकर्षक लगता है। इससे जान-माल का नुकसान नहीं होता है। लेकिन आसमान से जमीन ΄ार गिरने वाली बिजली बहुत तेज और शक्तिशाली होती है। इसमें सूर्य से चार गुना अधिक ता΄ा होता है। वह एक साथ आठ करोड़ मोमबत्ती जलाने जैसा ΄ा्रकाश बिखेरती है। सीधी आंख से इसे देख लें, तो आंखें खराब हो सकती हैं। इसलिए बरसात के दिनों में घरों से बाहर नहीं जाने की सलाह दी जाती है। फिर भी बिजली गिरने की घटना ऐसी नहीं है कि इसके नुकसान को न रोका जा सके। मौसम में होने वाले ΄ारिवर्तन और उससे आने वाली आ΄ादा के बारे में ΄ाता लगाया जा सकता है। भारत सरकार के ΄ाृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के दामिनी ऐ΄ा से बिजली गिरने से ΄ाहले ही जानकारी मिल जाती है। लेकिन हमारे सूचना तंत्र ठीक से विकसित ही नहीं हैं। ΄ाता लग भी जाता है, तो ग्रामीण इलाकों तक इसकी सूचना नहीं पहुंच पाती है। अमेरिका जैसे देशों में संचार सुविधाएं बेहतर हैं, इसलिए भारत की तुलना में आकाशीय बिजली गिरने से विकसित देशों में मौत की घटनाएं कम होती हैं। बिजली अक्सर खुली जगहों में, जहां घने पेड़ नहीं होते हैं, वहां गिरती है। साथ ही इसके धातु के सामानों, ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों पर और जलाशयों में गिरने की भी आशंका ज्यादा रहती है। शहरों में घर सटे-सटे रहते हैं, उनमें तड़ित चालक लगे रहते हैं, जिससे वहां बिजली गिरने की आशंका कम रहती है। हमारे देश में बरसात के दिनों में किसान ही सबसे अधिक घरों से बाहर रहते हैं जिसके चलते इन्हीं ΄ार बिजली कहर बनकर गिरती है।

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