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कुपोषण से मुक्ति के लिए झारखंड की महिलाओं ने कसी कमर, इस तरह कर रही है काम

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रांची : झारखंड के करीब साढ़े चार हजार सखी मंडल व ग्राम संगठन की बहनें पूरे राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों में टेक होम राशन वितरण कर रही है। झारखंड सरकार द्वारा संपोषित इस योजना के कारण प्रदेश कुपोषण के खिलाफ जंग में उत्तरोत्तर प्रभावशाली बनता जा रहा है।

महिलाओं का यह संगठन किस प्रकार करता है काम
पूरे राज्य के करीब 4616 सखी मंडल एवं ग्राम संगठनों से राज्य भर के 38472 आंगनबाड़ी केंद्रों को टैग किया गया है। सरकार की इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को एक अतिरिक्त आय भी हो रही है। इस योजना का दूसरा पक्ष यह है कि सही समय पर आंगनबाड़ी केंद्रो तक राशन भी उपलब्ध करा दिया जा रहा है, ताकि 6 से 36 माह के सामान्य बच्चे, गर्भवती, धात्री महिलाओं एवं अति कुपोषित बच्चों को इस राशन से समय रहते पोषित किया जा सके। सखी मंडल एवं गांव की महिलाएं ही आंगनबाड़ी की लाभुक है एवं सप्लाई का काम भी इन्ही के जिम्मे है जिससे गुणवत्ता एवं पारदर्शिता भी बरकरार रहती है। बता दें कि इस काम में लगी महिलाएं अपने गांव एवं आसपास के क्षेत्रों में ही राशन का वितरण कर रही है।

नवम्बर माह तक कितना हुआ था काम
अब तक पूरे राज्य में करीब 98 प्रतिशत आंगनबाड़ी को नवंबर माह के टेक होम राशन का सप्लाई किया जा चुका है। राज्य भर के कुल 38472 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 37000 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रो को टेक होम राशन का सप्लाई किया जा चुका है।

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टीएचआर में समुचित पोषण का रखा गया है ध्यान
टेक होम राशन के तहत 6 माह-3 वर्ष के बच्चों के लिए 1.25 किलो चावल, 2.5 किलो आलू, 0.75 किलो अरहर दाल, भुनी मूंगफली व गुड़ को मिलाकर प्रति माह कुल 6 किलो राशन की व्यवस्था की गई है. गर्भवती एवं धात्री माता के लिए 2.5 किलो चावल, 3.125 किलो आलू, 1 किलो भुनी मूंगफली, 0.75 किलो अरहर दाल एवं 0.625 किलो गुड़ मिलाकर कुल 8 किलो राशन का प्रावधान किया गया है. अति कुपोषित बच्चों के लिए हर महीने कुल 7.75 किलो राशन निर्धारित किया गया है।

सखी मंडल की महिलाओं को मिली बागडोर
इस महत्वाकांक्षी पहल के संचालन की जिम्मेदारी सखी मंडल की महिलाओं को दी गई है. राज्य भर में कुल 4616 ग्राम संगठनों से जुड़ी सखी मंडल की लगभग 25 हजार महिलाओं द्वारा राशन खरीदारी से लेकर पैकेजिंग को अंजाम दिया जा रहा है। ये महिलाएं राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों तक बखूबी टेक होम राशन सप्लाई का कार्य कर रही है, साथ ही वितरण में भी सहयोग कर रही है। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहरी क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केन्द्रों में भी सखी मंडल की महिलाएं राशन आपूर्ति कर रही हैं.

बेहतर गुणवत्ता के साथ-साथ अतिरिक्त आय
इस पहल के कई सारे फायदों में से एक है गुणवता की गारंटी। चूँकि पैकेजिंग और आपूर्ति की जिम्मेदारी सखी मंडल की महिलाओं को दी गई है और ज्यादातर लाभुक परिवार भी सखी मंडल से जुड़े हैं, इसलिए राशन की गुणवत्ता खुद ब खुद सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही, लाभुकों को निर्धारित वजन के हिसाब से पूरा राशन भी मिल रहा है। सबसे बढ़कर, निजी कंपनियों की जगह पैकेजिंग और आपूर्ति की जिम्मेदारी मिलने से सखी मंडल की लगभग 50,000 महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है और इससे होने वाले मुनाफे से उन्हें अतिरिक्त आय होगी। नवंबर माह के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य स्तर पर लगभग 90 फीसदी आंगनबाड़ी केन्द्र आच्छादित किए जा चुके हैं। पहली बार इतने बड़े स्तर पर राशन पैकेजिंग व आपूर्ति का काम कर रहीं इन ग्रामीण महिलाओं की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। कुपोषण के खिलाफ निर्णायक लड़ाई को लेकर राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई इस अनूठी पहल से जहाँ एक ओर सखी मंडल की महिलाओं को आजीविका का एक नया अवसर मिला है, वहीं जमीनी स्तर पर पोषाहार पैकेजिंग से लेकर वितरण में पारदर्शिता आई है। यह कहना गलत न होगा कि टेक होम राशन से स्वस्थ व समृद्ध झारखण्ड का सपना साकार करने में काफी मदद मिलेगी।

टेक होम राशन से खुश हैं लाभुक
लाभुकों में से सिमडेगा के कोलेबिरा प्रखण्ड के टेंसेरा गांवकी चंपा देवी बताती है कि मेरे कुपोषित बच्चे को कभी भी राशन नहीं मिला था। नम आखों से चंपा बताती है कि मुझे भी गर्भवती का राशन मिला है। सखी मंडल की बहनों को धन्यवाद देती हुई चंपा कहती है कि पहली बार इतना अच्छा राशन हमें मिला है, मुझे उम्मीद है कि मैं अपने घर से कुचोषण को खत्म कर पाउंगी और मेरा बच्चा तंदरुस्त हो पाएगा। मैं कामना करती हूं की बस लगातार मुझे ये राशन मिलता रहे।

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