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केंचुआ खाद से तैयार उपज प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक

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कानपुर,15 जून (सन्मार्ग) कृषि वैज्ञानिकों का दावा है कि केंचुये की खाद से तैयार फल और सब्जियां मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हैं।

आमतौर पर कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग कोविड-19 की चपेट में आ रहे हैं और उनकी मृत्यु तक हो रही है जिसको लेकर जिला प्रशासन से लेकर प्रदेश सरकारें तक लोगों को प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की सलाह दे रही हैं।

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इस बीच चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने किसानों से अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा केंचुए की खाद का इस्तेमाल खेती बाड़ी में करे क्योंकि इस खाद से उत्पन्न होने वाले सभी प्रकार फल, सब्जियां इत्यादि कहीं ज्यादा मजबूत और शुद्ध होती है। इसके खानपान से मानव की शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है जिसका इस्तेमाल करने से वातावरण भी शुद्ध रहता है।

विवि में मृदा वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने यूनीसन्मार्ग से कहा “ केंचुआ खाद में कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, लोहा, जस्ता, कॉपर आदि सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं। जिससे द्वारा तैयार फल सब्जी मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ानेेे का भी काम करती है। इसके अलावा पौधों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले पादप वृद्धि हार्मोन मृदा के भौतिक, रासायनिक, जैविक गुणों में सुधार करता है तथा मृदा में जल संरक्षक की भूमिका अदा करते हैं। प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ ही वृहद स्तर पर युवाओं को रोजगार का साधन बन सकता है।

डॉ खान ने बताया कि टिकाऊ खेती का सर्वाधिक प्राकृतिक एवं सबसे अच्छा विकल्प है। उन्होने बताया कि केंचुआ खाद बनाने के लिए किसी भी जगह पर छाया एवं ऊंचे स्थान का चुनाव करना चाहिए। इस जगह पर पांच मीटर लंबाई में तथा एक मीटर चौड़ाई और आधा मीटर ऊंचाई में पक्की ईंटों का ढांचा बनाते हैं। इस ढांचे में 8 से 10 दिन पुराना गोबर डालते हैं। इस गोबर में दो से ढाई किलोग्राम केंचुआ डाला जाता है।

उन्होंने बताया कि आईसीनिया फोईटिडा नामक केंचुए की प्रजाति होती है जो सड़े गले पदार्थों एवं गोबर को खाना पसंद करता है। केंचुआ को तपती धूप, वर्षा आदि से सुरक्षा के लिए वर्मी बेड के ऊपर छप्पर डालकर छाया करनी चाहिए। वर्मी बेड का 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखना चाहिए जिससे केंचुआ को कोई नुकसान ना हो। खाद 60 से 70 दिन में बनकर तैयार हो जाती है ।

वैज्ञानिक ने बताया कि खाद की मात्रा एवं प्रयोग विधि के बारे में बताया कि खाद्यान्न फसलों के लिए पांच टन खाद प्रति हेक्टेयर प्रयोग की जाती है जबकि फलदार पौधों में एक से 10 किलोग्राम पौधों की उम्र के हिसाब से खाद डालते हैं तथा गमलों में केंचुआ खाद 100 ग्राम प्रति गमला डालते है। उन्होंने केंचुआ खाद में पोषक तत्वों के बारे में बताया कि 3.5 से 3.7 फीसदी जीवांश कार्बन, 1.5 से 2.5 प्रतिशत नाइट्रोजन, 1-1.5 प्रतिशत फास्फोरस एवं 0.5 से एक फीसदी पोटाश पाया जाता है।

सं प्रदीप

सन्मार्ग

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