Sanmarg Live
Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, : Sanmarg Live, Morning India, Aawami News

कोरोना का प्रकोप वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय : डॉ चौहान

14

रांची : पशुधन का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान है और वर्तमान में देश पशुधन आधारित उद्योगों में तेजी से विकास कर रहा है। चीन में कोरोना वायरस का हालिया प्रकोप और इसे तीन सप्ताह की अवधि में वैश्विक आपातकाल का रूप ले लेना हमें यह एहसास करता है कि हम किस स्थिति में जी रहे हैं। आज पूरा विश्व एक वैश्विक गांव है, जहां कोई भी डर चिंता का विषय हो सकता है। उक्त बातें प्रसिद्ध पशु रोग विशेषज्ञ डॉ एचभीएस चौहान ने कृषि प्रणाली एवं वन्य जीवन में पशुधन और मुर्गीपालन के उभरते एवं पुन: उभरते रोग के लिए हाल में प्रगति विषयक दो दिवसीय कार्यशाला के समापन पर कही।

चौहान ने कहा कि पिछले दो दशकों में हमने कई अव्यवस्थाओं के उदय को देखा है। एफएमडी, इन्फ्लूएंजा, अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा के दोहराये जाने वाले संक्रमण रोग, मध्य पूर्व श्वसन सिंड्रोम, पशु आबादी के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि कई भारतीय चीन में फंसे थे। भारत सरकार के त्वरित प्रयास एवं सावधानी की वजह से देश में कोरोना वायरस नहीं पनप पाया। लोगों को चाहिए की पूर्ण रूप से प्रमाणित चीनी खाद्य का ही प्रयोग करें। डॉ चौहान ने चेतावनी भरे में कहा कि ऐसे खाद्य पदार्थ एवं खासकर पशु उत्पाद का व्यवहार 70 डिग्री तापमान तक उबालकर ही करें।

डॉ चौहान ने बताया कि पशुधन की सेवा राष्ट्रीय सेवा के समान है। 85 वर्ष के उम्र में वे सूरत में पशु सेवा ट्रस्ट से जुड़े हैं। ट्रस्ट के प्रयासों से इलाके में पशु मृत्य दर 0.5 फीसदी तक पहुंच गयी है। मौके पर डॉ चौहान ने डॉ पूर्णिमा गुमास्ता, डॉ राकेश कुमार एवं डॉ ब्रजेश कुमार को युवा वैज्ञानिक अवार्ड, डॉ जूही चौहान, डॉ एमए पटेल, विशाखा सिंह एवं ललिता मोदी को उत्कृष्ट लेडी वेटरनरी डॉक्टर अवार्ड तथा डॉ पीपी लकड़ा, डॉ कौशल कुमार, डॉ पी धूमल एवं कुमारी प्रशंसा सिन्हा को उत्कृष्ट पोस्टर अवार्ड प्रदान किया। मौके पर पशुओं में विभिन्न रोगों एवं निदान पर उत्कृष्ट शोध कार्य हेतु पशु रोग वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया गया।

- Sponsored -

- sponsored -

सोसाइटी के राष्ट्रीय सचिव डॉ आरसी घोष ने बताया कि संगोष्ठी के दौरान पशु रोगविज्ञानी वैज्ञानिकों द्वारा वितरित कुल मिलाकर 20 लीड पेपर, 108 मौखिक प्रस्तुति और 25 पोस्टर की प्रस्तुति की गयी। संगोष्ठी में नवीन वैज्ञानिक विचारों का आदान-प्रदान और पशुधन, पोल्ट्री और वन्यजीव रोगों के निदान, रोकथाम और नियंत्रण के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं पर मंथन किया गया।

आयोजन सचिव डॉ एमके गुप्ता ने बताया कि संगोष्ठी में अत्याधुनिक डॉग्नोस्टिक आर्ट लैब को स्थापित करने सिफारिश की गयी है। अंतर विभागीय दृष्टिकोण से पशुओं के डॉयग्नोसिस सेंटर की स्थापना तथा पशुचिकित्सा महाविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग में एडवांस डिजीज डॉयग्नोस्टिक लैब तथा स्थापित किया जाना चाहिए। राज्य स्तर पर इमरजेंसी और फिर से उभरने वाली बीमारी की निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया गया। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह कार्यशाला का आयोजन पशुचिकित्सा रोग विज्ञानी सोसाइटी, रांची चैप्टर और पशु चिकित्सा पैथोलॉजी विभाग, पशु चिकित्सा विज्ञान और पशुपालन महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में नाचेप-कास्ट (आईसीएआर) परियोजना के सहयोग से किया गया। कार्यशाला में देश भर के करीब 150 पशुरोग विशेषज्ञ /वैज्ञानिक तथा राज्य के सभी 24 जिलों के पशुरोग चिकित्सकों ने भाग लिया। मौके पर डॉ नरेश सूद, डॉ एसके मुखोपाध्याय, डॉ अरुण प्रसाद, डॉ स्वाती सहाय, डॉ रवींद्र कुमार, डॉ राजू प्रसाद एवं महाविद्यालय के विद्यार्थी मौजूद थे।

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored

- Sponsored -

%d bloggers like this: