सन्मार्ग लाइव
सनसनी नहीं, सटीक खबर

कोरोना की कविता – राजेश श्रीवास्तव

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जिंदा रहे तो फिर से आयेंगे बाबू
तुम्हारे शहरों को आबाद करने ।

वहीं मिलेंगे गगन चुंबी इमारतों के नीचे
प्लास्टिक के तिरपाल से ढकी झुग्गियों में ।

चौराहों पर अपने औजारों के साथ
फैक्ट्रियों से निकलते काले धुंए जैसे होटलों और ढाबों पर खाना बनाते ।

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बर्तनो को धोते
हर गली हर नुक्कड़ पर फेरियों मे
रिक्शा खींचते।

आटो चलाते रिक्शा चलाते पसीने में तर बतर होकर तुम्हे तुम्हारी मंजिलों तक पहुंचाते ।

हर कहीं फिर हम मिल जायेंगे तुम्हे
पानी पिलाते ,गन्ना पेरते ।

कपड़े धोते , प्रेस करते , सेठ से किराए पर ली हुई रेहड़ी पर समोसा बनाते या फूचका बेचते ।

ईंट भट्ठों पर ,
तेजाब से धोते जेवरात को ,
पालिश करते स्टील के बर्तनों को।

सूरत के कपड़ा मिल से लेकर
असम के चाय बागानों तक ।

पंजाब के हरे भरे लहलहाते खेतों से लेकर बैंगलोर के प्लांटो तक।

मुर्शिदाबाद के मलमल कारखाने से लेकर बंबई के जहाजरानी तक ,

अनाज मंडियों मे माल ढोते
हर जगह होंगे हम

बस सिर्फ एक मेहरबानी कर दो बाबू हम पर , इस बार हमें अपने घर पहुंचा दो ।

घर पर बूढी अम्मा है बाप है जवान बहिन है ।
सुनकर खबर महामारी की, वो बहुत परेशान हैं
बाट जोह रहे हैं सब मिल कर हमारी , चाचा,चाची,बाबा और माई।

मत रोको हमे अब बस जाने दो विश्वास जो हमारा तुम शहर वालों से टूट चुका उसे वापिस लाने मे थोड़ा हमे समय दो ।

हम भी इन्सान हैं तुम्हारी तरह , वो बात अलग है हमारे तन पर पसीने की गन्ध के फटे पुराने कपडे हैं, तुमहारे जैसे चमकदार और उजले कपडे नही।

बाबू चिन्ता ना करो , विश्वास अगर जमा पाए तो फिर आयेंगे लौट कर ।

जिंदा रहे तो फिर आएँगे लौट कर ।

जिन्दा रहे तो फिर आएँगे लौट कर ।

वैसे अब जीने के उम्मीद तो कम है अगर मर भी गए तो हमें इतना तो हक दे दो ।

हमें अपने इलाके की ही मिट्टी मे समा जाने दो ।

आपने जो कुछ भी खाने दिया उसका दिल से शुक्रिया ।

बना बना कर फूड पैकेट हमारी झोली में डाले उसका शुक्रिया।

आप भी आखिर कब तक हमको खिलाओगे ।

वक्त ने अगर ला दिया आपको भी हमारे बराबर फिर हमको कैसे जिलाओगे ।

तो क्यों नही जाने देते हो हमें हमारे गांव और घर ,

तुम्हे मुबारक हो यह चकाचौंध भरा तुम्हारा शहर ।

हमको तो अपनी जान से प्यारा है भोला भाला गाँव हमार।।

_प्रवासी मजदूरों के दिल की आवाज शहरों मे रहने वालों को समर्पित ।_ राजेश श्रीवास्तव,रांची

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