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गुजराती सावन के पहले सोमवार पर आज भगवान शिव की पूजा-अर्चना

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अहमदाबाद, 27 जुलाई (सन्मार्ग लाइव) गुजराती सावन महीने के पहले सोमवार पर आज शिव भक्तों ने अपने-अपने घरों में भगवान शिव की पूजा-अर्चना भक्ति भाव के साथ की।

राज्य के कच्छ, राजकोट, जामनगर, अहमदाबाद, महेसाणा, पाटन, वडोदरा, सूरत समेत सभी स्थानों पर भोले शंकर के भक्तों ने अपने आराध्य देव की पूजा-अर्चना में आज कोई कमी नहीं आने दी। सावन के पहले सोमवार पर शिवभक्तों ने अपने-अपने घर पर रहकर भगवान का दूध, दही, गंगाजल से अभिषेक किया और सुख-समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थनाएं करते नजर आए।

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कई जगहों पर श्रावणी मेले के इस बार कोरोना वायरस संक्रमण का प्रसार रोकने के उद्देश्य से आयोजन नहीं किए गए जिससे लाखों श्रद्धालुओं में निराशा दिखी। मंदिरों में ‘हर-हर महादेव, बम बम बोले बोल बम’ के जयघोष के बजाय सन्नाटा पसरा रहा। मंदिरों के बाहर सेनेटाइजर की व्यवस्था के साथ सोशल डिस्टेशिंग का पालन करने के लिए दो गज की दूरी और मास्क आवश्यक किया गया। पुजारियों ने जनहित में शिव भक्तों से दूरी बनाए रखी। शिवालयों में इस बार शिवभक्तों की पहले जैसी भीड़ नहीं थी। कुछ मंदिरों में श्रद्धालु सुबह से ही अपने आराध्य के दर्शन करने पहुंचे। लेकिन भगवान के दूर से ही दर्शन कर वापस आना पड़ा।

गिर सोमनाथ जिले के प्रभास पाटन में समुद्र के किनारे स्थित सोमनाथ मंदिर में इस अवसर पर भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंगों में से इस प्रथम शिविलंग का मनोहारी नवधान्य का शृंगार किया गया। हर साल आज के दिन हजारों लोग महाआरती तथा सोमेश्वर महादेव के अभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं पर कोरोना महामारी के चलते लोगों की भीड़ आज देखने को नहीं मिली।

अहमदाबाद में भी कुछ शिवालयों में भक्तों ने जलाभिषेक और पूजन किया। मोटेरा के कोटेश्वर महादेव, नाराणपुरा के कामेश्वर महादेव मंदिर तथा घाटलोडिया के नीलकंठ मंदिर समेत अन्य मंदिरों में भक्तों की भीड़ नहीं दिखी। राज्यभर में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने की कोशिश के तहत एक जगह पर चार से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी लगायी हुयी है। इसलिए शिवालयों में रात को जागरण, भजन, कीर्तन के विशेष आयोजन नहीं किये गए हैं।

उल्लेखनीय है कि गुजरात में सावन की शुरुआत 21 जुलाई से हुयी है और आज सावन का पहला सोमवार है। देश के उत्तर भारत तथा दूसरे भागों में पूर्णिमा से महिने की तिथियों की गणना होती है। जबकि देश के पश्चिम भागों में अमावस से महिने की तिथियों की गणना होती है। इसलिए गुजरात के पंचांग में उत्तर भारत के पंचांग से 15 दिनों का अंतर रहता है।

अनिल.श्रवण

सन्मार्ग

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