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ग्रामीण विकास की प्रयोग भूमि बन रहा है झारखंड, अब ग्रामीण क्षेत्रों को आदर्श बनोगी गुरु मां

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गौतम चौधरी
रांची : महिला दिवस के ठीक दो दिनों के बाद झारखंड सरकार का ग्रामीण विकास विभाग, गांव को स्वावलंबी बनाने और महिलाओं के बीच नेतृत्व क्षमता विकासित करने के लिए राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (सर्ड) में उन 40 महिलाओं का प्रशिक्षण प्रारंभ किया, जिनके जिम्मे ग्रामीण क्षेत्रों को आदर्श बनाना है। दरअसल, आरा-केरम की उन्नति को देख सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने इसी तर्ज पर राज्य के सभी गांवों को विकसित करने की योजना बनायी है। सरकार के इस स्वप्न को साकार करने की जिम्मेवारी दीनदयाल ग्राम स्वावलंबन योजना ने उठायी है। फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसकी शुरुआत खूंटी से की गयी है। इसकी सफलता को देख सरकार इस योजना को पूरे राज्य में लागू करेगी।

क्या है दीनदयाल ग्राम स्वावलंबन योजना
ग्रामीणों को जागरूक करना, ग्रामसभा को प्रभावी बनाना, ग्रामसभा के माध्यम से ग्रामीणों में वैचारिक जागृति व सामाजिक सरोकार का भाव विकसित करना इसका उद्देश्य है। श्रमदान के जरिये गांव का विकास, नशामुक्ति, झगड़ामुक्त, प्लास्टिक मुक्त, बाल विवाह, कुपोषणमुक्त, बाल श्रम तथा दहेज प्रथा मुक्त गांव की परिकल्पना के अलावा जनसंख्या नियंत्रण, डायन प्रथा उन्मूलन पर भी इस योजना का फोकस होगा। मसलन दीन दयाल ग्राम स्वावलंबन योजना, गांव को आदर्श व स्वावलंबी बनाने वाली योजना है। इस कार्य में लोकप्रेरक दीदियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सर्ड में इन्हीं महिलाओं का प्रशिक्षण चल रहा है। इन महिलाओं को गुरु मां की संज्ञा दी गयी है।

ग्राम विकास में गुरु मां की भूमिका
लोकप्रेरक दीदियों यानी गुरु मां के जिम्मे फिलहाल दो-दो गांव हैं। इन गुरु मां का काम साप्ताहिक ग्रामसभा में भाग लेने व ग्रामीण जीवन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विषयों पर सामूहिक विचार-विमर्श करने के लिए प्रेरित करना है। ग्रामसभा की नियमित साप्ताहिक बैठक, ग्रामीणों द्वारा अपने-अपने गांव की नियमित साफ-सफाई, श्रमदान, नशामुक्ति, झगड़ामुक्त, प्लास्टिक मुक्त, बाल विवाह, बाल श्रम, जनसंख्या नियंत्रण, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, अंधविश्वास, दहेज प्रथा आदि का उन्मूलन है। इसके साथ ही साथ रोजगार के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में लागू कराना है। लोकप्रेरक गुरु मां यानी दीदियों को प्रति कार्य दिवस के लिए पांच सौ रुपये दिये जा रहे हैं। इस तरह से हर महीने उन्हें करीब 15 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।

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आरा व केरम का ग्राम विकास मॉडल
राजधानी रांची से महज 32 किलोमीटर दूर ओरमांझी प्रखंड की टुंडाहुली पंचायत के दो गांव आरा और केरम हैं। यहां की आबादी लगभग 600 है। इस गांव में प्रवेश करते ही आपको एक साइनबोर्ड दिखेगा। इस पर अंकित है, मुस्कुराइये कि आप झारखंड के नशामुक्त गांव आरा-केरम में हैं। यहां झगड़ों का निपटारा गांव में ही किया जाता है। जब मामले नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं, तभी लोग कोर्ट पहुंचते हैं। गांव के विकास के सारे फैसले गांव वालों की मौजूदगी में ग्रामसभा ही लेती है। पर्व-त्योहार में तो लोग 15-15 दिन तक नशे में डूबे रहते थे।

ग्रामीणों में गरीबीमुक्त गांव की भाव जगाना जरूरी : सिद्धार्थ त्रिपाठी
इस योजना के बारे में मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी ने बताया कि हर गांव की अपनी ताकत है। अगर हर गांव को आदर्श देखना है, तो ग्रामीणों को आदर्श बनाना जरूरी होगा। आदर्श गांव या गरीबीमुक्त गांव तब तक नहीं बनेगा, जब तक ग्रामीणों के दिमाग से गरीबीमुक्त होने की भावना न जागृत हो। इस योजना के तहत हमलोग ग्रामीण संसाधन के आधार पर ही गांव को विकसित कर रहे हैं। लोग भी गांव के ही होते हैं। हम बाहर से सिर्फ एक प्रशिक्षित महिला को गांव में लगा रहे हैं। महिला इसलिए कि वह महिलाओं को अपने साथ जोड़े और गांव के विकास में महिलाओं की भूमिका सुनिश्चित करे।

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