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छठ पर इस बार बोकारो में दुगुना उत्साह, घर पर भी और घाट पर भी रही बनी रही रौनक

महामारी पर भारी आस्था हमारी... उदयाचल सूर्य को अर्घ्य के साथ चारदिवसीय महाव्रत संपन्न

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संवाददाता
बोकारो : ईश्वर के प्रति अगाध आस्था और समर्पण का महापर्व छठ अपने चिर-परिचित उत्साह और उमंग के साथ संपन्न हो गया। कोरोना महामारी ने गत वर्षों जी तुलना में इस बार जरा घाटों की भीड़भाड़ में तो कमी जरूर ला दी, लेकिन उत्साह में कोई अंतर नहीं हुआ। बल्कि, इस बार घर का भी और घाट का भी दोगुना उत्साह सामने आया। एक तरफ जहां छठघाटों पर भारी तादाद में श्रद्धालु पहुंचे, वहीं घर के आंगन या आसपास हुई पूजा के दौरान आस पड़ोस के लोगों का जुटान हुआ। बता दें कि सरकार की ओर से पूर्व में जारी गाइडलाइन के बाद अधिकतर लोगों ने अपने घर के आंगन या आसपास ही वैकल्पिक जलाशय का उपाय लगा लिया था। शहर के सेक्टर- 3बी, 2सी, चास के तारानगर, बाबानगर समेत विभिन्न जगहों पर घरों के आसपास ही कहीं बड़े गड्ढे खोदकर उसमें स्वच्छता के लिए प्लास्टिक डाल पानी भरे गए तो कहीं बड़े आकार के टब में व्रती अर्घ्य देते देखे गए। वहीं, कई लोगों ने अपने घर की छत पर ही सीमेंट से पौंड बनाकर पूजा की। बोकारो विधायक बिरंची नारायण ने सपत्नीक अपने आवास में मंगवाए गए पौंडनुमा पड़े टब में ही पूजा संपन्न की। दूसरी तरफ, चास गरगा पुल, टू टैंक गार्डेन, सिटी पार्क, जगन्नाथ मंदिर सरोवर, सूर्य सरोवर, चास में सोलागीडीह तालाब, इजरी नदी तट सहित तमाम छठ घाटों पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ पहले से थोड़ी कम, लेकिन उमड़ी जरूर। इस बार मेले जैसा नजारा नहीं रहा, परंतु महापर्व की रौनक में कोई कमी नहीं दिखी। बोकारो स्टील सिटी में बीएसएल प्रबन्धन और चास में नगर निगम की ओर से छठव्रतियों की सुविधा को लेकर पुख्ता इंतजाम किये गए थे।
चारदिवसीय इस महापर्व के अंतिम दिन शनिवार को अहले सुबह तीन-चार बजे से ही छठघाटों पर व्रतियों और श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया। अधिकतर श्रद्धालु चेहरे पर मास्क लगाए और माथे पर दउरा लेकर लेकर पहुंचे, तो कोई लचकती ईंख लेकर पहुंचा। सूर्योदय से लगभग एक घण्टा पहले ही छठव्रती जल में नतमस्तक हो खड़े हो गए। ठिठुरते पानी में काफी देर खड़े होने में बाद जैसे ही आदिदेव सूर्य की लालिमा की झलक दिखने लगी, व्रतियों ने उन्हें सूप और फल की टोकरियों वाले अर्घ्य अर्पित करना शुरू कर दिया। उनके साथ-साथ लाखों लोगों ने भी भगवान भास्कर को दूध एवं जल का अर्घ्य अर्पित किया। इसके पूर्व शुक्रवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को आस्थायुक्त लाखों हाथों ने अर्घ्य अर्पित किया। इस महाव्रत का शुभारंभ नहाय-खाय से होने के साथ ही छठ का उत्साह अपने परवान पर चढ़ गया। इसके बाद व्रतियों ने खरना पूजा संपन्न की और क्रमश: अर्घ्यदान के साथ इस महापर्व का विधिवत समापन हुआ और लोग प्रसाद ग्रहण कर घाट से अपने घर जो रवाना हुए।

मुस्तैद रहा प्रशासन, ड्रोन से होती रही निगहबानी
छठ को ले प्रशासन जनसुरक्षा, विधि-व्यवस्था संधारण और खास तौर से कोविड-19 गाइडलाइन का अनुपालन कराने में मुस्तैद रहा। शहर से लेकर गांवों तक पुलिस की चहलकदमी, सायरन के साथ गश्ती होती रही। वहीं, छठघाटों के आसपास मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस तैनात रही। ड्रोन कैमरों से भी निगहबानी होती रही। इसी प्रकार, कहीं कोई अप्रिय घटना न हो, इसके लिए एंबुलेंस, अग्निशमन दस्ता आदि से लेकर हर तरह के एहतियातन उपाय किए गए थे। दूसरी तरफ, शहर में चारों तरफ का वातावरण छठ गीतों से गुंजरित होता रहा। शारदा सिन्हा, कल्पना पटवारी अन्य गायक-गायिकाओं के छठ गीतों ने माहौल को और आध्यात्मिक बना दिया। कुल मिलाकर आस्था का यह महापर्व बोकारो में सोल्लास और धूमधाम से संपन्न हो गया। सभी श्रद्धालुओं ने दिनकर दीनानाथ से कोरोना महामारी से निजात दिलाने की प्रार्थना की।

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