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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेशों में सार्वभौमिक व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं

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डॉ. जेएस ठाकुर एमडी
जम्मू-कश्मीर राज्य में स्‍वास्‍थ्‍य सेवा व्‍यवस्‍था पर मेवाड़ विश्वविद्यालय, चित्तौड़गढ़ राजस्थान के काजी आमिर जान और कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर (डॉ) इश्तियाक हुसैन कुरैशी का अध्ययन अप्रैल 2019 में इंटरनेशनल जर्नल आॅफ साइंटिफिक रिसर्च एंड रिव्‍यू में प्रकाशित हुआ था। अपने अध्‍ययन में उन्‍होंने कहा था, हमें जम्मू-कश्मीर राज्य के सभी हिस्सों में बेहतरीन स्वास्थ्य सेवा व्‍यवस्‍था को तुरंत लागू करना चाहिए। इसके कुछ क्षेत्र तमाम बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रहा है। समानता एवं निष्‍पक्षता के सिद्धांतों पर आधारित इस स्वास्थ्य सेवा व्‍यवस्‍था को व्यापक, प्रभावी, सुलभ, सस्ती बनाने के लिए इसमें कुछ बुनियादी बदलाव करने की आवश्यकता है। आयुष्मान भारत-स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्‍ती केंद्र (एबी-एचडब्‍ल्‍यूसी) का मुख्‍य उद्देश्‍य व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्‍ध कराते हुए रोगियों की तंदुरुस्‍ती में सुधार लाना और उनकी परेशानियों को कम करना है। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा हमारी स्वास्थ्य सेवा व्‍यवस्‍था के न केवल पहले प्रवेश मार्ग का प्रतिनिधित्व करती है बल्कि इसे परिवार एवं समुदाय आधारित देखभाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सुधार के लिहाज से भी तैयार किया गया है। जम्मू-कश्मीर में इन केंद्रों की बढ़ती संख्या नागरिक केंद्रित प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के नए युग का सूत्रपात कर रही है। नीचे दिए गए ग्राफ से स्‍पष्‍ट तौर पर पता चलता है कि पिछले एक वर्ष के दौरान राज्‍य में किस रफ्तार के साथ एचडब्‍यूसी की स्थापना हुई है। पिछले एक वर्ष के दौरान राज्य में एचडब्ल्यूसी की रफ्तार दोगुनी हो गई जिससे इसकी कुल संख्‍या बढ़कर 717 हो चुकी है। जुलाई 2019 से जुलाई 2020 के बीच राज्‍य में कुल 478 (310 एसएचसी, 157 पीएचसी और 11 यूपीएचसी) अतिरिक्त स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्‍ती केंद्र स्थापित किए गए। इन स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्‍ती केंद्रों पर रोगियों को दवा एवं निदान सहित सभी सेवाएं मुफ्त प्रदान की जा रही हैं। यदि यही रफ्तार बरकरार रही तो राज्‍य में दिसंबर 2022 तक 2,722 एचडब्‍ल्‍यूसी के संचालन का लक्ष्‍य आसानी से हासिल हो जाएगा।
महीना/वर्ष एसएचसी पीएचसी यूपीएचसी कुल
जुलाई, 2019 115 120 4 239
जुलाई, 2020 425 277 15 717
एक वर्ष में प्रगति 310 157 11 478
स्रोत: एचडब्‍ल्‍यूसी पोर्टल
एचडब्‍ल्‍यूसी स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के पुनर्गठन में उल्‍लेखनीय बदलाव को दर्शाता है। इसके तहत स्‍वास्‍थ्‍य एवं तंदुरुस्‍ती उपकेंद्रों पर मध्‍यम स्‍तर के स्‍वास्‍थ्‍य सेवा प्रदाता के तौर पर सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी की नियुक्ति की जाती है। हमारी सरकारी स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था के तहत दूरदराज के क्षेत्रों तक व्‍यापक स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं उपलब्‍ध कराने में सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले एक वर्ष के दौरान स्‍वास्‍थ्‍य एवं तंदुरुस्‍ती केंद्रों पर लोगों की आवाजाही में उल्‍लेखनीय वृद्धि हुई है। मार्च से जुलाई 2019 के बीच स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी देखभाल के लिए हर महीने औसतन 8,800 लोग एचडब्ल्यूसी पहुंच रहे थे जबकि अगस्त 2019 से 23 जुलाई 2020 के बीच यह संख्या बढ़कर 1,00,000 हो गई। स्वास्‍थ्‍य एवं तंदुरुस्‍ती केंद्रों पर लगभग 5.52 लाख रोगी मुफ्त एवं आवश्यक दवाएं प्राप्त कर चुके हैं जबकि 2.6 लाख रोगियों ने मुफ्त एवं आवश्यक नैदानिक सेवाओं का लाभ उठाया है। राज्य ने बेहतर तंदुरुस्‍ती पर भी ध्यान केंद्रित किया है और इसी क्रम में एचडब्‍ल्‍यूसी पर लगभग 18,000 तंदुरुस्‍ती सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान राज्य में उच्च रक्तचाप के लिए 1.78 लाख, मधुमेह के लिए 1.65 लाख, मुख कैंसर के लिए 1.32 लाख, स्तन कैंसर के लिए 0.56 लाख और गर्भाशय कैंसर के लिए 0.13 लाख लोगों की जांच की गई है। एचडब्ल्यूसी के माध्यम से व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्‍ध कराने का एक मुख्‍य उद्देश्‍य प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने में भौगोलिक एवं सामाजिक सांस्‍कृतिक बाधाओं को दूर करना है, विशेष तौर पर महिलाओं के लिए। एचडब्‍ल्‍यूसी ने दशार्या है कि जब लोगों के घरों तक स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं पहुंचाई जाती हैं तो आधे से अधिक मरीज महिलाएं होती हैं। राज्‍य के आंकड़ों से पता चलता है कि इन स्‍वास्‍थ्‍य एवं तंदुरुस्‍ती केंद्रों पर आने वाले लोगों में करीब 56 फीसदी महिलाएं थीं। अनंतनाग जिले के पहलगाम ब्लॉक स्थित हुतमुराह स्‍वास्‍थ्‍य एवं तंदुरुस्‍ती केंद्र पर मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप का इलाज करा रही 47 वर्षीय रानी कौर की बातों से पता चलता है कि एचडब्ल्यूसी केवल गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को ही सेवाएं प्रदान नहीं करता है। वह कहती हैं, इस स्वास्थ्य उपकेंद्र में सीएचओ की नियुक्ति से हमें लगता है कि अब तमाम बीमारियों के उपचार के लिए ब्लॉक जाने की कोई जरूरत नहीं है। अब यहां देखने वाला कोई तो है। यहां मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप की नियमित जांच की सुविधा भी उपलब्ध है। स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्‍ती केंद्रों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्‍यवस्‍था में आम लोगों का विश्वास बहाल किया है। इससे पता चलता है कि गुणवत्‍तापूर्व व्‍यापक सेवाएं एवं निरंतर देखभाल उपलब्‍ध कराने से सार्वभौमिक पहुंच भी सुनिश्चित होती है। साथ ही इसने बहुक्षेत्रीय भागीदारी भी सुनिश्चित की है। एचडब्ल्यूसी में सरकार द्वारा किए गए निवेश से सेवा प्रदाताओं को भी सशक्त किया गया है। जम्मू जिले के डंसल ब्लॉक स्थित कटाल बटाल स्‍वास्‍थ्‍य एवं तंदुरुस्‍ती केंद्र की सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी समृद्धि रैना कहती हैं, लोग नियमित परामर्श एवं जांच के लिए यहां आते हैं और समय पर अपनी दवाएं लेते हैं। मरीजों को इतना भरोसा है कि वे मेरी सलाह के बिना पास के एनटीपीएचसी (न्‍यू टाइप प्राइमरी हेल्‍थ सेंटर) भी नहीं जाते हैं। उन्‍होंने कहा, मैं समय पर आती हूं और मरीजों की बातों को ध्‍यान से सुनती हूं। इसलिए लोग मुझ पर विश्वास करते हैं। जहां तक कि मौजूदा कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौर में भी इन स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्‍ती केंद्रों के कर्मचारी लोगों को लगातार सेवाएं उपलब्‍ध करा रहे हैं। बारामूला जिले के कुंजर ब्लॉक स्थित मालवा स्‍वास्‍थ्‍य एवं तंदुरुस्‍ती केंद्र में तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी रेहाना बेगम ने बताया कि वह न केवल लोगों को सामाजिक दूरी एवं स्वच्छता के बारे में जागरूक कर रही हैं, बल्कि गर्भवती माताओं की पहचान करने और उन्‍हें प्रसवपूर्व देखभाल का काम भी लगातार जारी है। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस दौरान प्रसव कराने संबंधी सेवाओं को भी लगातार जारी रखा। एचडब्‍ल्‍यूसी की स्थापना से रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिला है। अनंतनाग जिले के डुरु ब्लॉक स्थित बडसगाम स्‍वास्‍थ्‍य एवं तंदुरुस्‍ती केंद्र में तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी रुहीला हमीद कहती हैं, मैं एक अर्हता प्राप्त नर्स के तौर पर नवंबर 2019 में इस केंद्र पर बतौर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी तैनात हुई थी। मुझे यह नौकरी और मानदेय पसंद है। मैं बाहृय रोगियों को देखती हूं, टीकाकरण करती हूं और एनसीडी जांच भी करती हूं। यहां नियमित सेवाओं से लोगों को काफी मदद मिली है क्योंकि अब सब कुछ पास में ही उपलब्ध है। पहले लोगों को बहुत दूर जाना पड़ता था। सामुदायिक स्वास्थ्य में छह महीने के सर्टिफिकेट प्रोग्राम के जरिये 589 सीएचओ को प्रशिक्षित कर विभिन्‍न स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्‍ती केंद्रों में तैनात किया गया है। इससे एसएचसी-एचडब्‍ल्‍यूसी स्तर पर बेहतर सेवाएं सुनिश्चित हुई हैं। जनवरी 2020 में इस पाठ्यक्रम के लिए लगभग 440 लोगों को नामांकित किया गया है। इसके लिए अध्ययन केंद्रों की संख्‍या 4 से बढ़कर 10 हो गई है। कश्‍मीर विश्‍वविद्यालय के आबादी अनुसंधान परिषद के श्री सैयद खुर्शीद अहमद और मुनीर अहमद ने जम्मू-कश्मीर में एचडब्ल्यूसी का समकालीन मूल्यांकन शीर्षक के तहत मार्च 2020 में अपनी एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। उस रिपोर्ट में कहा गया है कि अतिरिक्त कार्यबल यानी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की तैनाती से ओपीडी में लोगों की आवाजाही में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे एनसीडी का बुनियादी प्रबंधन और मुफ्त दवाओं एवं जांच की उपलब्‍धता सुनिश्चित होने के अलावा रेफरल लिंकेज में भी सुधार हुआ है। सीएचओ को लगता है कि यह जमीनी स्तर पर लोगों की सेवा करने का सबसे अच्छा तरीका है। उन्होंने 5 जिलों-श्रीनगर, अनंतनाग, जम्मू, उधमपुर और बारामूला- में अध्ययन किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन सुविधाओं में सुधार के बाद सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था में लोगों की भागीदारी, दिलचस्‍पी और भरोसे में वृद्धि हुई है। एचडब्ल्यूसी ने परिचालन संबंधी तमाम चुनौतियों के बावजूद राज्य में स्वास्थ्य व्‍यवस्‍था को कहीं अधिक जवाबदेह और मजबूत बनाया है।
( लेखक डिपार्टमेंट आॅफ कम्‍युनिटी मेडिसिन एंड स्‍कूल आॅफ पब्लिक हेल्‍थ
पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ के प्रोफेसर हैं)

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