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झारखंड की महिलाएं पारंपरिक खेती को छोड़ वैज्ञानिक खेती से बदल रही है गांव की तस्वीर  

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गौतम चौधरी 

रांची : झारखंड के कुछ किसान अब पारंपरिक खेती को छोड़ आधुनिक खेती में हाथ आजमा रहे हैं। यही नहीं प्रदेश की महिलाएं भी इस क्षेत्र में अब बढ़िया प्रदर्शन कर रही हैं। गैरपारंपरिक खेती के माध्यम से ये महिला किसान न केवल अधिक मुनाफा कमा रहे हैं अपितु ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

विगत कुछ वर्षों से झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत, झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना का संचालन किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत राज्य की महिला किसानों को कृषि सम्बन्धी आधुनिक तकनीकों जैसे श्री विधि, मचान विधि आदि के बारे में आजीविका कृषक मित्रों के माध्यम से ट्रेनिंग दी जा रही है। इस प्रशिक्षण का प्रभाव अब दिखने लगा है। यही कारण है कि अभी हाल में ही झारखंड की महिला किसान गुमला की कांति देवी और सरायकेला के सोखेन हेंब्रम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा कृषि कर्मण पुरस्कार से नवाजा गया।

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इन महिला किसानों को ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा बीज मुहैया करने के अलावा केंचुआ खाद, जीवामृत आदि जैविक खाद बनाने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इस परियोजना से किसानों को नकदी फसलों जैसे गेहूं, मक्का, अरहर और सरसों आदि की खेती करने के लिए हर संभव सहयोग और प्रोत्साहन दिया जा रहा है। परिणामस्वरूप, आज ये महिला किसान धान और आलू के साथ-साथ बड़े पैमाने पर गेहूं, मक्का, अरहर और सरसों की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। मिश्रित खेती के अलावा इन महिलाओं को पोषण वाटिका अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि घर बैठे ही परिवार के पोषण संबंधी जरूरतें पूरी की जा सके।

सरकारी योजनाओं से लाभ 

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना से वित्त वर्ष- 2019-2020 में खरीफ की फसलों में अरहर की खेती के लिए पूरे प्रदेश में 19,276 महिलाओं ने वैज्ञानिक खेती कर लाभ प्राप्त किया जबकि गिरिडीह जिले के बेंगाबाद ब्लॉक में 1,465 महिला किसानों को इसका लाभ मिला। मक्का में पूरे प्रदेश से 15,185 और बेंगाबाद ब्लॉक से 678 महिलाओं ने लाभ प्राप्त किया। उसी प्रकार रबी फसल के दौरान पूरे प्रदेश में गेहूं के लिए  8,630 और बेंगाबाद ब्लॉक में 1,187 महिला किसानों ने सुविधा का लाभ उठाया। सरसों की फसल के लिए 7,835 और बेंगाबाद ब्लॉक में 962, आलू की फसल के लिए  पूरे प्रदेश से 18,233 और बेंगाबाद ब्लॉक 1,995 महिला किसानों ने लाभ प्राप्त किया।

क्या कहते हैं लाभुक 

सरस्वती आजीविका स्वयं सहायता समूह की कलावती देवी (47 वर्ष) कहती हैं, मैं मुख्य रूप से धान की खेती करती थी लेकिन एमकेएसपी के तहत मुझे नकदी फसलों की खेती करने की प्रेरणा मिली। पिछले दो साल से मैं लाइन विधि से गेहूं और अरहर की खेती कर रही हूँ जिससे मुझे अच्छा मुनाफा हो रहा है।

– हरीला गाँव, बेंगाबाद ब्लॉक, गिरिडीह   

यासमीन परवीन अपना अनुभव साझा करते हुए कहती हैं कि मेरे पास 5 एकड़ जमीन है लेकिन मैं खेती-बाड़ी नहीं करती थी लेकिन जब मैं मंजिल आजीविका स्वयं सहायता समूह से 2016 जुड़ी तब मुझे एमकेएसपी के बारे में पता चला। फिर मैंने अपने पति की मदद से 2017 में पहली बार खेती शुरू की। इस परियोजना के तहत ट्रेनिंग व अन्य सहयोग लेकर मैंने धान, गेहूं और सब्जियों की बड़े पैमाने पर खेती आरंभ की। पिछले 2 से मुझे खेती से खूब अच्छी आमदनी हो रही है। 2018 में सिर्फ गेहूं बेचकर मैंने 1.25 लाख रुपये की कमाई की।

– मोहनपुर गांव, बेंगाबाद ब्लॉक, गिरिडीह  

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