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दुसरों को सुख देने से बड़ा कोई पुण्य नहीं : सदानंद महाराज

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रांची: अग्रसेन भवन में प्रणामी ट्रस्ट की ओर से चल श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन में स्वामी सदानंद महाराज ने कहा कि दुसरों को सुख देने से बड़ा कोई पुण्य नहीं है और दुसरे को कष्ट देने से बड़ा कोई पाप नहीं है। उन्होंने प्रणामी धर्म की पूजा पद्घति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह पूजा पद्धति चार सौ वर्षाे से प्रणामी मंदिरों में चल रही है। उन्होंने कहा कि भगवान भक्तों को किसी भी कष्ट को बड़ी सहजता से उबार लेते हैं।

इस संसार रूपी भवसागर को भक्त उसी तरह पार कर लेते हैं, जैसे गाय के बछड़े के खूर से बने गढ़े हों। जब परिक्षित को अश्वस्थामा द्वारा छोड़े गये ब्रह्मस्त्र का वाण लगने लगा तो भगवान अस्त्र लेकर रक्षा की। स्वामीजी ने कहा कि जब वाणी रूपी अस्त्र से प्रहार किया गया तो भगवान स्वयं शुकदेवजी के रूप में वाणी से भागवत सुनाकर मोक्ष दे दिया। भगवान श्रीकृष्ण के युग में समस्त लीला का सम्वरण करते हुए उद्घवजी को ज्ञान दिये, जिन्हें आत्मकल्याण करना हो वह द्वारिकापुरी छोड़कर गुरूओं के शरण में चले जायें, क्योंकि आज के सांतवें दिन द्वारिकापुरी समुद्र में लीन हो जायेगी। उद्घवजी ने कहा कि भगवान मैं आपके साथ चलुंगा।

भगवान श्रीकृष्ण बोले हे!उद्घव इतने बड़े ज्ञानी होकर भी मुर्ख जैसी बाते करते हो। संसार में न काई साथ आया है न कोई साथ जायेगा। जीव संसार में अकेला आता है और अपने कर्मो का भोग भोग करके संसार से चला जाता है। उसके बाद भगवान श्री कृष्ण पद्आसन पर बैठे हुये थे एक बहेलीया ने आकर भगवान के चमकते हुये अंगुठे पर वाण चलाया। भगवान बहेलिया का बहाना करकें स्वयं परम्धाम के लिये अंर्तध्यान हुये। स्वामीजी ने अंत में कहा कि इस प्रकार शुकदेवजी के मुखारविंद से राजा परिक्षित ने श्रीमद् भागवत कथा सुनी और उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ।

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कार्यक्रम में समिति की ओर से महाराज और सभी संगीतकारों का सम्मान किया गया। कथा में मुख्य रूप से डुंगरमल अग्रवाल, मनोज चौधरी, निर्मल जालान, राजु अग्रवाल, बसंत कुमार गौतम, प्रमोद सारस्वत, बिजय जालान, बिजय अग्रवाल, विशाल जालान, शिव भगवान अग्रवाल, सुरेश चौधरी, किशन अग्रवाल, प्रभाष गोयल, पुरणमल सर्राफ, चिरंजी लाल खंडेलवाल, बासुदेव प्रसाद अग्रवाल, सुरेश भगत, मनीष जालान,गोविंद अग्रवाल, शंकर लाल मोदी, अमित पोद्दार, नन्द किशोर चौधरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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