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पार्टी के खिलाफ बगावती हुए सरयू राय, CM दास के खिलाफ हो सकते हैं निर्दलीय उम्मीदवार

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गौतम चौधरी
रांची : भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव को लेकर अपने उम्मीदवारों की चौथी सूचि तो जारी कर दी लेकिन उस सूचि में रघुवर सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री का नाम नहीं है। इस बात से खिन्न सरयू राय ने शनिवार को पार्टी से विद्रोह के संकेत दिए। उन्होंने स्‍पष्‍ट कर दिया कि जमशेदपुर पश्चिम सीट से उन्हें अब भाजपा की टिकट में कोई रूची नहीं है।

क्यों गुस्से में हैं सरयू राय
सरयू राय प्रदेश भाजपा के कद्दावर नेता माने जाते हैं। वे बिहार एवं झारखंड भाजपा के उत्थान और पतन के साक्षी रहे हैं। कुल मिलाकर राय की छवि भी अच्छी है, बावजूद इसके चौथी सूचि में भी भाजपा ने उनकी सीट को होल्ड पर ही रखा है। वैसे सरयू राय, प्रदेश के मुख्यमंत्री रघुवर दास के घुर विरोधी माने जाते हैं। इसे राय ने कभी छुपाया भी नहीं। वे विगत चार वर्षों से रघुवर सरकार के खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं।

जानकार सूत्रों पर भरोसा करें तो मुख्यमंत्री दस अपनी ओर से राय के खिलाफ कभी सार्वजनिक मोर्चा तो नहीं खोला लेकिन भाजपा के आलाकमान से राय के खिलाफ शिकायत करते रहे हैं। इस बात को लेकर केन्द्रीय नेतृत्व ने कई बार राय को हेदायत भी दी लेकिन रघुवर के खिलाफ राय की तल्खी बनी रही।

एक बार भाजपा के तत्कालीन राष्टÑीय संगठन महामंत्री रामलाल ने दोनों के बीच समझौता कराने का भी प्रयास किया था लेकिन समझौता नहीं हो पाया। ऐन चुनाव से पहले राय के बगावती सुर से भाजपा में भूचाल के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं।

राय अपना सकते हैं ये विकल्प
शनिवार को सरयू राय ने प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। यही नहीं राय के निकटस्थों से मिली खबर में बताया गया है कि राय ने नामांकन के लिए जमशेदपुर पश्चिमी एवं पूर्वी दोनों विधानसभाओं का नामांकन पत्र खरीदा है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि राय को अगर भाजपा टिकट नहीं देगी तो वे मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा से मैदान में उतर सकते हैं।

राय मझे हुए राजनेता माने जाते हैं। बिहार हो या फिर झारखंड कई बड़े नेताओं को उन्होंने पटखनी दी है। हेमंत सोरेन को भविष्य का नेता बताने के पछे राय की गहरी राजनीतिक चाल हो सकती है। इधर हेमंत सोरेन भी हाथ में आए अवसर को जाने नहीं देंगे। वे चाहेंगे कि मुख्यमंत्री दास अपने क्षेत्र में ही इतना उलझ जाएं कि वे बाहर का सोंच ही न सकें। ऐसे में हेमंत राय का समर्थन कर सकते हैं।

हेमंत के समर्थन के बाद कांग्रेस और झारखंड विकास मोर्चा भी राय का समर्थन कर सकती है। झारखंड विकास मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी से राय के अभी भी अच्छे संबंध बताए जाते हैं। ऐसे में उम्मीद यह जताई जा रही है कि राय संयुक्त प्रतिपक्ष के उम्मीदवार के रूप में जमशेदपुर से पूर्वी से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतर सकते हैं। हालांकि इस बात की किसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

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क्या रहा है सरयू राय का इतिहास
सरयू राय ने 1994 में सबसे पहले पशुपालन घोटाले का भंडाफोड़ किया था। बाद में इस घोटाले की सीबीआइ जांच हुई और संयुक्त बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सहित कई बड़े नेता एवं अधिकारी जेल गए। राय ने घोटाले के दोषियों को सजा दिलाने को उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक संघर्ष किया।

सरयू राय ने 1980 में किसानों को आपूर्ति होने वाले घटिया खाद, बीज, तथा नकली कीटनाशकों का वितरण करने वाली शीर्ष सहकारिता संस्थाओं के विरूद्ध भी आवाज उठायी थी। तब उन्होंने किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए सफल आंदोलन किया। सरयू राय ने ही संयुक्त बिहार में अलकतरा घोटाले का भी भंडाफोड़ किया था। इसके अलावा झारखंड के खनन घोटाले को उजागर करने में सरयू राय की अहम भूमिका रही।

इतने घोटालों के पदार्फाश के बाद तो सरयू राय का नाम भ्रष्ट अधिकारियों में खौफ का पर्याय बन गया। 2014 में सरयू राय जमशेदपुर पश्चिम से चुनाव जीते थे। इसके बाद रघुवर सरकार में उन्हें खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री बनाए गए। अपने कार्यकाल में सरयू राय रघुवर दास सरकार को लेकर काफी मुखर रहे थे और कई नीतिगत मुद्दों पर उनकी आलोचना की थी।

राय के मामले में क्या कहते हैं भाजपा नेता
शनिवार को भाजपा मुख्यालय पर मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में प्रदेश चुनाव प्रभारी एवं राष्टÑीय उपाध्यक्ष ओम प्रकाश माथुर ने कहा कि अभी इस मामले में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। हम भी इंतजार कर रहे हैं और आप भी इंतजार करिए।

सरयू राय ने क्या कहा
शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान सरयू राय ने कहा कि उन्होंने अपने निर्णय से पार्टी के आला नेताओं को अवगत करा दिया है। भाजपा के आला नेताओं से आग्रह किया है कि जमशेदपुर पश्चिम से जिसे चाहे चुनाव लड़ा सकते हैं। अपना फैसला रविवार को कार्यकत्ताओं के साथ बैठक के बाद बतायेंगे। भाजपा के साथ लंबे समय से काम करने में मुझे हमारे राष्‍ट्रीय स्‍तर के नेताओं का अनेक बार मार्गदर्शन मिला।

पार्टी के बदलते चरित्र को देखने का भी अवसर मिला। मेरा हमेशा ही यह प्रयास रहा कि पार्टी से जो मिला उसके लिए अनुग्रहित रहूं। बिना मांगे पार्टी ने मुझे कई पदों पर रखा। मुझे एमएलसी, एमएलए, मंत्री बनाया। अभी ऐसी स्थिति आ गयी है, जैसे लगता है कि पार्टी की एक टिकट के लिए आदमी कटोरा लेकर खड़ा है। कई दिनों से मैं मानसिक प्रताड़ना से गुजर रहा हूं। मैं दिल्‍ली भी गया और अपने नेताओं से कहा कि आप टिकट होल्‍ड पर मत रखिए, आम निर्णय कर दीजिए।

आप निर्णय करेंगे तो मेरे क्‍या-क्‍या विकल्‍प होंगे वह भी उनको बता दिया। भाजपा ने शनिवार को चौथी सूची जारी की तब मैंने मीडिया के माध्‍यम से सार्वजनिक तौर पर राज्‍य की जनता और पार्टी के नेतृत्‍व को बता दिया कि भाजपा से जमशेदपुर पश्चिम का टिकट लेना मेरी प्राथमिकता नहीं है।

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