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पूरे देश में है कोरोना का फुटप्रिंट

हरि शंकर व्यास, संवाद परिक्रमा

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भारत में अप्रैल के आखिरी हफ्ते तक माना जाने लगा था कि हमने वायरस पर काबू पा लिया है। झूठ फैल रहा था कि देश में आधे से ज्यादा जिलों में एक भी मामला नहीं है और एक चौथाई के करीब जिले ऐसे हैं, जहां इक्का-दुक्का केस हैं।

सो जल्दी ही तीन चौथाई से ज्यादा देश कोरोना से फ्री हो जाएगा और जहां हॉटस्पॉट बन रहे हैं वहां भी लॉकडाउन के सहारे कोरोना को घेर कर मार डालेगें, पर यह सदिच्छा पूरी नहीं हुई है। मई का आखिरी हफ्ता शुरू होने से पहले ही यानी ठीक एक महीने में देश के लगभग हर जिले में कोरोना का मामला पहुंच गया है। पूर्वोत्तर के कुछ जिले बचे हुए हैं और उनके अलावा झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, जैसे राज्यों में दो-दो, तीन-तीन जिले बचे हैं तो वहां भी मामलों का पहुंचना महज वक्त की बात है।

देश में जब से कोरोना वायरस का पहला मामले मिला तब से लेकर दो हफ्ते पहले तक पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ साथ बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड आदि राज्य भी कम विस्तार वाले राज्य माने जा रहे थे। उत्तर प्रदेश में सारा फोकस नोएडा और आगरा पर था। ऐसा लग रहा था कि सबसे बड़ी आबादी वाले इन दो प्रदेशों में कोरोना ज्यादा नहीं फैलेगा। इसके लिए तरह-तरह के तर्क थे। पर अब स्थिति यह है कि बिहार के सभी 38 जिलों में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज हैं। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में कोरोना के केस है।

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बाकी राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामले कुल जिलों में बहुत ज्यादा हैं और बाकी जगह बहुत कम। लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश में हर जिले में लगभग समान रूप से संक्रमण का फैलाव है। जैसे मध्य प्रदेश में छह हजार मामलों में से करीब साढ़े चार हजार मामले सिर्फ चार जिलों- इंदौर, भोपाल, उज्जैन और खंडवा में हैं। इसी तरह राजस्थान के 62 सौ मामलों में से 50 फीसदी से ज्यादा मामले तीन जिलों- जयपुर, जोधपुर और उदयपुर में हैं। महाराष्ट्र के 41 हजार मामलों में से साढ़े 25 हजार मामले अकेले मुंबई में हैं और उसके बाद करीब 12 हजार मामले चार जिलों- ठाणे, पुणे, औरंगाबाद और नासिक में हैं।

इस तरह की स्थिति बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड आदि राज्यों की नहीं है। इन राज्यों के सभी जिलों में मामले समान रूप से केसेज हैं। इसका कारण यह है कि इन राज्यों में कोरोना वायरस का संक्रमण देर से पहुंचना शुरू हुआ है। जैसे बिहार में 22 अप्रैल को कुल 38 में से 23 जिले ऐसे थे, जहां एक भी केस नहीं था।गौरतलब है कि 22 अप्रैल को केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण का जिलेवार ब्योरा जारी किया था। उसके मुताबिक उत्तर प्रदेश में 20, मध्य प्रदेश में 19 और झारखंड में 12 जिले ऐसे थे, जहां एक भी केस नहीं था।

आज बिहार और उत्तर प्रदेश में एक भी जिला नहीं बचा है, जहां कोई केस नहीं है। मध्य प्रदेश में भी सिर्फ तीन जिले ऐसे हैं, जहां शुक्रवार की सुबह तक कोरोना वायरस का कोई मामला नहीं था। झारखंड में भी सिर्फ तीन जिले बचे हैं, जहां अभी तक कोरोना नहीं पहुंचा है। पूरे देश के हिसाब से देखें तो 22 अप्रैल को देश के तीन सौ जिलों में एक भी केस नहीं था। अब ऐसे जिलों की संख्या एक सौ के करीब है। यानी एक महीने में कोरोना वायरस का फुटप्रिंट करीब दो सौ नए जिलों में पहुंचा।

ध्यान रहे एक महीने की अवधि लॉकडाउन का पीरियड रहा है। इस दौरान कोई खास छूट नहीं दी गई थी। केंद्र सरकार ने छूट देने की शुरुआत चौथे चरण में यानी 18 मई से शुरू की है। जब ज्यादा छूट नहीं थी और सख्ती से लॉकडाउन लागू किया गया था तब कोरोना वायरस इतनी तेजी से फैला। अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब हर तरह की छूट दे दी गई है, ट्रेनें चलने लगी हैं, निजी सवारियों से लोग एक राज्य से दूसरे राज्य जा रहे हैं, हवाईसेवा शुरू होने वाली है और सरकारी बसों की सर्विस भी शुरू हो गई है, बाजार खुल गए है, सरकारी व निजी कार्यालय खोल दिए गए हैं तो इसके फैलने की रफ्तार कैसी होगी?

कोरोना वायरस के बारे में एक बात ध्यान रखना चाहिए कि यह जहां पहुंचा है वहां फैला है। अगर देर से पहुंचा है तो देर से फैलेगा। ऐसा नहीं है कि यह पहुंच कर अपने आप या आसानी से खत्म हो गया हो। आंकड़े भी इस बात की गवाही दे रहे हैं। गोवा में शुरू के दिनों में सिर्फ सात मामले आए थे और सातों ठीक होकर चले गए। तो कहा गया कि गोवा कोरोना फ्री हो गया पर आज वहां 45 एक्टिव मामले हैं। इसी तरह केरल में खत्म होने के बाद फिर 177 एक्टिव मामले हो गए हैं। केरल के मामले बाहर से आए हैं और वहां की जो व्यवस्था है उसमें लग रहा है कि ये सारे लोग भी ठीक हो जाएंगे और राज्य संक्रमण को रोक भी देगा पर दूसरे राज्यों में यह संभव नहीं है।

सो भारत में सबसे पहले मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, इंदौर आदि में कोरोना का हल्ला मचा और अब छोटे शहरों व गांवों में पहुंचा है। बहरहाल, कहने का मतलब यह है कि पहुंचने के बाद हर जगह इसका संक्रमण फैला है, चाहे देर से फैला हो। जैसे 22 अप्रैल को देश में तीन सौ जिलों में कोई केस नहीं था और दो सौ जिले ऐसे थे, जहां दस से कम मामले थे। इन दो सौ जिलों में अब औसतन 40 मामले हैं यानी चार गुना बढ़ोतरी हुई। 22 अप्रैल को जिन डेढ़ सौ जिलों में 10 से 50 संक्रमित थे वहां अब औसतन एक सौ संक्रमित हैं और उस समय जिन 30 जिलों में 50 से एक सौ मामले थे वहां अब औसतन 220 मामले हैं।

इससे कोई इनकार नहीं है कि देश के बड़े हिस्से में कोरोना वायरस मजदूरों के साथ पहुंचा है। लेकिन यह भी सरकार में दूरदृष्टि की कमी का एक सबूत है। अगर सरकार ने लॉकडाउन लागू करने से पहले मजदूरों को उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था की होती तो आज न मजदूरों के पलायन की ऐसी त्रासदी होती और न वायरस इतना फैलता।

बहरहाल, विशेष ट्रेन से जब से मजदूरों को भेजा जाने लगा है तब से हर राज्य में इसका फैलाव हो गया है। बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में तो खासतौर से। अब बिहार के मुख्यमंत्री मांग कर रहे हैं मजदूरों के लिए चलने वाली विशेष ट्रेनें राजधानी पटना की बजाय जिलेवार पहुंचाई जाएं। इससे कोरोना के केसेज सीधे जिले में पहुंचेंगे। सवाल है कि क्या जिलेवार सरकारों ने जांच, क्वरैंटाइन और इलाज की सुविधा बनाई है? हकीकत है कि देश के ज्यादातर हिस्सों में कोरोना की टेस्टिंग, क्वरैंटाइन और इलाज एक तमाशा है।

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