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पैदाइशी जंगजूं हैं मेहरून्निसा

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रामपुर 14 जून (सन्मार्ग) चीन में शंघाई के एक रेस्तरां के जिस मेन्यू कार्ड में खूबसूरत मेहरून्निसा की तस्वीर उकेरी गयी थी, असल में वह जिंदगी से बेइंतिहा मोहब्बत करने वाली और विपरीत परिस्थितियों का बखूबी से सामना करने वाली एक जिंदा दिल इंसान हैं।

उत्तर प्रदेश में रामपुर के नवाबी खानदान से ताल्लुक रखने वाली मेहरून्निसा खान की तस्वीर शंघाई के एक रेस्तरां ने अपने मेन्यू कार्ड में डाल दी थी जिसका एतराज पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां ने किया जिसके बाद चीन में भारत के राजदूत ने विक्रम मिस्री ने शंघाई में रेस्टोरेंट्स के मालिक को तलब किया जिसने शाही खानदान की भावनाएं आहत किए जाने के लिए खेद व्यक्त किया है और भविष्य में कभी भी ऐसा न करने का आश्वासन भी दिया है।

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रामपुर के अन्तिम शासक रहे नवाब सैयद रजा अली खां की पुत्री मेहरुन्निसा खान की जिंदगी को एक जुमले में कहा जा सकता है कि वह जिन्दगी से बेहद प्यार करने वाली इंसान रहीं। कोठी खास बाग के इर्दगिर्द रहने वाले बाशिन्दे जो नवाब खानदान से वाबस्तगी रखते हैं, उनका मानना है कि तमाम परेशानियों में भी मेहरून्निसा खान ने जद्दोजहद का माद्दा नहीं छोड़ा। उनका किरदार किसी के लिए भी उम्मीदों से भरा हुआ और बेहद हौसलाफजाई करने वाला है। उनका बचपन राजघराने में बेशुमार नेमतों के साथ गुजरा। पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां बताते हैं कि मेहरून्निसा खान रामपुर के आखिरी नवाब सैयद रजा अली खां और बेगम आफताब जमानी की बेटी हैं और उनके वालिद मरहूम साबिक मेम्बर आफ पार्लियामेंट जुल्फिकार अली खां उर्फ मिक्की मियां की बहन हैं, जो यूएसए के वाशिंगटन डीसी में रहती हैं।

रामपुर रियासत के दौर में मेहरून्निसा खान ने हिन्दुस्तान की नामचीन हस्तियों समेत पण्डित जवाहर लाल नेहरू के साथ दस्तरख्वान साझा किया, लेकिन एक दौर ऐसा भी आया कि लखनऊ से ताल्लुक रखने वाले अपने शौहर जकी नकी और अपने दो लख्तेजिगर मासूमों को छोड़ना पड़ा। अपने दो बच्चों जो कि पांच और तीन साल के थे उनको देखने और मिलने तक की उन्हें इजाजत नहीं थी। एक मां जिसने अपने खून से अपने बच्चों की दुनिया में आने से पहले ही परवरिश करना शुरू की उसको कभी अपनी दिल के टुकड़ों को देखने तक की इजाजत नहीं मिली, लेकिन मेहरून्निसा खान ने अपनी जिन्दगी की जद्दोजहद नहीं छोड़ी।

शहजादी रामपुर से लन्दन चलीं गईं और वहां पाकिस्तानी वायुसेना के ग्रुप कैप्टन रहीम खान से उन्हें प्यार हो गया। जल्द ही वह रहीम खान से शादी करके अपनी हिन्दुस्तानी विरासत को पीछे छोड़कर पाकिस्तान में बस गईं। रहीम खान को पाकिस्तानी फजाई फौज का कमाण्डर इन चीफ बनाया गया, जो कि राष्ट्रपति के सैकेण्ड इंचार्ज थे। इस दौरान एक बार फिर शहजादी मेहरून्निसा ने पूरी दुनिया घूमी और ऐशो इशरत की जिन्दगी गुजर बसर की।

राजा महाराजाओं से मुलाकातें और पार्टीज में शामिल हुईं, लेकिन एक बार फिर उनकी जिन्दगी ने बड़ी करवट ली और उनके शौहर और राष्ट्रपति भुट्टो को कुनबे के साथ यूएस में पाॅलिटिकल एसाइलम में डाल दिया गया जिसकी वजह से उनके शौहर गहरे तनाव में पहुंच गये और शराब ने उनकी जिन्दगी तबाह कर दी और उनके बेटे को ड्रग्स की लत लग गई। किडनी ट्रांसप्लांट में शौहर और कार एक्सीडेंट में उनके बेटे की 23 साल की उम्र में मौत हो गई।

नवाबजादी पैदाइशी जंगजूं हैं और उन्होने इन मुश्किल हालात में भी जद्दोजहद नहीं छोड़ी। मशहूर ब्लाॅगर अपने ब्लाॅग में लिखतीं हैं कि उन्होने वाशिंगटन डीसी के यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट आफ एग्रीकल्चर में उर्दू और हिन्दी पढ़ाने से एक बार जिन्दगी की किताब के नये वर्कों का आगाज किया, जबकि वह गिरवी घर में रहतीं और कर्ज में डूबी हुईं थीं। बावजूद इसके जिन्दगी जीने की ललक और उमंग अब भी उनके अन्दर बाकी रही। जैसा कि उनके लफ्ज हैं ’’मैं चीजों को चला सकती हूं और मैं इतनी आसानी से हार नहीं मान सकती’’।

उनकी जिन्दगी आज भी लोगों को जीने की राह दिखाती है। 75 साल की उम्र में वह आज भी लंदन में नाचना, आगे पढ़ाई करना और क्लासिकल मौसिकी सीख रहीं हैं। उन्होने अपनी सवाने हयात ‘एन एक्सट्राआर्डिनरी लाइफः प्रिंसेज मेहरून्निसा आफ रामपुर’ में लिखा है “ अपने ख्यालात, सभी ख्वातीन से साझा करना चाहती हूं कि कोई जो कुछ चाहता है वह कर सकता है। जिन्दगी जरूरी तौर से कयास से परे है। हर कोने में जिन्दगी के हैरानकुन करने वाले और जिन्दगी को मुरझा देने वाले पल मुमकिन हैं। यह आप खुद ही हैं कि आप इन पलों को कैसे इज्जत देने वाले हैं।”

नवाब काजिम अली खां के निजी प्रवक्ता काशिफ अली खां बताते हैं कि मेहरून्निसा खान लंदन में रहती है। आज भी उनकी जिन्दगी काबिल ए इबरत और नसीहत आमेज बनी हुई है। प्रिंसेज मेहरून्निसा की जिन्दगी का लम्हा लम्हा सिखाता है कि जिन्दगी को कैसे जिया जाये। जिन्दगी से प्यार कैसे किया जाये। जिन्दगी के हर इक पल को खुशी के साथ जियें। मेहरून्निसा वाकई असलियत में शहजादी हैं, इसलिए नहीं कि वह एक शहजादी की तरह पैदा हुई बल्कि उन्होंने अपनी जिन्दगी तमाम पतझड़ों के बावजूद एक शहजादी की तरह ही जी, उन्होने दुनिया में जिन्दगी के म्यार साबित किये।

सं प्रदीप

सन्मार्ग

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