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प्रयागराज में गरीबों का मसीहा बना एक चिकित्सक

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प्रयागराज, (सन्मार्ग लाइव) वैश्विक महामारी कोविड-19 से बचाव के लिए घोषित लॉकडाउन के कठिन समय में एक चिकित्सक गरीब परिवारों की मदद में रात दिन जुटा हुआ है।

प्रयागराज के डिवाइन टंच डेंटल अस्पताल के निदेशक डा कृष्णा सिंह ने बताया कि लॉकडाउन के कारण शहर की दुकानें बंद हैं। श्रमिकों के काम धंधा बंद होने के कारण उनके पास खाने का भी पैसा नहीं बचा है। भूख से पीड़ित लोगों के दर्द को देखने के बाद एक संकल्प के तहत अभियान की शुरूआत किया कि कोई भी जरूरतमंद भूखा नहीं सोए इसलिए प्रतिदिन करीब 200 परिवारों में खाद्य सामग्री के पैकेट का वितरण कर रहे हैं।

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डा सिंह ने अपने अभियान के लक्ष्य को प्राथमिकता के आधार पर जरूरतमंद के घर का चूल्हा जलता रहे और कोई भूखा नहीं रहे इसलिए आटा, चावल, दाल, तेल, नमक, मसाला, आलू, सब्जी प्रतिदिन अलग.अलग क्षेत्रों में जाकर वितरित करते हैं। उन्होने लोगों को हेल्पलाइन नंबर भी दिया है। उन्होने अपने नर्सिंगहोम को मुफलिसों की आवश्यकता के लिए गोदाम बना लिया है। उन्होंने बताया कि उनका आज 42वां दिन है। उनका प्रयास है कि जब तक लॉकडानउन घोषित रहेगा, वह नियमित अपने अभियान को नित आयाम देते रहेंगे।

उन्होने बताया कि उनके पास अपनी एक टीम है जो असहाय और जरूरतमंद लोगों का नाम,पता और फोन नम्बर लिख कर सोशल डिस्टेसिंग का ध्यान रखकर खाद्य सामग्री वितरित करती है। उनकी टीम के लोग अलग अलग क्षेत्रों में जाते हैं और लिस्ट से एक.एक व्यक्ति का नाम पुकारते हैं और वह खाद्य सामग्री का पैकेट उठाककर आगे बढ़ जाता है। जिनके पास मास्क नहीं होता उन्हे मास्क भी उपलब्ध कराया जाता है। निदेशक की पत्नी डा रश्मि सिंह ने बताया कि किसी राह चलते या गरीब को देखकर एक बार तो हर कोई मदद करने को तैयार हो जाता है। लेकिन जरूरतमंद वर्ग की एक निश्चित अवधि तक मदद करना बड़े पुण्य का कार्य है। गरीब व असहाय की मदद करने से बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं हैं।

डा रश्मि ने बताया कि संसार में सबसे श्रेष्ठ प्राणी मानव ही दुरूखी होगा तो इससे दुखद बात क्या हो सकती है। हर सामर्थ्य व्यक्ति को गरीब एवं असहाय की मदद के लिए आगे आना चाहिए। इस प्रकार के कार्यों से खुशी मिलती हैं। उन्होंने कहा कि गरीब और असहाय व्यक्ति से बढ़कर कोई पुण्य कार्य नहीं है। व्यक्ति से जितना हो सके गरीब एवं असहाय की मदद करनी चाहिए। यह समय की बात है। ऊपर वाले ने लोगों की भरसक सहायता करने का अवसर दिया है। ऐसे समय में जरूरतमंद लोगों की थोड़ी सहायता करने से भी उन्हे भी खुशी होती है।

उन्होने कहा कि देश में बहुत से डाक्टर ऐसे है जो निरूस्वार्थ भाव से अपने मरीजों का इलाज करते हैं। वे पैसो की तुलना में मरीजों के दर्द को अधिक प्राथमिकता देते हैं। ऐसे उपचार में जो आनंद और शांति मिलती हैए वह करोड़ों रूपये कमाकर भी नहीं हासिल की जा सकती। कोविड़.19 जैसे महामारी से लड़ने में हमारे साथी डाक्टर, सिपाही, सफाई कामगार, स्वास्थ्य विभाग की टीम आदि हर वर्ग अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

दिनेश प्रदीप

सन्मार्ग

 

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