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बाजार के धराशायी होते ही कर्मचारियों के पेंशन खाते पर डाका, कट गये करोड़ों रुपये

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गौतम चौधरी
रांची : भारतीय प्रतिभूति बाजार (शेयर बाजार) में भारी गिरावट का खामियाजा झारखंड के सरकारी कर्मचारियों को भुगतना पड़ा है। इसके कारण प्रदेश के लगभग दो लाख सरकारी कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर भयभीत हैं। कोरोना वायरस के कारण पिछले कुछ दिनों में भारतीय शेयर बाजार में रिकॉर्ड गिरावट देखने को मिली है, इसमें निवेशकों का अरबों रुपये डूब चुके हंै।

खाते में हजारों रुपये तक की आयी है गिरावट
कर्मचारी अपने नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) खाते की अलग-अलग तिथियों में राशि का तुलनात्मक स्टेटमेंट सोशल मीडिया पर लगातार शेयर कर रहे हैं। इसमें कर्मचारियों के पेंशन की राशि में गिरावट दिख रही है। एमडी कमरुद्दीन नामक कर्मचारी, जिनका पेंशन खाता संख्या 11073906493 है, उनके खाते से एक दिन में एक हजार से ज्यादा रुपये गायब हो गये हैं। जैसे 11 मार्च को उनके पेंशन खाते में 117165.64 रुपये थे जो 12 मार्च को घट कर 116775.01 रुपये रह गये। उसी प्रकार शिव कुमार नामक कर्मचारी ने बताया कि 27 फरवरी को उनके खाते में 1760568.94 रुपये थे जो 13 मार्च को घट कर 1726766.82 रुपये रह गये। फिर जब उन्होंने 14 मार्च को अपना खाता देखा तो उसमें 1719821.23 रुपये बचे थे। इनका पेंशन खाता संख्या 110030522264 है। प्रेम प्रकाश ओहदार (पेंशन खाता संख्या 110076712723) नामक कर्मचारी ने बताया कि 13 मार्च को उनके खाते में 592023.32 रुपये थे, जब उन्होंने 14 मार्च को अपना खाता देखा तो उसमें 589637.32 रुपये शेष थे। इस प्रकार कर्मचारियों के भविष्य पर सरकार की गलत योजना के कारण काले बादल साफ दिखने लगे हैं।

क्या है वर्तमान पेंशन योजना
विदित हो कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2004 के उपरांत सरकारी सेवा में आने वाले कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को समाप्त कर शेयर बाजार पर आधारित नयी पेंशन योजना लागू की थी, जिसे आज नेशनल पेंशन सिस्टम अर्थात एनपीएस के नाम से जाना जाता है। इस योजना के तहत कर्मचारियों के मूल वेतन तथा महंगाई भत्ता से 10 प्रतिशत राशि की कटौती की जाती है तथा सरकार इसमें 14 प्रतिशत जो कि झारखंड में अभी 10 प्रतिशत है की राशि जमा करती है। कुल राशि को संयुक्त रूप से पीएफआरडीए के माध्यम से म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट किया जाता है तथा शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से यह प्रभावित होता है।

कर्मचारी इसके खिलाफ
कर्मचारी पिछले कई वर्षों से अपने लिए पूर्व की भांति सुरक्षित पेंशन योजना की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है की नयी पेंशन योजना के तहत कर्मचारियों के भविष्य को शेयर मार्केट के भरोसे छोड़ दिया गया है, जो किसी कीमत पर सुरक्षित नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि इससे भविष्य की सुरक्षा पर ही प्रश्न खड़ा हो गया है। सरकार की ओर से इस योजना में कोई कैप नहीं लगाया गया है।

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क्या कहते हैं विभिन्न दल एवं श्रमिक संगठनों के नेता
गत चुनाव में कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने के मुद्दे पर वोट किया तथा उन्हें हेमंत सरकार से काफी उम्मीदें हैं। कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है तथा चुनावी घोषणा पत्र के अनुसार यथा शीघ्र मुख्यमंत्री को पुरानी पेंशन योजना बहाल करनी चाहिए।
– विक्रांत कुमार सिंह, अध्यक्ष-पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन, झारखंड।

हमलोग नयी पेंशन योजना के खिलाफ हैं। सरकार जल्द से जल्द पुरानी योजना लागू करे। इस बात को लेकर हमलोग आंदोलन करेंगे।
– जनार्दन सिंह, सचिव-झारखंड प्रदेश भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मर्क्सवादी-लेनिनवादी)।

वर्तमान पेंशन योजना कर्मचारियों के साथ धोखा है। कॉरपोरेट के हाथों की कठपुतली सरकार ने पेंशन में जमा पैसे को लूट की छूट दे दी है। हमारी पार्टी इसका विरोध करती है।
– अजय कुमार सिंह, जिला सचिव-भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, रांची।

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