सन्मार्ग लाइव
सनसनी नहीं, सटीक खबर

मजदूर की दास्तां

उरुस सबा

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भारत का बेटा है यह जो मजदूर कहलाया है,
विडंबना ने इसको हर दौर में मजबूर बतलाया है ।
बचपन में इसकी मां ने और के खेतों में अनाज बहुत उपजाया है,
परंतु आधा पेट खाना देकर ही इसको रात सुलाया है।
जवानी में सपरिवार गांव में रोजी भी कुछ कम ही कमाया है,
लेकिन वह भी साकार और मौसम की मार को चुकाया है।
जी हां! भारत का बेटा है यह जो मजदूर कहलाया है।
सुखी जीवन की आस में भटकता हआ शहर चला आया है,
शहर की छोटी रोजी और बड़ी उम्मीद ने इसे बहुत बहलाया है।
बीवी बच्चों की याद ने कई रातों यहां बहुत रुलाया है,
पर उम्मीदों का दामन थामें इसने खुद को बहुत समझाया है।
जी हां! भारत का बेटा है यह जो मजदूर कहलाया है।
राष्ट्र निमार्ता बनकर कहीं भवन तो कहीं काली लंबी सड़क बनाया है,
हम सबके सर पर छत देकर सपनों का घर बसवाया है।
पर दूसरों के घरों में ही अपने सपनों का दीप जलाया है,
क्योकि सदा रैन बसेरों में सोकर ही अपनी रात बिताया है।
जी हां ! भारत का बेटा है यह जो मजदूर कहलाया है।
हाय ! इस भीषण संकट ने आज फिर इनको आजमाया है,
नियति ने नंगे पांव इन्हें फिर गांव की ओर भगाया है ।
उफ ! भाग्य विधाता ने आज फिर कैसा खेल रचाया है।
हाय ! आधे माग में ही मौत ने अपना तांडव मचाया है।
जी हां ! भारत का बेटा है यह जो मजदूर कहलाया है।
जो असहाय सा मर गया मार्ग में उसको कब
हमने अपना बतलाया था?
पर हर घर की ईट में उसका नाम कहीं समाया था ।
वस्त की हर सूत में उसने अपनी कारीगरी दिखलाया था ।
और पता नहीं कहां-कहां दुनियां में भारत का नाम बढ़ाया था ।
शत-शत नमन है उसको जो भारत का मजदूर कहलाया था।
लेखिका सहायक हिन्दी शिक्षिका, कार्मल स्कूल हजारीबाग

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