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मधुमेह से बचना है तो विकृत शहरी जीवन शैली त्यागें : डॉ. ढनढनिया

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रांची : विश्व मधुमेह दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार को रांची के प्रतिष्ठित मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. विनय कुमार ढनढनिया ने कहा कि फर्मा कंपनियां हमारे स्वास्थ्य की चिंता नहीं करेगी। उन्हें अपनी दवाई बेचने से मतलब है, इसलिए हमें इसकी चिंता खुद करनी होगी। एक पत्रकार वार्ता के दौरान डॉ. ढनढानिया ने साफ-साफ कहा कि विकृत शहरी जीवन शैली के कारण मधुमेह जैसी बीमारियां हमें जकर लेती है। ऐसे में हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क होना होगा।

डॉ. ढनढानियां ने कई चौकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए और कहा कि शहरी क्षेत्रों में 12 से 15 प्रतिशत लोग मधुमेह से पीड़ित हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 3 से 5 प्रतिशत लोगों को यह रोग है। जैसे-जैसे शहरीकरण बढ़ रहा है उसी अनुपात में यह बीमारी बढ़ रही है। इसके लिए अनियमित जीवन शैली जिम्मेदार है।

डॉ. ढनढानिया ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में 8 से 9 प्रतिशत लोग प्री डायविटीज के दौर से गुजर रहे हैं जबकि 11 प्रतिशत ऐसे लोग शहरों में हैं। उन्होंने कहा कि हमारा टारगेट यही वर्ग है। यदि हम इन लोगों को व्यवस्थित जीवन शैली के बारे में जानकारी दें और उनके अंदर जागरुकता उत्पन्न करें तो मधुमेह की बीमारी को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

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ढनढानिया ने कहा कि यह रोग अलकोहल, सिगरेट और मांसाहार के अनियमित सेवन से उत्पन्न होता है। इसके लिए समाज में जागरुकता लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दुनिया की फार्मा लॉबी हमारी चिंता नहीं करेगी क्योंकि उन्हें अपनी दवा बेचनी है।

लोग जितना बीमार पड़ेंगे उन्हें उतना ही फायदा होगा लेकिन हमलोग चाहते हैं कि इस जीवन शैली जन्य बीमारी को जड़ से खत्म किया जाए और यह संभव है। इसके लिए नियमित भ्रमण करें यानी पैदल चलें, नियमित खून की जांच कराएं, श्रम के महत्व को समझें, व्यायाम करें, प्रणायाम करें, योग करें, जीवन शैली में बदलाव लाएं, कम कैलोरी वाला भोजन करें, मीठे पदार्थों का सेवन कम करें, सब्जी एवं फलों का सेवन अधिक करें, दिन में तीन समय खाने के बजाए छह से सात बार खाएं, तनाव कम करने की कोशिश करें और भपूर नींद लें।

डॉ. ढनढानिया ने मधुमेह के कुछ लक्षण भी बताए, जैसे-ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाव आना, आंखों की रौशनी कम होना, ज्यादा भूख लगना, ज्यादा पसीना आना आदि। ये लक्षण यदि हैं तो समझना चाहिए कि मधुमेह हो सकता है।

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