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राज्य सरकार की अनावश्यक नीतियों से परेशान है व्यापारी : कुणाल आजमानी

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रांची : व्यापारी व उद्यमियों के टैक्स से ही सरकार के समस्त कल्याणकारी योजनाएं चली है किंतु इन्हीं करदाताओं की समस्याओं पर सरकार और ब्यूरोक्रेसी की उदासीनता चिंतनीय है। राज्य में स्थापित कई बहुराष्ट्रीय उद्योग बंद हो गए हैं, जैसे-हिटाची झारखण्ड छोडके खडगपुर स्थानांतरित हो गई, आधुनिक एनपीए में चला गया, उषा मार्टिन लगभग बंदी के कगार पर है लेकिन राज्य सरकार द्वारा इन्हें सहयोग करने का कोई अपेक्षित प्रयास नहीं किया जा रहा है। उक्त बातें आज फेडरेशन आॅफ झारखण्ड चैंबर आॅफ कॉमर्स एण्ड इन्डस्ट्रीज से जुड़े व्यापारियों ने कही।

दरअसल, शनिवार को चेंबर की राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित की गयी थी। इसके व्यापारियों की समस्याओं पर सरकार के साथ जारी संवादहीनता की स्थिति को लेकर फेडरेशन चैंबर द्वारा सभी सम्बद्ध संस्थाओं और सभी जिलों के चैंबर आॅफ कॉमर्स की संयुक्त बैठक स्टेशन रोड अवस्थित होटल ग्रीन होराईजन में आयोजित की गई। इस बैठक में कहा गया कि मोमेंटम झारखण्ड का उद्देष्य बेहतर था जिसके तहत राज्य सरकार द्वारा 26 नई व्यापारिक नीतियां लाई गई किंतु किसी भी नीति के तहत कोई प्रोजेक्ट्स नहीं आये। सरकार प्रदेश में पूर्व से स्थापित व्यापारियों व उद्यमियों के विकास और उनके व्यापार के विस्तार के लिए कभी भी चिंतित नहीं रही जिससे झारखण्ड के व्यापारियों में निराशा का बातावरण बन गया है। इसके विपरीत पिछले पांच वर्षों में व्यापारियों के पास केवल विभागीय नोटिसें निर्गत करके उन्हें अनावश्यक परेशान किया जाता रहा है।

इस मौके पर चैंबर के अध्यक्ष कुणाल अजमानी ने कहा कि राज्य का व्यापारिक विकास हो और व्यापारी समुदाय मजबूत हो, इस उद्देश्य के साथ फेडरेशन आॅफ झारखण्ड चैंबर आॅफ कॉमर्स एण्ड इन्डस्ट्रीज प्रदेश में ग्रामीण स्तर पर अपनी शाखाएं खोलेगा। प्रदेश के स्थापित व्यवसायी अनावश्यक नीतियों से परेशान हैं, सरकार की ईच्छाशक्ति और अच्छी नीतियों के बावजूद चीजें धरातल पर नहीं उतर रही हैं, ऐसे में जो भी नई सरकार आये, इसपर अवश्य चिंतन करे। सदस्य अजय भंडारी ने कहा कि 19 वर्ष पहले जब झारखण्ड बना तब हमें काफी आशाएं, अपेक्षाएं, उम्मीदें थीं, पर आज व्यापारी वर्ग यह महसूस करने लग गया है कि हम और हमारे मुद्दे हाशिए पर चले गये हैं।

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वह वर्ग जो राज्य की अर्थव्यवस्था का चक्र घुमाने में विषेष योगदान देता है, उसे राजनीतिक दल फॉर ग्रांटेड लेने लग गये हैं। हमसे संबंधित नीतियों के निर्धारण में या तो हमारी सहभागिता नगण्य कर दी जाती है, अन्यथा हमारी सहभागिता से बनी हुई नीतियों का क्रियान्वयन शिथिल कर दिया जाता है। इस मौके पर निवर्तमान अध्यक्ष दीपक मारू ने कहा कि यह चिंतनीय है कि प्रदेश में सक्षम उद्यमियों की विशाल संख्या होने के बाद भी झारखण्ड के उद्यमी यहां उद्योग नहीं लगा पा रहे हैं।

सिंगल विंडो सिस्टम की अप्रभावी व्यवस्था और विभागीय अधिकारियों की अव्यवहारिक मंशा के कारण अच्छी नीतियों का धरातल पर लागू नहीं होने से श्रमिकों के साथ-साथ राज्य से इन्वेस्टर भी पलायन करने लगे हैं। हमारा सरकार से आग्रह होगा कि अन्य राज्यों से झारखण्ड में उद्योग लगानेवाले निवेशकों की समीक्षा की जाय कि उन्होंने कितना निवेष किया है और उन्होंने कितनी सब्सिडी ली है।

कार्यक्रम के दौरान महासचिव धीरज तनेजा ने कहा कि झारखण्ड में कार्यपालिका असंवेदनशील हो गई है और विधायिकी बेपरवाह। इन्हीं परिस्थितियों से त्रस्त होकर विभिन्न जिलों के चैंबर आॅफ कॉमर्स, सम्बद्ध संस्थाओं और आम सदस्यों के आग्रह पर आज इस सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें प्राय: सभी जिलों के चैंबर आॅफ कॉमर्स के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।

 

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