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लाॅकडाउन से हजारों बुनकर हुए दाने दाने को मोहताज

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इटावा ,8 मई (सन्मार्ग लाइव) कोराना महामारी से बचाव के लिये जारी लाॅकडाउन के चलते हथकरघा उद्योग के धनी इटावा मे करीब 70 हजार बुनकर रोजी रोटी को मोहताज हो गये हैं।

इटावा में हस्तनिर्मित कपड़े की एक जमाने में चीन,जापान और कनाडा समेत दुनिया के कई विकसित देशों में जबरदस्त मांग हुआ करती थी। यहां का बुनकर कारोबार देश के विदेशी मुद्रा भंडार मे उल्लेखनीय योगदान करता था लेकिन सरकार की नीतियों और बदलते जमाने के साथ अब वो बीते दिनो की बात मानी जायेगी। हालात यह है कि इटावा के बुनकर दशकों से बदहाली के साये जीवन बसर करने को मजबूर है और अब लाकडाउन ने उन्हे दाने दाने को मोहताज कर दिया है।

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बुनकर मोहम्मद जीशान कहते है कि किसानों के गेहूं की तरह उनका भी बना माल सरकार खरीदे ताकि उनका परिवार इस कठिन समय का सामना कर सके। एक दूसरे बुनकर मजदूर नसीम ने कहा “ लाॅकडाउन के बाद अब केवल जी रहे है और कुछ भी नही है । हमारे करधे पूरी तरह से ठंडे हो चले है क्योंकि हमको सूत नही मिल पा रहा है । हम कह सकते है कि हमारे पास खाने को तो है लेकिन चूल्हा जलाने को लकड़ी नहीं है।”

बुनकर कारखाना संचालक अमीन ने कहा कि लाकडाउन के कारण कारोबार पूरी तरह से ठप है क्योंकि अभी कोई भी कच्चा माल नही आ पा रहा है और जब कच्चा माल आयेगा नहीं तो आखिर पक्का करेंगे क्या। मजदूरो का भी पैसा देने के लिए नही है इसलिए बहुत ही दिक्कत है । यह काम का बड़ा समय था आगे आने वाला समय बरसात का है जिसमे बुनकर कार्य बंद रखना होता है । पहले से जो माल बना करके रखा हुआ भी है वो कही बाहर भेजने की स्थिति नही बन पा रही है । ”

सूत रंगाई का काम करने वाले मोहम्मद सद्दाम ने कहा कि जब से यह लाॅकडाउन हुआ है तब से सूत के रंगाई का काम बिल्कुल बंद हो गया है। कारीगर के पास खाने तक के पैसे नही आ पा रहे है । लाॅकडाउन के चलते बुनकरी बिल्कुल ही बंद हो गई है । केवल परेशानी ही परेशानी है । बुनकर कारोबारी फिरोज अहमद ने कहा कि महामारी के कारण हुए लाॅकडाउन ने हर किसी के सामने मुश्किल खडी कर दी है ऐसे मे बुनकर कैसे बच सकते थे । बुनकर भी बुरी तरह से प्रभावित हुए है । रोज कमाने खाने वाले बुनकरो के चूल्हे अब बंद हो चुके है बुनकर अपने परिचित मददगारो से उधार लेकर अपना और बच्चो को पेट भर रहे है ।

बुनकर संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष मुईन अंसारी ने बताया कि जब से लाॅक डाउन हुआ है, सूत की आमद पूरी तरह से बंद हो गई है इसी कारण इटावा जिले मे हथकरधे बंद हो गए है । एक अनुमान के अनुसार करीब 7000 हथकरधे इटावा मे चालू थे जो अब लाॅकडाउन के कारण बंद हो चले है । इसी कारण बुनकर व्यापारी व मजदूर भुखमरी की कगार पर आ गए हैं और उनके परिवारों के सामने भरण पोषण के लाले पड गए हैं।

उन्होंने मांग की है कि सरकार बुनकरों की दुर्दशा पर ध्यान दे और राहत पैकेज प्रदान करे अन्यथा बुनकर व्यवसाय पूर्णतः ठप्प हो जायेगा ।

आजादी से पहले इटावा आये महात्मा गांधी को इटावा के बुनकरो ने हाथों से बना हुआ सूत भेट के तौर पर दिया गया था तभी से बुनकर गांधी जी की चरखा आंदोलन की अलख को जगाने मे लगे हुये लेकिन बुनकरी कारोबार से बुनकर अपने अपने कुनबो को सरसव्य नही कर पा रहे है।

उत्तर प्रदेश में चंद्रभान गुप्त ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में राज्य की पहली सूत मिल 1967 में इटावा में स्थापित कराई । यह सब इटावा के बुनकर कारोबार को ध्यान में रख कर बुनकरो के हितो में किया गया महत्वपूर्ण कदम समझा गया । जिस समय सूत मिल की स्थापना हुई उस समय इटावा एवं आसपास के बुनकरो को सूत सस्ते दर पर मिलना शुरू हो गया लेकिन सरकार की योजनाओं का लाभ ज्यादा समय तक बुनकर उठाने में सफल नहीं हो सका क्योंकि सरकारी मशीनरी बुनकरो का अहित करने में जुट गयी । 1967 मे स्थापति की गई सूत मिल को भी 1999 मे बंद कर दिया गया जिसे पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार ने सूत मिल को पूरी तरह से नेस्तानाबूद कर आवास विकास कालौनी स्थापित करने की प्रकिया शुरू कर दी है ।

सं प्रदीप

सन्मार्ग

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