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वैक्सीन को लेकर संस्पेंस भारी

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विवेक सक्सेना

आम आदमी की तरह मैं भी कोरोना से निपटने के लिए तैयार की जाने वाली वेक्सीन के बारे में पढ़ने के लिए बैचेन रहता हूं। इसके बारे में जितना पढ़ता हूं, उतना ही भ्रमित हो जाता हूं। हाल में जब अंतर्राष्ट्रीय दवा निर्माता कंपनी आस्ट्रा जनिका ने अपने द्वारा तैयार की जाने वाली कोविड वैक्सीन के क्लिनिकल टेस्ट को रोकने का ऐलान किया, तो मुझे बहुत आश्चर्य हुआ क्योंकि आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की मदद से तैयार किए जा रहे इस टीके का उत्पादन बाद में पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट में होने वाला है।

आस्ट्राजेनिका ने यह वजह बताई कि परीक्षण के दौरान जब कोई ऐसी बीमारी का शिकार हो जाता है जिसका कोई जवाब न हो तब हम टेस्टींग पर रोक लगा देते हैं। आक्सफोर्ड आस्ट्राजेनिका वैक्सीन के दुनिया भर में 60 स्थानो पर क्लिनिकल, तीसरे चरण के परीक्षण चल रहे हैं। इनमें अमेरिका, ब्राजील व दक्षिणी अफ्रीका भी शामिल हैं। पहले दो चरणों के परीक्षणों में वैक्सीन सफल साबित हुई है।

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भारत में तीसरे चरण का परीक्षण पिछले माह 100 लोगों पर किया जाना शुरू हुआ। बताते हैं कि इंग्लैंड में एक व्यक्ति के गंभीर रूप से बीमार पड़ जाने के कारण रोक लगाई गई क्योंकि उस पर तीसरे चरण का प्रयोग चल रहा था। अब इस बीमारी के कारण का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। भारत में पहले सीरम ने इस संबंध में रोक लगाने का यह कहते हुए ऐलान नहीं किया कि यह मामला उनके द्वारा किए जाने वाले परीक्षणों में से किसी एक का नहीं हैं।जब सरकार ने सख्ती दिखाई तो उसने वैक्सीन टेस्ट को कुछ समय के लिए अस्थाई तौर पर रोक देने का ऐलान कर दिया। ध्यान रहे कि दुनिया भर में विभिन्न रोगों के लिए बनाई जाने वाली वैक्सीन के टीके इस कंपनी द्वारा तैयार किए जाते हैं।

यह रोक अस्थाई है क्योंकि परीक्षण के दौरान इस तरह की घटनाओं को स्वाभाविक माना जाता है। हालांकि इस तरह की घटनाओं से वैक्सीन तैयार करने में देरी होती जाती है। आस्ट्राजेनिका समेत दुनिया भर की तमाम दवा निर्माता कंपनी इसे जल्दी से जल्दी तैयार करने की कोशिश में लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते है कि वहां होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के पहले दवा बाजार में आ जाए। जबकि रूस ने इसे काफी पहले ही तैयार कर लेने का ऐलान किया है। हालांकि उसकी विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगे हुए हैं।

भारत में प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त तक दवा तैयार करवा लेने का इरादा बनाया था। वैक्सीन तैयार करते समय यह जरूरी होता है कि परीक्षण के लिए बनाए गए नियम कानूनों की अनदेखी न की जाए। कहा जा रहा है कि हर हालात में यह वैक्सीन अगले साल की शुरुआत तक तैयार हो जाएगी। ट्रंप चाहते हैं कि वे चुनाव के पहले ही वैक्सीन को बाजार में ले आए ताकि कोरोना से दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की सूची में सबसे अग्रणी अमेरिका में वे अपने हक में वोट जुटा सके।

वे दोबारा राष्ट्रपति बनने के लिए मैदान में हैं। यहां याद दिलाना जरूरी हो जाता है कि रूस व चीन ने वैक्सीन लाने की जल्दबाजी में तीसरे चरण के परीक्षणों की अनदेखी कर दी थी व अपने देश में इसका इस्तेमाल भी शुरू कर दिया। जब दुनिया भर में उनके इस कदम की आलोचना हुई व वैक्सीन की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान उठाए जाने लगे तो इसके इस्तेमाल पर रोक लगाई गई। इसलिए पूरी तरह से परीक्षण से गुजरे बिना किसी वैक्सीन के बाजार में आने की आशंका बहुत कम है।यहां यह याद दिलाना जरूरी हो जाता है कि परीक्षण के पहले दो चरणों में केवल पूरी तरह से स्वस्थ युवा लोगों को ही परीक्षण के लिए चुना जाता है। जबकि तीसरे चरण मे किए जाने वाले परीक्षण में अपेक्षाकृत ज्यादा बुजुर्ग लोग जोकि किसी अन्य बीमारी का शिकार होते हैं उन्हें परीक्षण के लिए चुना जाता है व इनकी तादाद भी काफी ज्यादा होती हैं। इसलिए कुछ समय के लिए परीक्षण रोक पर वैक्सीन में कुछ अहम बदलाव कर लिए जाते हैं।

आस्ट्राजेनिका ने बयान जारी करके कहा है कि वह जल्दबाजी में कोई वैक्सीन तैयार नहीं करेगी व पूरी तरह से संतुष्ट हो जाने के बाद ही उसे बाजार में आम लोगों के इस्तेमाल के लिए उतारेगी। हालांकि उसने दुनिया भर के विभिन्न देशों में वैक्सीन पर जारी तीसरे चरण के प्रयोग रोके जाने पर कोई रोक नहीं लगाई है। सीरम इंस्टीट्यूट ने पहले कहा था कि इस रोक के कारण उसके यहां चले रहे परीक्षणों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वहां 100 लोगों पर यह परीक्षण चल रहा है।उनसे प्राप्त नतीजो को कंपनी डेटा सेफ्टी एंड मोनिटरिंग बोर्ड को सौंपती है जिसमें इस क्षेत्र के विशेषज्ञ होते हैं और  वह एक स्वतंत्र संस्था हे। वह इस तरह के परीक्षणें पर निगरानी रखती है व उसकी स्वीकृति मिलने के बाद ही कंपनी इनका दूसरे लोगों पर परीक्षण करती है। तब तक यह परीक्षण 100 लोगों तक ही सीमित रखा जाता है।

अच्छी खबर यह है कि यह रोक लगाए जाने के 48 घंटे के अंदर ही आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने कहा कि उसने फार्मा कंपनी अस्ट्रा जेनेका के साथ कोरोना वायरस के टीके के लिए परीक्षण को पुन बहाल कर दिया है। ब्रिटेन की मेडिसिन हेल्थ रेगुलेटरी अथॅरिटी द्वारा दिए गए आदेश के आधार पर पुनः परीक्षण शुरू कर दिए गए हैं। वहीं पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कहा है कि वह देश के दवा नियंत्रक से अनुमति मिलने के बाद इस वैक्सीन के लिए क्लिनिकल परीक्षणों को फिर से शुरू कर देगा।इस बीच भारत बायोटेक की वैक्सीन को बंदरों पर परीक्षण के दौरान सफल पाया गया है। इससे वैक्सीन के कारण बंदरों के शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज विकसित करने में काफी मदद मिली। इसे कोरोना के खिलाफ दुनिया में जल्दी ही वैक्सीन उपलब्ध हो जाने की उम्मीद बंधने लगी है जिसके जल्दी पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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