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सरकार ने पद से साधी जाति,‘मेवा’ ने इस्तीफा से छवि बनाया

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पटना: पूर्व शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी के इस्तीफा देने के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस्तीफे को लेकर राजनीतिक गललियारे में तरह-तरह की चर्चा हो रही है। वहीं इस्तीफे के एक दिन बाद सफाई देते हुये कहा कि वह सीएम के सच्चे सिपाही हैं। उन्होंने नीतीश कुमार की क्षवि को लेकर ही इस्तीफा दिया है।बता दें कि मेवालाल चौधरी ने गुरुवार को पदभार ग्रहण करने के कुछ देर बाद ही शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था और खुद को घर में बंद कर लिया था। मंत्री बनाये जाने के बाद से ही मेवालाल चौधरी नियुक्ति घोटालों को लेकर चर्चा में थे। विपक्ष लगतार नीतीश कुमार पर हमला बोल रहा था और पार्टी के लिये जवाब देना मुश्किल हो रहा था। वहीं, विपक्ष के हमले के बाद भी मेवालाल चौधरी गुरुवार को शिक्षा मंत्री का पदभार ग्रहण कर लिया और कुछ देर बाद ही इस्तीफा दे दिया। गुरुवार को मेवालाल ने मीडिया से बातचीत नहीं की, लेकिन एक दिन बाद सफाई दी कि नीतीश कुमार की क्षवि को लेकर ही यह फैसला लिया है। मेवालाल चौधरी के इस्तीफे के बाद विपक्षी इसे अपनी जीत बता रहे हैं तो वहीं सत्ताधारी दलों ने तेजस्वी पर भी हमला शुरू कर दिया है और इस्तीफा भी मांग रहे हैं। ज्ञात हो कि डॉ. मेवालाल चौधरी का शिक्षा मंत्री के तौर पर आना और पद संभालने के ढाई घंटे के बाद ही इस्तीफा देना, दोनों ही जदयू के तीर का कमाल हैं। जदयू के एक ही तीर ने यह दो कमाल किए हैं। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एंटी इन्कम्बेंसी और लोजपा के कारण जदयू के कुशवाहा मंत्रियों को हार का मुंह देखना पड़ा। हालत यह हो गई कि नई सरकार के शपथ ग्रहण में कुशवाहा जाति से मंत्री देना मुश्किल हो रहा था। उधर, इस जाति को शामिल किए बिना सरकार बनाने पर नीतीश कुमार को भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता था। ऐसे में जदयू ने पिछला ट्रैक रिकॉर्ड जानते हुए भी कुशवाहा जाति से मंत्री के तौर पर डॉ. मेवालाल चौधरी को शामिल किया था।
डॉ. मेवालाल चौधरी का गड़बड़ी से पुराना नाता
बिहार कृषि विश्वविद्यालय में 2014 में नियुक्तियों में गड़बड़ी हुई थी। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ. मेवालाल चौधरी को हर तरफ से घेरा गया। विवि में गलत तरीके से की गई नियुक्तियों की जांच के लिए राजभवन से पहुंची टीम ने भी गड़बड़ियों की पुष्टि की। जांच टीम ने पाया था कि मेवालाल ने अपने साले के साथ बंद कमरे में नियुक्ति प्रक्रिया तय की थी और इसमें विवि के किसी अधिकारी को शामिल नहीं किया था। पूर्व जस्टिस मो. महफूज आलम ने जब पुरानी फाइलों को देखा तो उन्हें इस बात के भी सबूत मिले कि नियुक्त किए गए 161 में से 43 उम्मीदवारों को इंटरव्यू और प्रेजेंटेशन के लिए 10 में 10 अंक दिए गए थे। जांच में पता चला कि एक खास इलाके और जाति के कई लोगों की नियुक्ति की गई थी। पश्चिम बंगाल के एक इलाके के खास समुदाय के लोगों की नियुक्ति पर भी सवाल उठे। इसलिए इस केस में पैसे लेकर नौकरी देने के तौर पर भी उम्मीदवारों के कागजात की जांच हुई। नियमों के खिलाफ जाकर विवि अधिकारियों के रिश्तेदारों को नौकरी देने को लेकर भी पूछताछ की गई थी।
मेवालाल पर हमलावर थे सुशील मोदी
चार साल पहले जब महागठबंधन की सरकार थी, तो भाजपा के सुशील कुमार मोदी ने कुलपति से जदयू विधायक बने डॉ. मेवालाल चौधरी के खिलाफ मोर्चा खोला था। उन्होंने नियुक्ति पदाधिकारी डॉ. आरबी वर्मा के बेटे और दामाद को नियुक्ति पत्र जारी करने और चौधरी के साले को एक्सपर्ट मेंबर के तौर पर रखने पर हंगामा किया। भागलपुर के सबौर थाने में जब डॉ. मेवालाल चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, तो जदयू ने विधायक रहते हुए उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया था। वह दाग धुला नहीं, लेकिन डॉ. मेवालाल चौधरी एक बार फिर जदयू के विधायक भी बने और कुशवाहा समाज के नाम पर मंत्री भी। कुशवाहा जाति को मंत्री पद देकर जदयू ने जातिगत समीकरण साध लिए थे। अब डॉ. मेवालाल चौधरी से शिक्षामंत्री पद संभालने के ढाई घंटे के बाद ही इस्तीफा लेकर यह संदेश भी तत्काल आ गया कि नीतीश कुमार छवि से समझौता नहीं करते। जदयू के महासचिव के. सी. त्यागी ने कह भी दिया है कि नीतीश कुमार राजनीति के आदर्शों से ज्यादा देर तक समझौता नहीं करते।
पत्नी की मौत के मामले से जुड़ा एक खत बाजार में
बिहार के शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी ने इस्तीफा दे दिया। पिछले दो दिन से उनकी पत्नी की मौत के मामले से जुड़ा एक खत खबरों के बाजार में घुम रहा । यह खत वीआरएस ले चुके आईपीएस अमिताभ कुमार दास ने बिहार के डीजीपी एसके सिंघल को लिखा था। इसमें मांग की गई थी कि मेवालाल की पत्नी की मौत के मामले में एसआईटी जांच कराई जाए। बताया जाता है कि 27 मई 2019 को मेवालाल की पत्नी नीता चौधरी रसोई में थीं। इसी दौरान आग लगने से वो बुरी तरह झुलस गईं। 2 जून को उनकी मौत हो गई। पत्नी को बचाने के चक्कर में मेवालाल का हाथ भी बुरी तरह झुलस गया था। बताया जाता है कि नीता रसोई में दूध उबालने गई थीं। गैस का पाइप रिसने से आग लग गई। घटना रात 8 से 9 बजे के बीच हुई थी। थाने ने अननैचुरल डेथ का केस दर्ज किया। मंत्री मेवालाल चौधरी जब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के कुलपति थे, तो उन पर भर्ती घोटाले का आरोप लगा था। डीजीपी को लिखे खत में अमिताभ दास ने नीता की मौत के मामले में मेवालाल पर सवाल उठाया है। उन्होंने लिखा कि नीता की मौत के पीछे बड़ी राजनीतिक साजिश है। हो सकता है कि इस मौत का कनेक्शन एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में हुए भर्ती घोटाले से हो। अमिताभ ने मांग की है कि सुशांत के मामले की तरह इस मामले में भी फुर्ती दिखाई जाए और एसआईटी का गठन कर जांच हो। मंत्री मेवालाल से भी पूछताछ की जाए।

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