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सनसनी नहीं, सटीक खबर

हम कभी भी इतिहास से सबक नहीं लेते!

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4 दिनों की चेतावनी के बाद महाचक्रवात अम्फान ने 20 मई को बंगाल को दहला दिया। दो शताब्दियों में अधिकांश चक्रवातों के विपरीत, इसने रास्ता नहीं बदला, कोलकाता में तबाही मचाई, सुंदरबन में जा टकराया। पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लिए लॉकडाउन के बीच यह दोहरी मार थी। जब यह कोलकाता से गुजरा, तब घोर अंधेरा छा गया और शहर के कई हिस्सों में बिजली चली गई थी। जल्द ही शहर के अधिकांश हिस्सों में बाढ़-सी हालत हो गई। अगली सुबह तक भी हम तबाही से अनजान थे। दिन चढ़ा तो भयावह तस्वीर उभरने लगी। मुख्यमंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि 5 लाख लोगों को स्थानांतरित किया गया था, जिससे मौतें कम हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 48 घंटे से कम समय में हवाई सर्वेक्षण करने के लिए पहुंच गए। उन्होंने तत्काल 1,000 करोड़ रुपये की राहत और मृतकों के परिवार को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की राशि मंजूर की। शुक्रवार शाम तक शहर के अधिकांश हिस्से में बिजली और पानी नहीं थे, लोगों का धैर्य टूटा और गुस्सा निकालना शुरू कर दिया। यह महसूस कर कि चीजें राज्य और केएमसी के नियंत्रण से परे हैं, राज्य सरकार ने आखिरकार सेना की तैनाती के लिए केंद्र से अनुरोध किया। कुछ ही घंटों में शहर में भारतीय सेना ने मोर्चा संभाल लिया। पर सेना को बुलाने में 72 घंटे की देरी क्यों? हो सकता है कि सीएम अतीत में सेना के संबंध में अपनी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण संकोच कर रही हों। सभी राहत और पुनर्वास कार्य भारतीय सेना और एनडीआरएफ द्वारा किए जा रहे हैं, राज्य तंत्र कहीं दिखा ही नहीं। कोलकाता नगर निगम के स्वयंभू प्रमुख मेयर ने दावा किया था कि सब व्यवस्था कर ली है, एक मिनट के लिए भी जलभराव नहीं होगा और अगर कोई पेड़ गिरा तो तुरंत हटा दिया जाएगा। लेकिन केएमसी की नाकामी सबसे सामने आ गई। क्या मेयर को 11 साल पहले कोलकाता में आया आयला चक्रवात याद है? हजारों पेड़ गिर गए थे, बिजली और पानी गुल हो गए थे। क्या आपने इससे कोई सबक लिया? स्पष्ट रूप से नहीं! यह मानकर कि इस बार भी चक्रवात टल जाएगा, प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा और शहर बर्बाद हो गया। 5,000 से अधिक पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए, हर तरफ तारों का जंजाल नजर आया। जबकि 5 साल पहले आश्वासन दिया गया था कि शहर इन अवैध तारों से मुक्त हो जाएगा! अम्फान के 2 दिन बाद तक केएमसी इलेक्ट्रिक आरी, डंपर आदि ढूंढ रहा था। इतना ही नहीं, गिरे पेड़ों की लकड़ी के स्वामित्व और ‘कटमनी’ के लिए टीएमसी के सिंडिकेट्स आपस में भिड़ गए। उस पर, सत्ता में बैठे लोगों की टिप्पणियां : मुख्यमंत्री बोलीं – मैं और क्या कर सकती हूं, मेरा सिर काट लो। मेयर ने कहा, क्या मैं 50,000 लोगों को तैयार रखता? ये दावे खोखले लगे कि एनडीआरएफ और भारतीय सेना के साथ राज्य आपदा बल, केएमसी, फायर ब्रिगेड की 1,000 टीमें काम में लगी हैं। खबरों में केवल भारतीय सेना और एनडीआरएफ की वर्दी नजर आई। ओडिशा फायर सर्विस की वर्दी भी दिखाई दी। अम्फान द्वारा खुद प्रभावित होने के बावजूद ओडिशा ने सुसज्जित 30 टीमें भेजी थीं।
बंगाल के लोग समय पर राहत और पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद ही दे सकते हैं।

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