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होने वाले दूल्हे का हैसियत और और स्वभाव जानने के लिए CIBIL और RTI का भी सहारा

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एक विभाग के सूचना अधिकारी ने बताया कि संभावित वर की आर्थिक हैसियत की सही सूचना पाने के लिए दुल्‍हन पक्ष द्वारा क्रेडिट इनफॉरमेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड (Cibil) की मदद भी ली जा रही है। सिबिल की सहायता से किसी भी व्यक्ति के कर्ज का विस्तृत ब्योरा प्राप्त किया जा सकता है। शादी से पहले लड़के वालों की सिबिल जानकारी इसलिए जुटाई जाने लगी है, क्योंकि इससे लड़के वाले की आर्थिक हैसियत का अनुमान लगाया जा सके।

पतियों की सैलरी व पेंशन पर भी नजर

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ये तो हुईं शादी के पहले की अर्जियां। लेकिन शादी के बाद पत्‍नियां अपने पतियों के बारे में भी जानकारी मांग रहीं हैं। पत्नियां संबंधित विभाग में आरटीआई के आवेदन में यह जानकारी मांग रहे हैं कि उनके पति की पेंशन की राशि कितनी है और वह किस बैंक खाते में जाती है। खासकर, पति-पत्नी के बीच कोर्ट केस के जुड़े मामले इसका उपयोग ज्यादा हो रहा है है। श्रम संसाधन विभाग में अर्जी देकर पत्नि नेआरोप लगाया है कि पति खर्च के लिए कुछ नहीं दे रहे हैं। उन्‍हें बताया जाए कि पति की सैलरी कितनी है? किस खाते में आती है? और किसी और पर यह किस प्रकार उनका पति पैसे खर्च कर रहा है यह भी सूचना ले रही हैं

2005 में लोक सूचना का अधिकार (आरटीआइ) कानून अस्तित्व में आया, तब किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि इसका उपयोग शादी से पहले संभावित वर के स्टेटस और शादी के बाद पति की सैलरी पता करने में भी होगा। चौंकिए नहीं, ऐसा हो रहा है और धड़ल्ले से लोग इसका उपयोग कर रहे हैं

देश में शादी के पहले से शादी के बाद तक आरटीआइ बड़े काम का साबित हो रहा है। इसके माध्‍यम से संभावित वर से लेकर शादी के बाद पति की भी जानकारी मांगी जा रही है। लड़की के पिता शादी के पहले लड़के (वर) के चाल-चलन, नौकरी व सैलरी आदि की जानकारी मांग रहे हैं तो पत्नियां अपने पति की सैलरी पता करने में इसका सहारा ले रही हैं। 
इस साल जनवरी से लेकर अक्टूबर तक आरटीआइ के जरिए 1423 लोगों ने सूचनाएं मांगी। इनमें 645  मामलों में निजी जानकारियां मांगीं। इनमें 60 फीसद को सूचना देने से मना कर दिया गया। लेकिन 40 फीसद निजी सूचनाएं दी गईं। इस तरह सिविल और आरटीआई का शादी विवाह और रिश्ते बनाने में उपयोग हो रहा है

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