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कुलपति से कांट्रैक्ट असिस्टेंट प्रोफेसर की वार्ता विफल

Contract Assistant Professor talks with VC

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रांची: रांची विश्वविद्यालय के घंटी आधारित कांट्रेक्ट असिस्टेंट प्रोफेसर की वार्ता बुधवार को कुलपति प्रो. रमेश पांडेय के साथ विफल रही। मांगें पूरी नहीं होने पर नाराज अनुबंध शिक्षकों ने कार्य बहिष्कार आंदोलन को जारी रखने का निर्णय लिया है और उन्होंने खुद को विश्वविद्यालय या कॉलेज के शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कार्य से अलग रखने का निर्णय लिया है। एक घंटे तक चली वार्ता में शिक्षकों की मांग थी कि उन्हें कोविड कार्यकाल के के दौरान प्रत्येक माह 32 हजार रुपये का भुगतान किया जाए। यानि प्रति दिन दो क्लास के आधार पर भुगतान हो, लेकिन कुलपति ने इससे इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि आॅनलाइन बिना कक्षा के कोई भी भुगतान नहीं होगा। इसके लिए उन्हें अपने विभागाध्यक्ष और कॉलेज के प्राचार्य से लिखकर रिपोर्ट आगे बढ़ाना होगा, तभी उनकी मांगों को सुनेंगे। सिर्फ कहने से मानदेय नहीं दिया जाएगा। वार्ता कर रहे शिक्षकों ने कहा कि वह छह माह पहले हुए कक्षा का रिकार्ड कहां से लेकर आएंगे। यह संभव नहीं है और न ही प्रैक्टिकल है। उन्होंने कुलपति से मांग किया कि वे फिर से सरकार से लिखकर बताएं कि ऐसा करना संभव नहीं है। शिक्षकों ने विश्वविद्यालय पर आरोप लगाया कि आठ माह होने के बाद भी अब तक कोई भी मानदेय नहीं दिया गया है,वे मुश्किल भरे दौर से गुजर रहे हैं। इधर, दोपहर 12.30 बजे अनुबंध पर कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर अपनी मांगों को लेकर रांची विश्वविद्यालय के
मुख्यालय पहुंचे। शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। मालूम हो कि कुलाधिपति ने लॉकडाउन में किसी का वेतन नहीं रोकने का निर्देश दिया था। वहीं तीन वर्ष पहले कॉलेज से यूनिवर्सिटी र्टी बनी डीएसएमयू द्वारा लॉकडाउन अवधि का शिक्षकों को भुगतान नहीं दिया गया है।

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