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PMCH में कोरोना ब्रेक डाउन, जांच के लिये डॉक्टरों को दी जा रही है HIV किट

देख लीजिए स्वास्थ्य मंत्री साहेब बाते बड़ी-बड़ी होगी, आखिर ये कैसी व्यवस्था ये हम नही बोल रहे ये बाते वहीं के डॉक्टर बता रहे है और खुलासा भी किया है। एक ओर कोरोना महामारी को लेकर पूरे देश में लॉक डाउन है तो वहीं अस्पतालों में डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी कोरोना के संदिग्ध मरीजों का इलाज करने के लिए मुस्तैदी से डटे हैं।

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पटनाः- देख लीजिए स्वास्थ्य मंत्री साहेब बाते बड़ी-बड़ी होगी, आखिर ये कैसी व्यवस्था ये हम नही बोल रहे ये बाते वहीं के डॉक्टर बता रहे है और खुलासा भी किया है। एक ओर कोरोना महामारी को लेकर पूरे देश में लॉक डाउन है तो वहीं अस्पतालों में डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी कोरोना के संदिग्ध मरीजों का इलाज करने के लिए मुस्तैदी से डटे हैं। इसी बीच बिहार के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच की कुव्यवस्था एक बार फिर सामने आई है।

पीएमसीएच में आने वाले कोरोना के संदिग्ध मरीजों के इलाज के लिए तैनात डॉक्टर यहां खुद की जान हथेली पर लेकर इलाज करने को मजबूर हैं। अपनी सुरक्षा को लेकर डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मी परेशान है तो पीएमसीएच प्रबंधन इसको लेकर पूरी तरह से लापरवाह बना हुआ है। यह बात हम नहीं बल्कि खुद पीएमसीएच के डॉक्टर बता रहे हैं। इस संबंध में पीएमसीएच में रेजीडेंट डॉक्टर के तौर पर कोरोना के मरीजों के इलाज में तैनात डॉ. बिनीता चौधरी ने अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में अपने साथ तीन अन्य डॉक्टरों की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा अपनी टीम को आत्मघाती दस्ता करार दिया है।

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डॉ. बिनीता ने लिखा है कि ‘पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, बिहार में आपातकाल में काम करने वाले आत्मघाती दस्ते। हमें PPE की जगह HIV किट दी जा रही है। इस तरह से हम कोरोना से लड़ने वाले हैं और इस तरह हम रोगी का इलाज करने जा रहे हैं। यह वास्तव में एक आत्महत्या है, जिसे हमने खुद के लिए चुना है। एक बार जब हम संक्रमित हो जाते हैं, तो हम दूसरों को भी संक्रमित कर देंगे .. कोई भी सुविधाएं नहीं, कोई उपकरण नहीं, कोई भी सैनिटाइजर नहीं, सिर्फ खाली बोतलें जैसे कि आप तस्वीर में देख सकते हैं। उन्होंने आगे लिखा कि जहां चिकित्सा अधीक्षक हमसे अधिक बिहार के सीएम के साथ अपने दोपहर के भोजन के लिए चिंतित हैं, हमें एफआईआर की धमकी दी जा रही है, यदि हम इस स्थिति में काम करने से इनकार करते हैं। तो अपना काम करते हुए खुशी से आत्महत्या कर लेते हैं।’ डॉ. बिनीता चौधरी ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विश्व स्वास्थ्य संगठन को संबोधित किया है। क्या स्वास्थ्य मंत्री साहेब डॉक्टर की जान की कीमत नही है बताइये।

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