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कचरा प्रबंध को डीएम ने देखा, ईओ ने स्कुली छात्रों को स्वच्छता की बताई बात

नोखा पश्चिम पर्टी में कचरा प्रबंधन को रोहतास डीएम ने देखा। कचरा प्रबंधन जो एक समस्या बन गई है। इसको अब वरदान बनाने के लिए नगर पंचायत नोखा कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार ने ठाना और बहुत ही कम समय मे कचरा से खाद बनाने की तैयारी शुरू कर दी और कम समय मे ही कचरा से खाद बनने लगा।

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रोहतासः- जिले के नोखा पश्चिम पर्टी में कचरा प्रबंधन को रोहतास डीएम ने देखा। कचरा प्रबंधन जो एक समस्या बन गई है। इसको अब वरदान बनाने के लिए नगर पंचायत नोखा कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार ने ठाना और बहुत ही कम समय मे कचरा से खाद बनाने की तैयारी शुरू कर दी और कम समय मे ही कचरा से खाद बनने लगा। इस मौके पर त्रिदण्डी देव ऑक्सन स्कूल के छात्रो को कचरा प्रबंधन के गुर को बताया।

छात्रों से डीएम ने बात की और स्वच्छता पर चर्चा की। उपभोक्तावाद के कारण प्राकृतिक संसाधनों का दोहन अपने चरम पर है और हमारे सामने पर्यावरण को बचाए रखने का महत्वपूर्ण दायित्व है। जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर एकजुट हो रही हो तब एक मनुष्य और समाज के रूप में हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रकृति के साथ तारतम्यता बनाकर जीना है और उसी के मुताबिक अपनी जीनशैली को ढालना है। डीएम ने सराहना करते कहा कि  कचरा प्रबंधन इस दिशा में उठाया गया बेहतरीन कदम है। कचरा निस्तारण, रीसायक्लिंग, कचरे से ऊर्जा उत्पादन इन सभी को कचरा प्रबंधन या वेस्ट मैनेजमेंट कहा जाता है।

रीसायक्लिंग से कई उपभोक्ता वस्तुएं बाजार में दोबारा उपलब्ध हो जाती है जो कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में कमी ला रही है। एल्युमिनियम, तांबा, स्टील, कांच, कागज और कई प्रकार के प्लास्टिकों की रीयासक्लिंग की जा सकती है। धातुओं की रीसायक्लिंग करने से मांग के अनुरूप कई वस्तुएं बाजार में उपलब्ध हो जाती है और खनन में कमी आती है। कागज को रीसायकल कर कम से कम उतने और पेड़ों को तो कटने से रोका जा सकता है। वहीं कचरा निस्तारण में घरों से निकले आर्गेनिक कचरे को बायो कंपोस्ट और मीथेन गैस में बदल कर लोगों द्वारा उपयोग किए गए खाद्य पदार्थों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। मीथेन गैस जहां ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत है।

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वहीं जैविक खाद मिट्टी की ऊर्वरता को स्वाभाविक रूप से बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। यह किसानों की कृत्रिम खाद पर निर्भरता को भी कम करती है। जैविक खाद से बने उत्पादों की बाज़ार में अच्छी खासी कीमत मिलती है  ।कचरा प्रबंधन को सस्टेनेबल विकास का महत्वपूर्ण अवयव माना जाता है। सस्टेनेबल विकास का तात्पर्य पर्यावरण फ्रेंडली और दीर्घकालीन विकास से है। कचरा प्रबंधन के उपभोग और पुन: उपभोग से एक चक्र बनता है जो प्राकृतिक संसाधनों पर हमारी निर्भरता को कुछ हद तक कम करता है और उनके दोहन में कमी लाता है। इसलिए इन दिनों सस्टेनेबल विकास की योजना बनाते समय कचरा प्रबंधन पर बहुत जोर दिया जा रहा है । मौके पर नप सुशील कुमार सिह , हरिओम तिवारी , अरविन्द सिह , दिवाकर पांडे , संतोष तिवारी , आशा मिस्रा , रजनी तिवारी , सहित कई रहे।

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